घर की सफाई करने में कहीं हो ना जाए आपको ये बीमारी, जानें कारण, बचाव व इलाज
जब सफाई करते हैं तो धूल के कई कण नाक में चले जाते हैं जो हमें आंखों से दिखाई नहीं देते हैं।
सफाई करना सबसे अच्छा काम है घर से लेकर गली-मोहल्ला और देश साफ होना ही चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं सफाई करते वक्त कुछ लोगो अपना ध्यान नहीं रखते हैं जिससे गम्भीर बीमारी के शिकार हो जाते हैं। जब सफाई करते हैं तो धूल के कई कण नाक में चले जाते हैं जो हमें आंखों से दिखाई नहीं देते हैं। नाक हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है इससे ही हमारे शरीर की सांसे चलती हैं। नाक में जाने वाले धूल कण एलर्जी के कारण बनते हैं और एलर्जिक राइनाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं एलर्जिक राइनाइटिस के बारे में।
एलर्जिक राइनाइटिस के प्रमुख लक्षण
- लगातार छींकें आना और नाक से पानी जैसा तरल पदार्थ का लगातार बहना।
- नाक, आंख, तालू में खुजली होना।
- नाक बंद होना और सिरदर्द बना रहना।
क्या हैं मुख्य कारण
बदलता हुआ मौसम, तापमान में अचानक परिवर्तन, धूल-मिट्टी, नमी, प्रदूषण, जानरों के रेशे एवं बाल का शरीर में प्रवेश के साथ ही पेड़ और परागकणों के शरीर में प्रवेश करने या त्वचा पर लगने से होने वाली प्रतिक्रिया, एलर्जिक राइनाइटिस के प्रमुख लक्षण हैं। ये भी पढ़ेंः ठंड के मौसम में बादाम के दूध का सेवन क्यों है फायदेमंद ?
क्यों है खतरनाक
वैसे तो यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन आपकी सामान्य दिनचर्या को अत्यधिक प्रभावित करने में सक्षम होती है । इसका सही वक्त पर ठीक और सफल उपचार नहीं होने पर, अन्य बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। एलर्जिक राइनाइटिस के अलावा नेजल पॉलिप, साइनोसाइटिस भी संक्रमण का महत्वपूर्ण कारण है, जिसे समय पर पहचानकर उसका इलाज कराना बेहद आवश्यक है। नाक के अंदर मांस का बढ़ना, नेजल पॉलिप कहलाता है। एलर्जी होने पर हवा का आवागमन ठीक से न होने पर, इनके रास्ते बंद हो जाते हैं, और संक्रमण फैलने लगता है।
कैसे बचें
- धूल व धुंए से बचें और तापमान में अचानक परिवर्तन होने पर बचाव करें।
- मुंह और नाक पर मास्क का इसतेमाल करें। इसके अलावा बाल वाले जानवरों से दूर ही रहें।
- यदि घर में वैक्यूम क्लीनर हो, तो झाडू की जगह उसका इस्तेमाल करें ।
- पर्दे, चादर, बेडशीट व कालीन में नमी न लगने दें, समय-समय पर इन्हें धूप दिखाते रहें।
- अधिक एलर्जी होने पर सुरक्षित दवाओं का प्रयोग करें या नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।