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ऑनलाइन पढ़ाई के कारण 13-14 साल के 54% बच्चों को हो रही है एंग्जाइटी, ऐसे दिख रहे हैं बच्चों में लक्षण

कोरोनावायरस के कारण न सिर्फ लोगों की शारीरिक हेल्थ बल्कि मानसिक हेल्थ भी प्रभावित हो रही है। और ऐसा सिर्फ युवाओं और बड़ों के साथ नहीं बल्कि बच्चों के साथ भी ऐसा हो रहा है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन स्टडी के कारण बच्चे एंग्जाइटी के शिकार हो रहे हैं। 1000 बच्चों पर हुई स्टडी में पता चला कि ऑनलाइन स्टडी के दौरान 13-14 साल की 54% लड़कियों को एंग्जाइटी होने का खतरा है। हालांकि लड़कों में यह नंबर 26 से 18 प्रतिशत तक कम है।

ऑनलाइन पढ़ाई के कारण 13-14 साल के 54% बच्चों को हो रही है एंग्जाइटी, ऐसे दिख रहे हैं बच्चों में लक्षण
ऑनलाइन पढ़ाई के कारण 13-14 साल के 54% बच्चों को हो रही है एंग्जाइटी, ऐसे दिख रहे हैं बच्चों में लक्षण

Written by Rashmi Upadhyay |Published : October 26, 2020 2:06 PM IST

कोरोनावायरस के कारण न सिर्फ लोगों की शारीरिक हेल्थ बल्कि मानसिक हेल्थ भी प्रभावित हो रही है। और ऐसा सिर्फ युवाओं और बड़ों के साथ नहीं बल्कि बच्चों के साथ भी ऐसा हो रहा है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन स्टडी के कारण बच्चे एंग्जाइटी के शिकार हो रहे हैं। 1000 बच्चों पर हुई स्टडी में पता चला कि ऑनलाइन स्टडी के दौरान 13-14 साल की 54% लड़कियों को एंग्जाइटी होने का खतरा है। हालांकि लड़कों में यह नंबर 26 से 18 प्रतिशत तक कम है।

अकेलापन है एंग्जाइटी की बड़ी वजह

लॉकडाडन के दौरान बच्चों ने शुरू शुरू में तो ऑनलाइन पढ़ाई को काफी इन्ज्वॉय किया लेकिन जैसे जैसे इसका समय बढ़ता गया वैसे वैसे ये बच्चों की मानसिक हेल्थ को प्रभावित करने लगा। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चे घर में अकेले हैं जिसका असर उनकी मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा है। अपने दोस्तों ने न मिल पाना, टीचर्स से कनेक्शन का अभाव और हमेशा घर की चार दिवारी में रहना बच्चों को एंग्जाइटी का शिकार बना रहा है।

बच्चों में एंग्जाइटी के लक्षण

1. नींद न आना या बहुत अधिक नींद आना

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2. छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना

3. सोचने, बोलने या कोई भी काम करने में समय लगना

4. अकेले में समय बिताना

5. उदासी, अशांति, खालीपन या निराशा की भावना

6. सामान्य कार्यों में भी रूचि न होना या खुशी न मिलना

7. भूख और वजन में कमी होना या भूख या वजन का बढ़ना

8. चिंता, उत्तेजना या बेचैनी

9. खाना न खाना

10. हमेशा चिड़चिड़ा रहना

इस तरह रखें बच्चों का ख्याल

बच्चों की बात पहले ध्यान से सुने और उसके बाद उन्हें किसी प्रकार की सलाह या मशविरा दें।

उनके व्यवहार में बदलाव आने पर शांत रहें, गुस्सा ना करें।

बच्चों की भावनाएं समझें और उन्हें अपनी भावनाएं समझाएं।

कुछ भी छुपाएं नही, उन्हें सच बताना सीखें

बच्चों को बताएं कि वे खुद को सुरक्षित कैसे रख सकते हैं

अपने बच्चों को ऐसे वयस्कों के बीच रहने दें जो स्वस्थ हों और जिनका साथ बच्चों को पसंद आता है।

उन्हें प्यार दें, गले लगाएं और अपना स्पर्श महसूस कराएं।

बच्चे के आसपास रहें

उनके साथ मेडिटेशन करें, खेलें और एक्सरसाइज़ साथ करें

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जब बच्चे गुस्सा या चिड़चिड़ापन दिखाए, तो आप प्रतिक्रिया में शांत रहें।