AIIMS के डॉक्टरों ने मरीज के लिए बना दी नई फोरआर्म, 3 साल तक चली प्रक्रिया

एम्स के डॉक्टरों ने एक 27 साल के मरीज के लिए पूरी फोरआर्म तैयार की है, जिसकी पूरी प्रोसीजर में लगभग 3 साल का समय लगा। डॉक्टर मनीष सिंघल ने इस मामले से जुड़ी कुछ हैरान कर देना वाली जानकारियां दी।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : August 8, 2022 1:41 PM IST

दिल्ली के एम्स अस्पताल के डॉक्टरों ने 27 साल के मरीज के लिए नई बांह तैयार की है। मरीज की फोरआर्म को फिर से तैयार करने के लिए कई अलग-अलग स्तर पर सर्जरी की गई और इस पूरी प्रोसीजर में लगभग 3 सालों का समय लगा। दरअसल, नवंबर 2019 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला एक फैक्ट्री वर्कर सुबह 5 बजे एम्स पहुंचा। उसकी बाईं बांह की फोरआर्म (कोहनी और कलाई के बीच का हिस्सा) किसी मशीन की दुर्घटना के कारण पूरी तरह से कुचली जा चुकी थी। उसकी चोट कोहनी के जोड़ से लगभग 5 सेंटीमीटर दूर थी और कलाई तक उसकी बांह के ऊतक, नसें, मांसपेशियां और हड्डी पूरी तरह से कुचले जा चुके थे। वहीं उसका हाथ काफी हद तक सुरक्षित था।

डॉक्टर समझ चुके थे कि मामला जटिल है

डॉक्टर मनीष सिंघल की प्लास्टिक सर्जरी टीम ने मरीज के क्षतिग्रस्त हिस्से की जांच की और वे इसके बाद समझ चुके थे कि यह काफी जटिल मामला है। फोरआर्म पूरी तरह से कुचली जाना और हाथ सुरक्षित होना उनके लिए एक अजीब मामला था। ऐसा इसलिए, क्योंकि जब फोरआर्म ही पूरी तरह से कुचली जा चुकी है, तो हाथ को लगाना संभव महसूस नहीं हो रहा था।

सिर्फ 6 घंटे का होता है समय

प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव और बर्न सर्जरी के हेड डॉक्टर मनीष सिंघल ने कहा कि “इस तरह के मामलों में सर्जरी सिर्फ तब ही हो पाती है, जब मरीज को दुर्घटना के बाद 6 घंटों के भीतर ही अस्पताल लाया गया हो। उन्होने आगे बताया कि किस्मत से व्यक्ति को समय रहते अस्पताल लाया गया था”

डॉक्टरों के पास थे दो विकल्प

मरीज की फोरआर्म पूरी तरह से कुचली जा चुकी थी, इसलिए सर्जन के पास सिर्फ दो ही विकल्प बच रहे थे। या तो मरीज के क्षतिग्रस्त हिस्से को काटकर उसे प्रोस्थेटिक आर्म (नकली का हाथ) लगा दिया जाए या फिर सिर्फ कुचले हुए हिस्से को निकालकर दोनों सुरक्षित हिस्सों (कोहनी और हथेली) को आपस में जोड़ दिया जाए। कुचला हुआ हिस्सा निकाल कर हाथ बहुत छोटा पड़ रहा था। ऐसे में टीम ने मरीज को फोरआर्म को फिर से तैयार करने का फैसला लिया।

तीन साल तक चली प्रोसीजर

मामला बहुत जटिल था मरीज की पूरी फोरआर्म को फिर से तैयार करना था तो इसमें तीन साल लगना भी कोई बड़ी बात नहीं थी। ऐसे तैयार की गई फोरआर्म -

  • पहली स्टेज - सबसे पहले कुचले हुए हिस्से को जल्द से जल्द अलग कर दिया गया। ऐसे में कोहनी को सिलाई करके बंद कर दिया गया था। इसके बाद अलग किए गए हाथ को बाईं टांग से जोड़ दिया गया, ताकि ऊतक जीवित रहें।
  • दूसरी स्टेज - इस चरण में नई फोरआर्म को बनाना था। टांगों से दो दो टिश्यू फ्लैप्स लिए गए। इनमें से पहले फ्री फिबुला बोन फ्लैप था, जो जिसे मांसपेशियों और नसों के साथ ही ले लिया गया था। दूसरा फ्लैप को जांघ के लिया गया, जिसमें नस व स्किन शामिल थी। इन दोनों यूनिट्स की मदद पूरी फोरआर्म बनाई गई।
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