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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 9, 2022 2:59 PM IST
कोविड से ठीक हुए लोगों को इस मानसिक स्वास्थ्य समस्या का खतरा 25 फीसदी ज्यादा! साइंटिस्ट ने जारी की चेतावनी
कोरोना काल में हर व्यक्ति को किसी न किसी मानसिक और शारीरिक परेशानी का शिकार होना पड़ा था, ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि कोविड से ठीक होने के बाद भी लोग अब परेशानी क्यों झेल रहे हैं। हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि कोविड से संक्रमित लोगों को संक्रमण के चार महीने बाद भी साइक्रेटिक डिसऑर्डर का खतरा 25 फीसदी तक बढ़ा हुआ पाया गया। ये खतरा अन्य प्रकार के सांस संबंधी संक्रमण की तुलना में था, जिससे लोग बीते कोरोना काल में परेशान रहे।
अमेरिका की ओरिगोन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड रोगियों में 3.8 फीसदी की दर से मानसिक विकारविकसित होने का खतरा रहा जबकि अन्य सांस संबंधी संक्रमण की दर 3 फीसदी ही रही। 0.8 फीसदी का ये अंतर करीब 25 फीसदी बढ़े हुए खतरे को दर्शाता है
शोधकर्ताओं की टीम ने विशेष रूप से एंग्जाइटी डिसऑर्डर और मूड डिसऑर्डर पर गौर किया और पाया कि दोनों में मामूली अंतर था लेकिन एंग्जाइटी डिसऑर्डर का खतरा थोड़ा ज्यादा था और मूड डिसऑर्डर के खतरे में कोई बदलाव नहीं पाया गया।
ओएसयू के कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड ह्यूमन सांइस में न्यूट्रिशन के डॉक्टरल छात्र लॉरेन चैन का कहना है कि अध्ययन के नतीजे कोविड इंफेक्शन के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने की दिशा में मरीजों और एक्सपर्ट्स को अधिक रूप से सक्रिय होने की जरूरत पर ध्यान देने की बात करते हैं।
चैन का कहना है कि वे लोग, जिन्हें अतीत में कोविड हुआ था अगर उन्हें एंग्जाइटी महसूस हो रही है या फिर उन्हें कुछ बदलाव महसूस हो रहा है कि वे किस मानसिक दौर से गुजर रहे हैं तो उन्हें तुरंत सहायता प्राप्त करने की जरूरत है।
जर्नल वर्ल्ड साइकेट्री में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 46, 610 कोविड संक्रमित रोगियों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया। इन मरीजों में अलग-अलग प्रकार का सांस संबंधी संक्रमण होने का पता चला था इसलिए इनकी तुलना की गई कि आखिर कैसे कोविड से रोगियों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ।
शोधकर्ताओं ने दो समयावधि के दौरान साइकेट्रिक दरों का निदान किया। पहली समयावधि थी कोविड का निदान होने के 21 से 120 दिनों तक और दूसरी कोविड का निदान होने के 120 से 365 दिनों तक। इन दोनों समयावधि में रोगी को अतीत में कोई मानसिक बीमारी नहीं हुई थी।
जब ये मरीज डॉक्टर के क्लीनिक छोड़ गए और कहीं न कहीं इनकी देखभाल बंद हो गई लेकिन चैन ने कहा कि इनके डॉक्टर्स ने दो सप्ताह के अंतराल पर इन्हें वापस बुलाकर इनके स्वास्थ्य की जांच की।
चैन ने कहा कि मैं ये नहीं कहता हूं कि कोविड से संक्रमित हर एक मरीज को इस प्रकार की समस्या होगी लेकिन अगर आपको या फिर आपके परिवार के किसी सदस्य को ये समस्या शुरू हो जाती है तो इसे नजरअंदाज न करें। आपको अपनी और अपने आसपास मौजूद लोगों का बहुत ध्यान रखना चाहिए।