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दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ कोरोनावायरस के ओमिक्रोन वेरिएंट का खतरा अब दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। डब्लूएचओ पहले ही इस वेरिएंट को दूसरे वेरिएंट से खतरनाक करार दे चुका है क्योंकि इस वेरिएंट में वैक्सीनेशन से बनने वाली इम्यूनिटी को भेद पाने की क्षमता है। लेकिन इस वेरिएंट का अब एक और खतरा सामने आया है कि ये बच्चों को भी अपना शिकार बना सकता है। जी हां, दक्षिण अफ्रीका में ही 5 साल से कम के उम्र के बच्चों में ओमिक्रोन वेरिएंट सामने आने के कई मामले सामने आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रोन वेरिएंट के कारण पांच साल से कम उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है। ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रोन के कारण ही कोविड के मामलों की संख्या दोगुना हो चुकी है।
दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला का कहना है कि देश में चल रही कोरोना की चौथी लहर में अब तक पांच साल से कम उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने के मामले भी सामने आए हैं और इनकी संख्या में तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा देश के राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (एनआईसीडी) का मानना है कि पिछले सात दिनों में कोरोना के मामलों में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
एनआईसीडी में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ वसीला जसत ने इस बात की जानकारी दी है कि इस चौथी लहर ने एक और खतरे को जन्म दे दिया है क्योंकि इस बार देश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक एनआईसीडी का कहना है कि देश में दो साल से कम उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या कुल मामलों का 10 प्रतिशत है। हेल्थ एक्सपर्ट का ये भी मानना है कि बच्चों का बीमार होना चिंता का एक विषय है और मौजूदा हालात में दो साल से कम उम्र के बच्चों में ओमिक्रॉन से संबंधित अस्पताल में भर्ती होने का 10 प्रतिशत हिस्सा हैं।"
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कोरोना संक्रमण की वर्तमान चौथी लहर शुरू हो चुकी है और शुरूआती चरणों की तुलना में अधिक बच्चों को भर्ती कराया जा रहा है, हालांकि तीसरी लहर के दौरान भी इसी तरह का ट्रेंड देखा गया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में दाखिले राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रमुख अस्पताल गौतेंग में 1,351 मरीज हैं। राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य बेड ऑक्यूपेंसी 1.9 फीसदी है और आईसीयू के लिए यह 4.2 फीसदी है।
(सोर्स-आईएएनएस)