भारत में फेफड़ों के कैंसर के लिए 7 मिनट की इम्यूनोथेरेपी की शुरुआत

इससे पहले कैंसर के मरीजों को इम्यूनोथेरेपी दवाएं नसों के माध्यम से दी जाती थी। इस प्रक्रिया में ड्रिप के जरिए दवा को शरीर तक पहुंचाया जाता था।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : May 14, 2026 5:30 PM IST

देश में फेफड़ों के कैंसर के मरीजों के लिए एक ऐसी इम्यूनोथेरेपी लॉन्च की गई है, जो इलाज में लगने वाले समय को 80% तक कम कर देगी। जहां पहले इस प्रक्रिया में घंटों का समय लगता था, अब इसे केवल 7 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इससे पहले कैंसर के मरीजों को इम्यूनोथेरेपी दवाएं नसों के माध्यम से दी जाती थी। इस प्रक्रिया में ड्रिप के जरिए दवा को शरीर तक पहुंचाया जाता था। जिसमें अक्सर 30 मिनट से लेकर एक घंटे या उससे भी अधिक का समय लगता था। लेकिन नई तकनीक के तहत अब इसे 'सबक्यूटेनियस' इंजेक्शन के रूप में विकसित किया गया है, जिसे सीधे त्वचा के नीचे लगाया जा सकता है। यह प्रक्रिया न केवल सरल है, बल्कि बेहद असरदार भी है।

मरीजों और अस्पतालों के लिए बड़े फायदे

इस कम समय लेने वाले उपचार के कई अन्य लाभ भी हैं:

  • कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अस्पताल में लंबा समय बिताना शारीरिक और मानसिक रूप से थकाऊ होता है। 7 मिनट की यह प्रक्रिया उनके दर्द को कम करेगी और उन्हें अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल सकेगी।
  • इलाज का समय कम होने से डॉक्टर और नर्स एक ही दिन में अधिक मरीजों का इलाज कर पाएंगे। इससे सरकारी और निजी अस्पतालों में लगने वाली लंबी वेटिंग लिस्ट कम होगी।
  • भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में, जहां कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसी तकनीक स्वास्थ्य संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद करती है।

इम्यूनोथेरेपी क्या है?

इम्यूनोथेरेपी कैंसर उपचार का एक आधुनिक तरीका है। यह कीमोथेरेपी से अलग है क्योंकि यह सीधे कैंसर कोशिकाओं को मारने के बजाय शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है, ताकि शरीर खुद कैंसर से लड़ सके। यह तकनीक विशेष रूप से फेफड़ों के कैंसर के अंतिम चरणों में काफी प्रभावी साबित हो सकती है।

कौन ले सकता है थेरेपी?

भारत में, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इसे उन लोगों के लिए मंजूरी दे दी है जो नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) के 'एडजुवेंट' या 'मेटास्टेटिक' अवस्था से जूझ रहे हैं। कुछ खास मामलों में, इसका उपयोग बिना कीमोथेरेपी के एकल उपचार के रूप में भी किया जा सकता है।

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