70 दिन से कोरोना संक्रमित रही महिला में नहीं दिखा कोई भी लक्षण, जानें किन लोगों में नहीं दिखता कोरोना का एक भी लक्षण

71 वर्षीय महिला ल्यूकेमिया कैंसर से पीड़ित है, जिसे सफेद रक्त कोशिकाओं का कैंसर भी कहा जाता है। इसी कारण महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई थी, जिसके कारण उसका शरीर कोरोनोवायरस को शरीर से बाहर निकालने में कम सक्षम था। ये महिला 70 दिनों तक कोरोना से संक्रमित रही और इसमें कोई भी लक्षण नहीं दिखाई दिया।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : November 6, 2020 4:06 PM IST

दुनियाभर में तबाही का मंजर फैला चुके कोरोनावायरस के लक्षण यूं तो हफ्तेभर में दिखाई देने लगते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोई व्यक्ति संक्रमित रहने के बावजूद ज्यादा से ज्यादा कितने दिनों तक लक्षणों के बिना रह सकता है? अगर आप सोच रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा दो सप्ताह तो आपका अंदाजा बिल्कुल गलत है। अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में कोरोना से संक्रमित एक 71 साल की महिला पूरे 70 दिनों तक बिना लक्षणों के रही। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, ये महिला पूरे समय के दौरान संक्रमित रही बावजूद उसके महिला में बीमारी का कोई लक्षण कभी नहीं दिखाई दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 71 वर्षीय महिला ल्यूकीमिया कैंसर से पीड़ित है, जिसे सफेद रक्त कोशिकाओं का कैंसर भी कहा जाता है। इसी कारण महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई थी, जिसके कारण उसका शरीर कोरोनोवायरस को शरीर से बाहर निकालने में कम सक्षम था। हालांकि शोधकर्ताओं ने संदेह जताया है कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग वायरस से अधिक समय संक्रमित रह सकते हैं लेकिन अब तक ऐसा होने के बहुत कम सबूत प्राप्त हुए हैं।

इस अध्ययन के निष्कर्ष, सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के दिशा-निर्देशों के प्रति विरोधाभास पैदा करते हैं। दरअसल सीडीसी ये कहता है कि COVID-19 से जूझने के बाद ठीक होने वाले लोगों के 20 दिनों के बाद संक्रामक होने की संभावना बहुत कम होती है।

जर्नल सेल में बुधवार (नवंबर 4) को प्रकाशित इस लेख में लिखा गया है कि नए निष्कर्षों से पता चलता है कि "कोरोना से ठीक होने के बाद भी या फिर जिन लोगों के कोरोना संक्रमित होने के बावजूद लक्षण दिखाई नहीं देते हैं उनमें लंबे वक्त तक संक्रामक वायरस के फैलाने की संभावना ज्यादा होती है और ये कुछ रोगियों में चिंता का विषय हो सकता है।"

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के वायरोलॉजिस्ट और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक विंसेंट मुंस्टर ने एक बयान में कहा कि जैसे-जैसे यह वायरस फैलता जा रहा है, ठीक वैसे-वैसे इम्युनोसप्रेस्सरिंग डिसऑर्डर वाले कई लोग संक्रमित होते जाएंगे और यह समझना महत्वपूर्ण है कि कोरोना इन लोगों में कैसे व्यवहार करता है।

अपने आप में अनोखा मामला

बता दें कि यह महिला फरवरी के अंत में कोरोना के प्रकोप के दौरान संक्रमित हुई थी, जो वाशिंगटन के किर्कलैंड में लाइफ केयर रिहेब सेंटर में भर्ती थी। 25 फरवरी को महिला, कैंसर से संबंधित एनीमिया के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थी और डॉक्टरों ने उसे कोरोना की जांच कराने के लिए कहा था। 2 मार्च को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। अगले 15 हफ्तों में, महिला के कोरोना के एक दर्जन से ज्यादा टेस्ट किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 105 दिनों तक महिला के ऊपरी श्वसन पथ में वायरस का पता चला और ये संक्रामक वायरस लोगों में बीमारी फैलाने में सक्षम था। ये वायरस महिला के अंदर कम से कम 70 दिनों तक रहा।

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