... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Jitendra Gupta | Published : December 15, 2022 2:48 PM IST
किडनी काम करना बंद कर दें तो ये दवा बचा सकती है जान! स्टडी में दावा नसों की सूजन और दूसरी परेशानियों में कारगर
हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक किडनी अगर किसी दिक्कत में हो तो आपको उसका पता भी नहीं चलेगा। खासकर तब तक, जब तक आप गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ते हैं। गुर्दे जब काम करना बंद कर देते हैं तो एक जानलेवा स्थिति पैदा कर देते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए आपको किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में ये सामने आया है कि जब गुर्दे अचानक काम करना बंद कर देते हैं, जो कि एक गंभीर स्थिति है, तो उसका उपचार पहले से मौजूद दवा से किया जा सकता है। अगर आप भी ये सुनकर हैरान हो गए हैं तो जरा रुकिए आपको बताते हैं कैसे।
चूहों पर हुए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि आमतौर पर एंजाइना और हाई ब्लड प्रेशर के उपचारमें काम आने वाली दवा गुर्दों और दिल को होने वाले दीर्घकालिक नुकसान से बचाने में प्रभावी है क्योंकि ये किडनी को गंभीर रूप से होने वाले नुकसान को कम कर सकती है। इस स्थिति को अंग्रेजी भाषा में एक्यूट किडनी एंजरी भी कहते हैं।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ये स्टडी किडनी को होने वाले गंभीर नुकसान के लिए उपचार का प्रभावी रास्ता निकाल लेगी। बता दें कि दुनियाभर में करीब 20 फीसदी रोगी इसी गंभीर बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती होते हैं।
इस स्थिति में आमतौर पर आप दूसरी बीमारियों की वजह से परेशानी का शिकार होते हैं, जिसकी वजह से किडनी तक रक्त का बहाव कम हो जाता है और इस टॉक्सिसिटी की वजह दूसरी दवाइयां हैं। ये स्थिति है, जिसका इलाज समय पर न किया जाए तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। अगर आप ठीक भी हो जाते हैं तो ये स्थिति फिर भी आपकी किडनी को नुकसान पहुंचाती रहती है और साथ ही साथ आपके दिल को भी नुकसान पहुंचता है।
वे लोग, जो इस स्थिति से ठीक हो जाते हैं उनमें से 30 फीसदी लोगों को क्रोनिक किडनी डिजीज का खतरा होता है। बाकी बचे 70 फीसदी लोग, जिनकी किडनी सही तरीके से काम करती है उन्हें भी इस रोग के होने का खतरा 30 फीसदी तक रहता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग की एक टीम ने इस स्टडी में पाया कि एक्यूट किडनी इंजरी के मरीजों के खून में एंडोथेलिन नाम के प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जो सूजन को बढ़ाने का काम करता है और रक्त वहिकाओं को संकुचित बनाता है। किडनी के ठीक होने के बाद सही तरीके से काम करने पर भी इस प्रोटीन का लेवल हाई बना रहता है।
इस स्थिति से परेशान चूहों में एंडोथेलिन की ठीक वैसी ही वृद्धि को देखने के बाद एक्सपर्ट ने एंडोथेलिन सिस्टम को ब्लॉक करने वाली दवा दी। ये दवा आमतौर पर एंजाइना और हाई ब्लड प्रेशर के उपचार में मदद करती है, जो कि एंडोथेलिन के उत्पादन को कम करती है और कोशिकाओं में ही एंडोथेलिन रिसेप्टर्स को नष्ट कर देती है।
इन चूहों पर चार सप्ताह तक निगरानी रखी गई। शोधकर्ताओं ने दवा देने के बाद पाया कि इस दवा की वजह से ब्लड प्रेशर कम हो गया, सूजन में कमी पाई गई और किडनी में घाव के निशान भी कम हुए। इतना ही नहीं रक्त वहिकाएं भी पहले से ज्यादा ठीक पाई गई और किडनी बेहतर तरीके से अपना काम करने लगी। ये स्टडी साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित हुई है, जिसे मेडिकल रिसर्च काउंसिल और ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने फंड किया है।