
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 12, 2026 9:38 AM IST
मिर्गी के मरीजों को कई सालों तक दवाएं लेनी पड़ती हैं। (File Photo)
देशभर के मिर्गी के मरीजों को सही और सस्ता इलाज मिल सके इसके लिए दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences यानी AIIMS ने एक सस्ता और एडवांस्ड टेस्ट लॉन्च किया है। इस एडवांस्ड टेस्ट की मदद से डॉक्टर मिर्गी के मरीज के शरीर में दवा की सही मात्रा का पता लगा सकेंगे और जरूरत के अनुसार दवा की डोज तय कर पाएंगे। देश में मिर्गी के लाखों मरीज लंबे समय तक दवाओं पर निर्भर रहते हैं। लेकिन कई बार ये दवाएं कुछ मरीजों में गंभीर साइड इफेक्ट्स पैदा कर देती हैं। अब इस टेस्ट के जरिए मिर्गी के मरीजों में साइड इफेक्ट्स को कम करने में मदद मिलेगी। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि यह टेस्ट मरीजों में दवाओं के साइड इफेक्ट का खतरा पहले से पहचानने में मदद करेगा, जिससे इलाज ज्यादा सुरक्षित और असरदार बन सकेगा।
AIIMS द्वारा शुरू किया गया यह टेस्ट Genetic Screening और Personalized Medicine से जुड़ा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी मरीज के शरीर पर मिर्गी की दवाओं का क्या असर पड़ सकता है। AIIMS ने फिलहाल मिर्गी की दो महत्वपूर्ण दवाओं Levetiracetam और Lamotrigine के लिए Therapeutic Drug Monitoring (TDM) की शुरुआत की है। मिर्गी के इलाज में दवा की सही मात्रा बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. अगर दवा कम हो, तो दौरे कंट्रोल नहीं हो पाते और अगर अधिक हो, तो साइड इफेक्ट्स बढ़ सकते हैं। इस टेस्ट के जरिए दवाओं के साइड इफेक्ट को कम किया जा सकेगा।
Personalized Medicine स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा हिस्सा बनने वाली है। (Image Credit: Chatgpt)
एम्स की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह टेस्ट संस्थान की पॉलिसी के मुताबिक, बाद में ये टेस्ट बहुत कम दरों पर उपलब्ध कराए जा सकते हैं । फिलहाल प्राइवेट लैब में इसी तरह के टेस्ट के लिए हर दवा पर करीब 6,000 से 10,000 रुपये तक खर्च करना पड़ता है। यह एडवांस्ड टेस्ट डॉक्टरों को मरीज के शरीर की प्रतिक्रिया, बॉडी केमिस्ट्री और दवाओं के संभावित साइड इफेक्ट्स को समझने में मदद करेगा। इसके आधार पर डॉक्टर हर मरीज के लिए दवा और उसकी डोज को ज्यादा सटीक और सुरक्षित तरीके से तय कर सकेंगे। यह टेस्ट उन मामलों की पहचान करने में भी मददगार साबित हो सकता है, जहां मरीज नियमित रूप से दवा लेने के बावजूद शरीर में दवा का असरदार स्तर नहीं बना पा रहा हो। ऐसी स्थिति में डॉक्टर समय रहते दवा या उसकी मात्रा में बदलाव कर इलाज को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
एम्स के न्यूरोसाइंसेस सेंटर के प्रमुख प्रो. एस.बी. गायकवाड़ ने कहा कि एडवांस्ड न्यूरोडायग्नोस्टिक सुविधाएं जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के निदान और उपचार को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। वहीं, न्यूरोबायोकैमिस्ट्री लैब के इंचार्ज प्रो. अशोक शर्मा ने बताया कि इस टेस्ट के लिए केवल खून का छोटा सा सैंपल लिया जाता है। मरीज अपनी रिपोर्ट ‘ई-हॉस्पिटल’ और ‘ORS’ पोर्टल के जरिए ऑनलाइन भी देख सकेंगे। यह सुविधा AIIMS नई दिल्ली में OPD और भर्ती दोनों तरह के मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गई है। साथ ही NCI-AIIMS झज्जर कैंपस में भी यह सेवा शुरू की गई है।
मिर्गी के मरीजों को कई बार वर्षों तक दवाएं और लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कम कीमत पर एडवांस्ड टेस्ट की उपलब्धता इलाज को ज्यादा सुरक्षित, सटीक और आसान बनाने में मदद कर सकती है।