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New Study: वायु प्रदूषण किशोरों में बन सकता है डिप्रेशन का कारण, जानें किशोरों में क्या होते हैं डिप्रेशन के लक्षण

Depression in Teens: हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि हवा में ओजोन गैस का प्रदूषण होना बच्चों व किशोरों में डिप्रेशन होने का कारण बन सकता है। चलिए जानते हैं बच्चों व किशोरों में डिप्रेशन के क्या संकेत हैं और इसकी रोकथाम कैसे की जा सकती है।

New Study: वायु प्रदूषण किशोरों में बन सकता है डिप्रेशन का कारण, जानें किशोरों में क्या होते हैं डिप्रेशन के लक्षण

Written by Mukesh Sharma |Updated : March 16, 2022 1:43 PM IST

ज्यादातर लोग अक्सर यही समझते हैं कि छोटे बच्चे अपनी लाइफ में मस्त-मगन रहते हैं और उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं होती है। लेकिन यह सच नहीं है क्योंकि आजकल बच्चों में भी अनेक प्रकार की मानसिक समस्याएं होने लगी हैं। डेवलपमेंट साइकोलॉजी नामक जर्नल में पब्लिश की एक रिपोर्ट के अनुसार एक अध्ययन में यह पाया गया कि छोटे बच्चों व किशोरों को होने वाले डिप्रेशन का संबंध ओजोन गैस के वायु प्रदूषण से है। रिपोर्ट के अनुसार जब वाहनों, पावर प्लांट व अन्य फैक्ट्रियों आदि से निकलने वाला धुआं सूरज की रोशनी के साथ प्रतिक्रिया करता है, तो उससे ओजोन गैस बनती है। वायु में ओजोन का अधिक स्तर होने से सांस संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। स्टडी के अनुसार लंबे समय तक ओजोन से प्रदूषित वातावरण में रहने के कारण बच्चों व किशोरों को डिप्रेशन की समस्याएं हो सकती हैं। इस पर यूनिवर्सिटी ऑफ डेनवर की असिस्टेंट प्रोफेसर और लीड रिसर्चर एरिका मैन्जैक कहती हैं कि “मुझे लगता है हमारे द्वारा किए गए अध्ययन का निष्कर्ष ओजोन से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे भी आवाज उठाता है”। बच्चों व किशोरों को डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं होना उनकी शिक्षा व सामान्य जीवन दोनों को प्रभावित कर सकता है। जानें बच्चों व किशोरों में डिप्रेशन होने के संकेत व उनके बचाव।

बच्चों व किशोरों में डिप्रेशन के संकेत

अक्सर बच्चों व किशोरों को डिप्रेशन होने से उनका सोचने का तरीका बदल जाता है और साथ ही उनके व्यवहार में भी काफी बदलाव दिखाई दे सकते हैं। बिना किसी कारण से पूरा दिन उदास रहना इनमें डिप्रेशन के कारण देखा जाना वाले सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक होता है। इसके अलावा परिवार वालों या दोस्तों से अलग रहना, किसी से बात न करना, खाना खाने की आदतों में बदलाव होना और स्टडी में ध्यान न होना आदि शामिल है। वहीं कुछ बच्चों को डिप्रेशन के कारण अत्यधिक नींद आती है, जबकि कुछ रात भर सो नहीं पाते हैं। वहीं कुछ किशोरों में डिप्रेशन के दौरान बुरी आदतें भी लग सकती हैं, जैसे चोरी करना या नशीली चीजों का सेवन करना आदि।

ऐसे कर सकते हैं बचाव

अपने बच्चे को मानसिक रूप से सहारा प्रदान करना ही उनके डिप्रेशन को दूर करने का सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। आप निम्न बातों का ध्यान रखकर अपने बच्चे को डिप्रेशन का शिकार होने से बचा सकते हैं -

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  • समय समय पर अपने बच्चे से बात करें और वह क्या महसूस कर रहा है उसे पूछते रहें
  • उसके द्वारा गलती किए जाने पर उसे डांटें नहीं बल्कि अगली बार अच्छा करने के लिए उसका हौसला बढ़ाएं
  • यदि बच्चा पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पा रहा है तो उस पर ज्यादा प्रेशर डालने की कोशिश न करें
  • बच्चे के स्कूल व ट्यूशन के टीचरों से बात करें और उन्हें बच्चे की कंडीशन व आपके प्लान के बारे में बताएं
  • घर का अच्छा वातावरण रखें और पारिवारिक झगड़े व अन्य संवेदनशील मुद्दों से बच्चों को दूर रखें
  • उसे पोषक तत्वों से भरपूर व संतुलित आहार दें, ताकि उसे पर्याप्त पोषण मिले और वह स्वस्थ रहे

डॉक्टर को कब दिखाएं

डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक रोग है और इसका समय पर निवारण न करना नुकसानदायक हो सकता है। अक्सर गंभीर डिप्रेशन के कारण किशोर स्थिति के बारे में पूरी तरह से सोच नहीं पाते हैं और खुदकुशी जैसा कदम उठा सकते हैं। यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे के व्यवहार में बदलाव हो रहा है, तो बिना देरी किए जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।