कोरोना काल में बच्चों के लिए बेहद जरूरी हैं ये 9 टीके, लगवाने में देरी से बच्चे की जान को हो सकता है खतरा

Vaccine for Childrens in hindi : कोरोना काल में जरूरी है बच्चों को ये 9 टीके लगवाना, लापरवाही बच्चे के लिए खड़ी कर सकती है बड़ी परेशानी।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : April 27, 2021 3:30 PM IST

Vaccine for Childrens in hindi : कोरोनावायरस महामारी के दौरान बच्चो के माता-पिता बच्चो के टीकाकरण को लेकर दुनियाभर के बाल रोग विशेषज्ञ से लगातार सवाल कर रहे है। हालांकि कोविड इन्फेक्शन की दूसरी लहर से पूरा देश फिर से थम सा गया है। डॉक्टर माता-पिता से बच्चो को रूटीन टीकाकरण कराने के लिय विनती कर रहे है ताकि बच्चे अन्य संक्रामक बीमारियों से बच सकें। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी टीकाकरण को एक आवश्यक स्वास्थ्य सेवा का दर्जा दिया है। हालांकि कोविड-19 केसेस के बढ़ने से हॉस्पिटल पर भी मरीजो का बोझ बढ़ रहा है। माता-पिता अपने बच्चे को टीका लगवाने को लेकर उलझन में हैं। कुछ माता-पिता टीके को देरी से लगवाने के लिए भी योजना बनवा रहे है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अनावश्यक रूप से इसमें देरी करना घातक हो सकता है। आपके बच्चों के लिए टीका बहुत मूल्यवान हो सकता है। टीकों के संरक्षण के बिना मरीज जल्दी से बढ़ सकते हैं और इसका भयानक परिणाम भी दिख सकता है।

नवजात शिशुओं और बच्चों को लगाये जाने वाले बुनियादी टीकाकरण

  1. खसरा मम्प्स या रूबेला
  2. हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी
  3. पोलियो (ओरल या इंजेक्शन)
  4. डीटीपी
  5. न्यूमोकोकस और हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा
  6. चिकन पॉक्स
  7. टाइफाइड
  8. इन्फ्लुएंजा
  9. रोटावायरस

महामारी के कारण बच्चे के टीका लगाने में देरी करने से होने वाले नतीजे

माता-पिता को डॉक्टर से चर्चा किए बिना बच्चे के बूस्टर टीकाकरण की डोज में देरी नहीं करनी चाहिए। बच्चे के टीके में देरी करने से बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। हमने देखा है कि अमेरिका में खसरा ने कहर मचाया है क्योंकि वहां माता-पिता ने संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए वैक्सीनेशन कैलेंडर का पालन नहीं किया था। देश को संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए प्रयास करना चाहिए क्योंकि ऐसा देखा गया है कि राज्यों में टीकाकरण की प्रक्रिया में कमी देखी गई है। यह कमी अफवाहों या छोटे बच्चो में टीका के डर की वजह से हो सकता है। हर उम्र के बच्चो को कोरोना की दूसरी लहर प्रभावित कर रही है। हालांकि इन्फेक्शन की भयावहता बच्चो में ज्यादा नहीं देखी गयी है लेकिन यह बड़े बच्चो को जरूर प्रभावित करता है।

बच्चे क्यों हो रहे हैं प्रभावित

चूँकि बच्चे घर पर रह रहे हैं और अपनी स्कूल तथा पढ़ाई वाली एक्टिविटी ऑनलाइन कर रहे है इसलिए उनमे इम्युनिटी कम हो गयी है और वे इन्फेक्शन से ज्यादा प्रभावित हो रहे है। लेकिन अगर बच्चे को कोई बीमारी जैसे कि फ्लू या खांसी है और उसको कोई टीका नहीं लगा है तो उसे टीका लगवाएं क्योंकि बच्चा टीका न लगवाने से इन्फेक्शन के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकता है। चूँकि बच्चो की इम्युनिटी मजबूत होती है इसलिए वे बहुत तेजी से रिकवर होते है। छोटो शिशुओं में मजबूत इम्युनिटी अच्छी डाइट और टीके को समय से लगवाने पर हो सकती है। टीके को समय से लगवाने से बच्चा गंभीर इन्फेक्शन और बीमारी से बचा रहता है। सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के कारण माता-पिता बच्चो के टीकाकरण इसके साइड इफेक्ट या अन्य खतरे को लेकर परेशान हो जाते है। लेकिन वैक्सीन से होने वाले साइड इफेक्ट की तुलना में बीमारी की कॉम्प्लिकेशन हमेशा ज्यादा खतरनाक रहती है।

वैक्सीनेशन के दौरान नहीं भूलनी चाहिए ये बातें

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वैक्सीनेशन के लिए एक निश्चित शेड्यूल का पालन करना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे में एंटीबॉडी बनने में मदद मिलती है जिससे बच्चा टीका लगवाने से बीमारियों से बच सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ सावधानीपूर्वक वैक्सीनेशन का शेड्यूल निर्धारित करते हैं ताकि बच्चों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षा मिल सके। नवजात शिशुओं, बच्चे और बड़े बच्चों के लिए वैक्सीन कैलेंडर का पालन करना बहुत जरूरी है और अगर आपके बच्चे का टीकाकरण किसी विशेष कारण से नहीं हो पाता है तो अपने डॉक्टर से बात करें।

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