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ज्यादातर लोग इस बात से इत्तेफाक रखते होंगे कि वायु प्रदूषण हमारी सेहत के लिए कितना घातक है लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में ये सामने आया है कि हवा में फैला प्रदूषण कोविड वैक्सीन के प्रभाव को कम कर रहा है। स्टडी के मुताबिक, कोविड के शुरू होने से पहले, जो लोग वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में आए थे उनमें कोविड वैक्सीन से बनने वाली एंटीबॉडी कम थीं। स्टडी के शोधकर्ताओं ने ये बताया है कि पीएम2.5, नाइट्रोजन डिऑक्साइड और ब्लैक कार्बन जैसे प्रदूषक तत्व इंफेक्शन से पहले लोगों में IgM और IgG एंटीबॉडी रिस्पॉन्स को 10 फीसदी तक कम करने से जुड़े हुए पाए गए हैं।
जर्नल एंवायरमेंटल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष वायु प्रदूषण से हमारे इम्यून सिस्टम पर होने वाले प्रतिकूल प्रभावों के भी सबूत प्रदान करते हैं। बता दें कि शोधकर्ताओं की टीम ने 40 से 65 साल के 927 लोगों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया। इन लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया था। ये ब्लड सैंपल 2020 में गर्मी के दिनों से लेकर 2021 से बसंत के दिनों तक लिए गए थे। इन सभी लोगों में से कुछ को वैक्सीन की एक डोज तो कुछ लोगों को दोनों डोज लगी हुई थी। ये लोग स्पेन के रहने वाले थे, जिन्हें एस्टरजेनेका, फाइजर और माडर्ना वैक्सीन की डोज लगाई गई थी।
बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (ISGlobal) के मानोलिस कोगेविनेस का कहना है कि वायु प्रदूषण ढेर सारे स्वास्थ्य नुकसान पहुंचाने से जुड़ा हुआ है, जिसमें कैंसर, ह्रदय रोग और सांस संबंधी बीमारियों के साथ-साथ डायबिटीज भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण टी हेल्पर लिम्फोसाइट्स टाइप 2 (Th2) और टी हेल्पर लिम्फोसाइट्स टाइप 17 (Th17) जैसे इम्यून रिस्पॉन्स के कारकों को बढ़ा देता है, जैसा कि एलर्जी और अस्थमा में देखा जाता है। इतना ही नहीं ये दोनों कारक एंटीवायरल इम्यून रिस्पॉन्स को भी बिगाड़ने का काम करते हैं।
शोधकर्ताओं की टीम ने वैक्सीन में मौजूद तीन प्रकार की एंटीबॉडी IgM, IgG और IgA और 5 प्रकार के वायरल एंटीजन , जिसमें से तीन स्पाइक प्रोटीन थे उनकी जांच की।
अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि महामारी से पहले असंक्रमित लोगों के PM2.5, NO2 और ब्लैक कार्बन के संपर्क में आने से वैक्सीन से बनने वाली स्पाइक एंटीबॉडी में 5 से 10 फीसदी की कमी देखी गई। एंटीबॉडी की कमीशुरू में होने वाले IgM रिस्पॉन्स और बाद में देखे गए IgG रिस्पॉन्स दोनों में ही कम पाई गई। ये नतीजे सभी वैक्सीन पर बिल्कुल एक समान थे।