दिल्ली की हवा में बढ़ता प्रदूषण शहर में लोगों को कर है बीमार, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी सांस संबंधी बीमारी के मरीजों की तादाद

एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सांस संबधी बीमारियों के मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है। जैसा कि हवा में प्रदूषण सांस संबंधी बीमारियों का एक महत्वपूर्ण कारण है। प्रदूषित हवा से ऐसे लोगों को जो स्मोकिंग नहीं करते हैं या जिनकी प्री-अस्थमेटिक कंडीशन है, साइनसाइटिस, एलर्जिक राइनाइटिस, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में परेशानियां महसूस हो सकती हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 22, 2020 2:23 PM IST

Air Pollution Delhi: कोरोना वायरस की मरीज़ों की संख्या से परेशान दिल्ली शहर में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही हवा में प्रदूषण भी बढ़ने लगा है। खासतौर पर दिवाली के त्योहार के बाद हवा में धुआं बढ़ता ही जा रहा है जिससे लोगों को फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां होने लगी हैं। राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ रहे हानिकारक धुंध (स्मॉग) को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रविवार को दिल्लीवासियों को इसके प्रभावों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। (Air Pollution Delhi )

इन एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सांस संबधी बीमारियों (Respiratory Diseases) के मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है। जैसा कि हवा में प्रदूषण सांस संबंधी बीमारियों का एक महत्वपूर्ण कारण है। प्रदूषित हवा से ऐसे लोगों को जो स्मोकिंग नहीं करते हैं या जिनकी प्री-अस्थमेटिक कंडीशन है, साइनसाइटिस, एलर्जिक राइनाइटिस, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में परेशानियां महसूस हो सकती हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि, कोविड संक्रमण (Covid-19 Infection) को गम्भीर बनाने में वायु प्रदूषण की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। (Air Pollution and Lung Diseases)

समाचार एजेंसी IANS से बात करते हुए, गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजी निदेशक और प्रमुख डॉ. प्रवीण गुप्ता ने कहा, "प्रदूषण स्ट्रोक (Strokes) और दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण माना जाता है, जो स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर्स और  दिल की कोई बीमारियों का खतरा 25 फीसदी तक बढ़ा देता है।" वायु प्रदूषण के नुकसान के बारे में बात करते हुए डॉ.प्रवीण ने कहा, बहुत अधिक वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाले लोगों को इस तरह की तकलीफें हो सकती हैं-

  •  आंखों में जलन,  खांसी, गले में घरघराहट, सांस लेने से जुड़ी तकलीफें हो सकती है। (Respiratory Diseases )
  •  तो वहीं, वायु प्रदूषण फेफड़ों (Lung Diseases) और हृदय पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है।
  • स्मॉग से आंखो में जलन, थकान, माइग्रेन, सिरदर्द, चिंता और अवसाद भी हो सकता है।
  • इससे स्किन को भी नुकसान पहुंचता है और त्वचा रोग भी बढ़ सकती हैं। यह त्वचा को खराब भी कर सकता है, साथ ही  एलर्जी संबंधी विकार और बालों की समस्याएं पैदा कर सकता है। (Air Pollution Side Effects)
  • डॉ. गुप्ता ने  कहा कि पिछले हफ्तों में ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों के रोगियों में 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। (Air Pollution Delhi)

इन लोगों को है सबसे अधिक खतरा:

दिल्ली में एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल्स के एचओडी डॉ. पुनीत खन्ना ने कहा कि जैसे-जैसे सर्दी आती है, कम तापमान और हवा की धीमी गति से धुंध बढ़ जाती है।  उन्होंने बताया, "ग्राउंड-लेवल ओजोन ओ3 और पीएम 2.5 स्मॉग के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। औद्योगिक गतिविधियों और सार्वजनिक परिवहन के अलावा, सर्दियों में धुंध, पराली जलना और सड़क की धूल धुंध के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।"

कमजोर समूह में नवजात और बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और पहले से स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोग जैसे अस्थमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, मधुमेह, एनजाइना और हृदय संबंधी बीमारियों के मरीज शामिल हैं। डॉ. खन्ना के अनुसार, वायु प्रदूषण में थोड़ी सी भी वृद्धि से ओपीडी में भारी भीड़ होती है। उन्होंने कहा कि स्मॉग अवधि के दौरान, इन लोगों को सुबह और शाम के समय विशेष रूप से तीव्र शारीरिक गतिविधि से बचना चाहिए। उन्हें एन 95 मास्क पहनना चाहिए।

इस तरह करें बचाव

धर्मशीला नारायण सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. नवनीत सूद (पल्मनरी कंसल्टेंट) ने कहा कि "कोविड महामारी के बीच हवा का स्पष्ट प्रभाव दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए अधिक समस्या पैदा कर रहा है।" सूद ने कहा कि समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत है। जब भी घर से बाहर निकलें तो मास्क पहनें, सुबह और देर शाम बाहर जाने से बचें और कोविड-19 से संबंधित हर सावधानी बरतें।

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