
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : June 16, 2022 2:35 PM IST
एचआईवी-एड्स को ऐसी बीमारियों में गिना जाता है, जो जानलेवा तो हैं ही साथ ही इनका कोई पक्का इलाज भी नहीं हो पाया है। कई सालों से अनेक देशों के वैज्ञानिक इस बीमारी का इलाज खोजने में लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक इसका इलाज ढूंढने में सफल नहीं हो पाए हैं। लेकिन हाल ही में इजराइल देश के वैज्ञानिकों ने एक खुशखबरी दी है। खबरों के अनुसार यह रिसर्च इजराइल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी के द जॉर्ज एस वाइज फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज में स्कूल ऑफ न्यूरोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, और बायोफिजिक्स की एक टीम ने की गई। इस स्टडी के परिणाम में पाया गया कि एचआईवी-एड्स का इलाज संभवत: किया जा सकता है। बता दें कि अब तक एचआईवी का कोई इलाज नहीं मिल पाया था, हालांकि, उपलब्ध इलाज की मदद से इसे फैलने से रोकने, लक्षणों को गंभीर होने से बचाने और मरीज के जीवन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस नई स्टडी से मिले परिणामों से नई उम्मीद जगी है।
दरअसल इजराइल के वैज्ञानिकों को ऐसी वैक्सीन बनाने में कामयाबी मिली है, जिसके परिणाम एचआईवी वायरस पर प्रभावी दिख रहे हैं। दरअसल वैज्ञानिकों ने मानव शरीर में मौजूद टाइप-बी व्हाइट ब्लड सेल्स के जीन में कुछ बदलाव किए, जिसके बाद एचआईवी वायरस को तोड़ने में कामयाबी मिली है। इस कामयाबी से उम्मीद जगी है कि इस स्टडी के रिजल्ट की मदद से एचआईवी-एड्स का पक्का इलाज ढूंढा जा सकता है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार यह रिसर्च डॉ. आदि बार्जेल द्वारा ली की जा रही टीम ने की जिसमें उन्होंने टाइप बी व्हाइट ब्लड सेल्स पर अध्ययन किया। व्हाइट ब्लड सेल्स यानी सफेद रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर में संक्रमण के लड़ने के लिए एंटीबॉडी तैयार करती हैं। वैज्ञानिकों ने इसी इन्हीं कोशिकाओं के जीन पर काम किया और उसके परिणाम सकारात्मक पाए गए।
नेचर मैगजीन में पब्लिश की गई रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल जर्नल में इस मॉडल द्वारा तैयार किए गए एंटीबॉडीज को सुरक्षित व प्रभावी बताया है और साथ ही यह भी कहा गया है कि ये एंटीबॉडी सिर्फ वायरस पर ही नहीं अन्य रोगों पर भी काम करने की क्षमता रखता है। इंटरनेट पर रिसर्च से संबंधी मिली जानकारियों के अनुसार यह फॉर्मूला सिर्फ एचआईवी ही नहीं बल्कि कैंसर और ऑटोइम्यून जैसी बीमारियों पर भी काम कर सकता है।
अक्सर लोग एचआईवी और एड्स को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इन्हें एक कहना भी ठीक नहीं होगा। अगर सरल शब्दों में कहें तो एड्स (AIDS), एचआईवी (HIV) की गंभीर स्टेज है। एचआईवी का पूरा नाम ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (Human immunodeficiency virus) और एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम (acquired immune deficiency syndrome) है। अगर एचआईवी से संक्रमित किसी व्यक्ति की समय रहते देखभाल न की जाए, तो धीरे-धीरे यह स्थिति गंभीर हो जाती है और एड्स के रूप में विकसित हो जाती है।