अब 30 साल पहले ही लग जाएगा हार्ट अटैक का पता, अमेरिकी डॉक्टरों ने किया दावा

Risk of heart attack: कुछ शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने दावा किया है कि वे ब्लड टेस्ट और कुछ मार्कर्स की मदद से भविष्य में हार्ट अटैक आने के खतरे का अंदाजा लगा सकते हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 28, 2024 2:01 AM IST

Heart attack prediction: हार्ट अटैक आने से लोगों की जान भी जा सकती है। लेकिन, परेशानी की बात यह है कि दुनियाभर में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हार्ट अटैक आने से पहले कई लोगों को अंदाजा भी नहीं होता कि उनके साथ ऐसा कुछ हो सकता है। इसीलिए, कई बार जानकारी की कमी और हार्ट अटैक के लक्षणों (Symptoms of heart attack) को समझ न पाने के कारण भी कई लोगों की जान बचा पाना मुश्किल हो सकता है। इसीलिए, डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स द्वारा हमेशा हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ (cardiovascular health) से जुड़े सभी टेस्ट कराने और उनकी रिपोर्ट पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

इस बीच द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी में कहा गया है कि 2 ब्लड टेस्ट्स की मदद से हार्ट अटैक आने के खतरे का पता कई साल पहले ही लगाया जा सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30 साल पहले ही हार्ट हेल्थ की स्थिति के आधार पर हार्ट अटैक के खतरे का अंदाजा (new test that can assume risk of heart attack 30 years in advance) लगाया जा सकता है।

अब तक ऐसे लगाया जाता था हार्ट अटैक के रिस्क का अंदाजा

बता दे कि हार्ट हेल्थ का पता लगाने के लिए अक्सर डॉक्टर द्वारा ब्लड टेस्ट करने या ईसीजी टेस्ट (ECG Test) कराने की सलाह दी जाती है। इन टेस्ट्स में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को एक मार्कर के तौर पर देखा जाता है। बता दें कि, बैड कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल हार्ट अटैक का एक रिस्क फैक्टर माना जाता है और इसे बढ़ने से रोकने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह लोगों को दी जाती है।

ब्लड टेस्ट की मदद से हार्ट अटैक के खतरे को भांपने की कोशिश

इस रिसर्च के प्रमुख लेखक डॉ. पॉल रिडकर (Dr. Paul Ridker, The lead author of the research) के अनुसार, एलडीएल या बैड कोलेस्ट्रॉल की मदद से पहले यह नहीं समझा जा सकता था कि किसी व्यक्ति का हार्ट कितना स्वस्थ है। लेकिन, लगभग 30 दशकों की रिसर्च के बाद यह तय किया गया है कि सी-रिएक्टिव प्रोटीन या सीआरपी (C-reactive protein/ CRP)  और लिपोप्रोटीन (lipoprotein) को 2 नये बायो मार्कर के तौर पर हार्ट हेल्थ की जांच के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि सी-रिएक्टिव प्रोटीन और लिपोप्रोटीन की जांच करके और इन नये टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर हार्ट अटैक के खतरे को समझने और लोगों की जान बचाने में मदद हो सकती है।

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