Corona Third Wave In India: कोरोना की तीसरी लहर पर रणदीप गुलेरिया ने कह दी बहुत बड़ी बात, इग्‍नोर किया तो बहुत पछताओगे

AIIMS के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया (AIIMS Director Randeep Guleria) ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने बता दिया कि किन हालातों में आ सकती है तीसरी लहर.

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 16, 2021 11:30 AM IST

कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave In India) को लेकर हर कोई डरा हुआ है। कोविड-19 की तीसरी लहर को लेकर कई रिसर्च आ चुकी हैं जिनमें अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ एक्‍सपर्ट का कहना है कि अगस्‍त के आखिरी तक भारत में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है तो कुछ कह रहे हैं सितंबर महीने में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना है। लेकिन एम्‍स के डायरेक्‍टर रणदीप गुलेरिया (AIIMS Director Randeep Guleria) ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर स्थिति साफ कर दी है। एक समारोह के दौरान डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि अगर लोग कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें तो भारत में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना बहुत कम है। उन्‍होंने कहा "मुझे नहीं लगता कि जितनी खतरनाक कोरोना की दूसरी लहर थी उसी तरह कोरोना की तीसरी लहर भी होगी।" यानि कि अगर लोग मास्‍क पहनें, सोशल डिस्‍टेंसिंग बनाए रखे और सेनिटाइजर का यूज करें तो भारत में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना काफी कम है।

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बच्‍चों के लिए खतरनाक होगी तीसरी लहर (Corona Third Wave Could harmful for children)

जब डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया से ये पूछा गया कि कोरोना की तीसरी लहर का बच्‍चों का क्‍या असर हो सकता है तो उन्‍होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर बच्‍चों के लिए खतरनाक हो सकती है। उन्‍होंने कहा कि क्‍योंकि बड़ों और युवाओं को वैक्‍सीन लग चुकी है, लेकिन बच्‍चों को अभी तक वैक्‍सीन नहीं है, इसलिए उनका संक्रमण की चपेट में आने का खतरा ज्‍यादा है। हालांकि गुलेरिया ने साथ ही ये भी कहा कि हो सकता है अगले कुछ महीनों के अंदर बच्‍चों को कोरोना वैक्‍सीन लगना शुरू हो सकता है।

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अगर तीसरी लहर आई तो क्‍या करनी होगी तैयारी? (Prevention From Corona Third Wave)

जोधपुर एम्स के प्रोफेसर और हेड डॉ. अमित गोयल ने आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है, लेकिन बच्चों में इतनी गंभीर बीमारी नहीं होती है। दूसरी लहर में भी बच्चों में गंभीर बीमारी नहीं थी। सबसे जरूरी है कि हॉस्पिटल्स में मैन पावर बढ़ाई जाए। सभी को ये पता है कि देश के स्वास्थ्य कर्मी किन हालातों में काम कर रहें हैं। आम नागरिकों के अलावा हेल्थ वर्कर्स को भी इलाज का प्रोटोकॉल देखकर ही इलाज करना होगा दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल में आपातकालीन विभाग की प्रमुख डॉ. ऋतु सक्सेना के अनुसार, सरकार को तुरंत छोटे-बड़े हॉस्पिटल्स में आईसीयू बेड बढ़ाने की शुरुआत कर देनी चाहिए। सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि छोटे हॉस्पिटल्स में भी तैयारियां अपने लेवल पर की जाना चाहिए।

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जिस तरह फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग कराई जाती है, उसी तर्ज पर अस्पताल में डॉक्टर, नर्स, सुरक्षा कर्मी इन सभी लोगों को कोविड की ट्रेनिंग करानी चाहिए। इससे लहर से निपटने से आसानी होगी। हर व्यक्ति का इस्तेमाल होना चाहिए। ट्रेंड मैन पावर होना बहुत जरूरी होता है। डेंटिस्ट डॉक्टर्स के साथ ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों की भी ट्रेनिंग करानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें ड्यूटी पर लगाया जा सके।

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