
Also Read
Air Pollution And Long Covid: हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोविड से उबरने वाले और लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों को हवा में फैले प्रदूषण से अधिक नुकसान हो सकता है। जैसे कि सर्दियों का मौसम शुरू होते ही उत्तर भारत के कई इलाकों में वायु प्रदूषण की समस्या गम्भीर हो जाती है। ऐसे में आनेवाली सर्दियों के मौसम में लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों को खास एहतियात बरतनी चाहिए।
जानकारों का कहना है कि प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर असर तुरंत नहीं दिखायी देता है, लेकिन इसके हानिकारक प्रभाव कुछ साल बाद देखने को मिलते हैं। लॉन्ग कोविड से पीड़ित रहे या ठीक हो चुके लोगों को इस साल अधिक जोखिम है, क्योंकि उत्तर भारत में वायु प्रदूषण हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।
बता दें कि, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में एक बयान दिया है कि पराली जलाने की समस्या को हल करने में 4-5 साल लगेंगे। वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने हाल ही में वायु प्रदूषण (Air Pollution In Delhi) पर अंकुश लगाने के लिए 15 सूत्रीय शीतकालीन कार्य योजना की घोषणा की है। इस समय पराली जलाना एक शीर्ष चिंता का विषय है।
साउथ कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ( The University of Southern California) के शोधकर्ताओं द्वारा की गयी एक स्टडी के अनुसार, लॉन्ग कोविड के मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि, वायु प्रदूषण फैलाने वाले पार्टिकल्स, विशेष रूप से महीन कण (पीएम2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2) के सम्पर्क में आने से कोविड के मरीजों के लिए अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। स्टडी के लेखकों के अनुसार, कोविड वैक्सीनेशन कराने वाले लोगों के लिए भी यह खतरा कम नहीं है।
रिसर्च के लेखक और केपीएससी में वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक एनी जियांग ने कहा, "ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनसे पता चलता है कि जहां कोविड के टीके अस्पताल में भर्ती होने की आशंका को कम करने में सफल होते हैं, वहीं लोगों को टीका लगाया जाता है और प्रदूषित हवा के संपर्क में आते हैं, वे अभी भी वायु प्रदूषण के संपर्क में नहीं आने वाले लोगों की तुलना में खराब परिणामों के कारण जोखिम में हैं।"
डायसन में पर्यावरण देखभाल के डिजाइन प्रबंधक मुजफ्फर इजामुद्दीन ने समाचार एजेंसियों से बात करते हुए कहा, "हर साल सर्दियों के मौसम में दौरान हम एक्यूआई (Air quality Index) के स्तर में वृद्धि देखते हैं और इस साल भी स्थिति ऐसी ही बनी रह सकती है।" 'अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन' में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के मुताबिक-
जेपी अस्पताल, नोएडा के आंतरिक चिकित्सा, श्वसन और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के निदेशक ज्ञानेंद्र अग्रवाल ने वायु प्रदूषण के नुकसान से बचने और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ विशेष सुझाव दिए-
(आईएएनएस)