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Written By: Jitendra Gupta | Updated : March 17, 2022 3:42 PM IST
सिर्फ 3 दिन में निपाह वायरस से बचा सकती है ये वैक्सीन! अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बताया कितनी सेफ है वैक्सीन
टेक्सास यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी वैक्सीन तैयार की है, जो मात्र तीन दिन में जानलेवा निपाह वायरस से सुरक्षा प्रदान कर सकती है। निपाह एक ऐसा वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में बड़ी तेजी से फैलता है। ये संक्रमण दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन और संक्रमित जानवरों के मल-मूत्र के संपर्क में आने से इंसानों में फैलता है। ये वायरस बीते 4 वर्षों के दौरान भारत में तीन बार रिपोर्ट किया जा चुका है और इस संक्रामक रोग से करीब 20 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जिसमें से एक 12 साल का बच्चा भी शामिल है, जो केरल का रहने वाला था।
कोविड की ही तरह निपाह वायरस भी सांस संबंधी कणों के कारण फैलने वाला संक्रमण है। लेकिन ये कोविड की तुलना में अधिक घातक है क्योंकि इससे संक्रमित होने वाले करीब तीन-चौथाई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। डब्लूएचओ की मानें तो ये एक ऐसा वायरस है, जो अगली महामारी का सबसे बड़ा कारण बन सकता है।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने निपाह वायरस के स्ट्रेन के संपर्क में आने के तीन से सात दिन बाद अफ्रीकन ग्रीन बंदरों पर ये वैक्सीन ट्राई की थी और उन पर ये इम्यूनिटी टेस्ट किया था।
जर्नल प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस (पीएनएएस) में प्रकाशित अध्ययन के परिणाम ये दर्शाते हैं कि जिन बंदरों को वैक्सीन लगी थी वो सभी इस बीमारी से सुरक्षित थे जबकि 67 फीसदी जानवरों को वायरस के संपर्क में आने से पहले वैक्सीन लगाई गई थी। अध्ययन के मुताबिक, उन्हें वायरस से आंशिक सुरक्षा मिली लेकिन वो बच गए।
अध्ययन के मुख्य लेखक और विश्वविद्यालय के मेडिकल ब्रांच डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर थॉमस, डब्लू. गीसबर्ट का कहना है कि ये वैक्सीन सुरक्षित, इम्यूनिटी बढ़ाने वालीऔर प्रभावी पाई गई है। वैक्सीनेशन की मदद से निपाह वायरस का शिकार होने वाले बंदर, जो कि गंभीर रूप से शिकार थे उनपर भी सुरक्षित साबित हुई है।
थॉमस का कहना है कि ये अध्ययन किसी भी महामारी के फैलने के दृश्य में वैक्सीन की दक्षता और सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है। हालांकि कम से कम कितनी डोज की जरूरत पड़ेगी इसकी पहचान करने के लिए और अध्ययन की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा वैक्सीन से बनने वाली इम्यूनिटी कितने वक्त तक रहेगी ये भी पता लगाया जाना बाकी है।