दशहरा, दिवाली में बढ़ सकता है कोरोना का खतरा, 36% भारतीय त्योहारों में शामिल होने को तैयार

हाल ही में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि करीब 36 प्रतिशत भारतीय बड़े पैमाने पर इस फेस्टिव सीजन में सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी में है। यदि सर्वे के आंकड़े सही साबित होते हैं, तो कोरोनावायरस के फैलने की आशंका काफी हद तक बढ़ सकती है।

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Written By: Anshumala | Published : October 9, 2020 3:54 PM IST

Coronavirus Spread in Festivals in Hindi: एक तरफ कोरोना का प्रसार थमने का नाम नहीं ले रहा, वहीं त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में लोगों को कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल होगा। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि करीब 36 प्रतिशत भारतीय बड़े पैमाने पर सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी में है। यदि सर्वे के आंकड़े सही साबित होते हैं, तो कोरोनावायरस के फैलने (Coronavirus spread in Festivals) की आशंका काफी हद तक बढ़ सकती है। अक्टूबर-नवंबर में नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और अंत में दीवाली जैसे त्योहार आते हैं, लोगों में इन सभी त्योहारों को सेलिब्रेट करने का एक अलग ही जोश नजर आता है। हालांकि, कोरोना के कारण इस वर्ष सारे त्योहार फीके ही बीत रहे हैं।

लोग निकल सकते हैं त्योहारों में घर से बाहर

कोविड-19 महामारी के कारण पिछले कई महीनों से अपने घरों की चारदीवारों तक सीमित रहने वाले लोग अब सकारात्मक भावनाओं के साथ अपने कदम बाहर रखने और सामाजिक तौर पर आयोजित कार्यक्रमों में घुलने मिलने का फैसला कर सकते हैं। 'लोकल सर्किल्स' ने आगामी त्योहारी सीजन के दौरान लोगों की समाजीकरण की योजना को समझने के लिए एक सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण में भारत के 226 जिलों से 28,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं।

23 % लोगों ने कहां रिश्तेदारों और दोस्तों से जाएंगे मिलने

सर्वे के पहले प्रश्न में पूछा गया था कि लोग इस त्योहारी सीजन के दौरान किस तरह से समाजीकरण की योजना बना रहे हैं? इस प्रश्न के जवाब में खुलासा हुआ कि 3% लोग पड़ोस के कार्यक्रमों में भाग लेंगे, तीन प्रतिशत ने कहा कि वे उन निजी मिलन समारोह या पार्टियों में शामिल होंगे, जिनका उन्हें निमंत्रण मिलेगा। वहीं 23 % ने कहा कि वे अपने करीबी परिवार और दोस्तों से मिलने जाएंगे, जबकि 7 प्रतिशत ने कहा कि वे उपर्युक्त सभी कार्यों को करेंगे। वहीं, 51 फीसदी ने कहा कि वे बिल्कुल भी समाजिकरण नहीं करेंगे। इसका मतलब यह है कि 36 फीसदी भारतीय इस त्योहारी सीजन में सामाजिक होना चाहते हैं।

ओणम में लापरवाही बरतने से प्रतिदिन 10 हजार कोविड मामले सामने आए

गौरतलब है कि सितंबर की शुरुआत में ओणम त्योहार समारोह के दौरान केरल के निवासी काफी लापरवाह हो गए थे, जिसके परिणामस्वरूप कोरोनावायरस के मामलों में प्रतिदिन 4,000 से 10,000 की बढ़ोत्तरी देखी गई थी। इसी वजह से केरल सरकार ने धारा 144 लागू कर दी और अक्टूबर के पूरे महीने के लिए राज्य भर में पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया। कोरोनावायरस के कारण लंबे समय से भारतीय मेल-जोल, विस्तारित परिवार से मिलने और भीड़ भरे स्थानों पर आने-जाने से बचते आ रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि आगामी त्योहारों के दौरान यह चेन टूटने की संभावना है।

लोगों से मिलने-जुलने से मिलेगी खुशी

अगला सवाल यह पूछा गया कि कोविड-19 (Covid-19) के बावजूद ऐसे कौन से प्रमुख कारण हैं, जो वे इस त्योहारी सीजन में सामाजिक तौर पर भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं। इस पर 17 % लोगों ने कहा कि यह उनके और उनके परिवार के लिए सामाजिक रूप से एक कठिन साल रहा है। बाहर जाकर लोगों से मिलना उन्हें खुश करेगा, जबकि 10 प्रतिशत ने कहा कि सामाजिक दबाव होगा, इसलिए उन्हें ऐसा करना होगा। वहीं, 63 % ने कहा कि वे सावधानी बरतने के साथ सामाजिक भागीदारी का हिस्सा बनेंगे, ऐसे में सब ठीक होगा। कोई समस्या नहीं आएगी, जबकि पांच प्रतिशत ने कहा कि वह पहले ही कोविड -19 संक्रमण से उबर चुके हैं, इसलिए यह चिंता का विषय नहीं है। वहीं पांच फीसदी अनिश्चित थे।

इससे पता चलता है कि 63 प्रतिशत लोग जो इस त्योहारी सीजन को सामाजिक बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि वे सावधानियों का पालन करते हुए सुरक्षित रहेंगे, जबकि कुछ लोग त्योहारों का आनंद लेने और कुछ सामाजिक दबाव में समाज का हिस्सा बनेंगे।

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