मंकीपॉक्स से निपटने के लिए इस तरह से तैयारी कर रहे हैं दिल्ली के अस्पताल, जानिए LNJP अस्पताल के डॉक्टर ने क्या कहा

यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने जब से राज्यों और देशों को मंकी पॉक्स से बचने के लिए गाइडलाइंस का डिटेल्ड सेट जारी किया है, उसके एक दिन बाद ही दिल्ली सरकार ने बुधवार को सभी सरकारी अस्पतालों को इस बीमारी के लक्षणों को देखते ही अलर्ट रहने की चेतावनी दी है और पर्याप्त रिपोर्टिंग हो इस बात की भी सलाह दी है।

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Written By: Atul Modi | Published : June 2, 2022 6:21 PM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक 13 मई 2022 से लेकर अब तक मंकीपॉक्स (Monkeypox) के केस लगभग 23 देशों से रिपोर्ट किए जा चुके हैं। दिल्ली के हेल्थ डिपार्टमेंट के सीनियर ऑफिशियल्स का कहना है कि, अभी तक भारत में मंकीपॉक्स का एक भी केस नहीं मिला है फिर भी देश की राजधानी में इस बीमारी के केस मिलने की संभावना अधिक है, क्योंकि यहां बाहर के देशों से काफी ज्यादा पर्यटक घूमने या काम के सिलसिले में आते हैं। दिल्ली से पूरे देश में यह बीमारी काफी तेजी से फैल सकती है।

बता दें कि, मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोसिस (एक ऐसा वायरस जो जानवरों से इंसानों में फैलता है) है, जिसमें स्मॉल पॉक्स जैसे लक्षण ही ज्यादातर देखने को मिलते हैं। हालांकि WHO के मुताबिक, यह स्मॉल पॉक्स से कम गंभीर है। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यह इंफेक्शन करीब 30 देशों में देखा जा चुका है और इसके लक्षणों में बुखार, सिर दर्द, मसल्स में दर्द, चेहरे पर रैश होना आदि शामिल है। मंकीपॉक्स से निपटने के लिए दिल्ली के अस्पतालों में चल रही तैयारियों को जानने के लिए हमने एलएनजेपी अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर से बात की इस पर उन्होंने हमें विस्तार से जानकारी दी है।

मंकीपॉक्स को लेकर अस्पतालों में क्या है तैयारियां?

दिल्ली के लोक नायक अस्पताल (LNJP) के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार ने ज़ी मिडिया को बताया कि, भारत में मंकीपॉक्स के अभी तक एक भी केस सामने नहीं आए हैं मगर जिस प्रकार से दुनिया के बाकी हिस्सों में इसके मामले बढ़ रहे हैं इसको देखते हुए सरकार ने भी सतर्क रहने की सलाह दी है। केंद्र व दिल्ली सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक हमें मंकीपॉक्स के लक्षणों वाले मरीजों पर विशेष ध्यान रखना है, अगर किसी भी मरीज में रैशेज लिंफ नोड में सूजन बुखार सिर दर्द मसल्स में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर उनकी सैंपल की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री पर भी नजर रखना है। सैंपल की जांच नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी पुणे में होगी।

एक प्राइवेट अस्‍पताल के मुताबिक, हमने दिल्ली के सभी अस्पतालों को लक्षण देखे जाने वाले मरीज को लेकर अलर्ट मोड़ पर कर दिया है ताकि मंकीपॉक्स के केस को तुरंत पकड़ा जा सके।

मंकीपॉक्स को लेकर क्या है सरकार की गाइडलाइन?

मंगलवार को यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने गाइडलाइंस जारी की, कि जो ट्रैवलर्स इंफेक्शन से प्रभावित देशों से आ रहे हैं या पिछले 21 दिनों में किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रह चुके हैं तो उन्हें किसी भी तरह का लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। मंत्रालय ने सर्वेलेंस यूनिट्स को एक केस मिलने पर भी उसे एक आउट ब्रेक की तरह मानने को बोला है और इस पर गहराई से जांच करने की भी दिशा निर्देश जारी किए हैं।

मंकीपॉक्स के पहले से ही पकड़े जाने के लिए दिल्ली सरकार ने सभी जिलों को अलर्ट कर दिया है ताकि वह सेंटर द्वारा बनाई गई गाइडलाइंस को फॉलो कर सकें।

दरअसल, प्रशासन एयरपोर्ट पर बाहर से आने वाले यात्रियों पर एक कड़ी नजर बनाए हुए है, लेकिन दिल्ली में चुनौती यह बनी हुई है कि यहां हर राज्य से लोग आते हैं और खासकर बाहर आने जाने वाले यात्री दिल्ली से ही होकर अपने आखिरी गंतव्य पर पहुंचते हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बाद बुधवार को दिल्ली सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर ट्रैवल हिस्ट्री वाले मरीज को एक्यूट रैश, सूजा हुआ लिम्फ नोड, बुखार, सिर दर्द, मसल्स में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें वायरस से संक्रमित होने के शक के घेरे में रखा जाएगा। ऐसे मरीजों के किसी संक्रमित व्यक्ति के लिंक के बारे में जांच की जाएगी और उनका सैंपल भी तुरंत टेस्ट होने के लिए भेज दिया जाएगा।

अस्पतालों के अलावा डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन को भी इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए यंत्रों के साथ तैयार रहने की सलाह दी गई है जैसे कॉन्टैक्ट ट्रैकिंग और मरीजों को आइसोलेट करना आदि। वहीं, अस्पतालों को एक केस रिपोर्टिंग फॉर्म दिया गया है जिसमें ऐसे मरीजों के लक्षण और उनकी सूचना को लिखा जायेगा।

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