उप्र में परिवार के 4 लोग पोलियो से पीड़ित, जानें पोलियो के कारण, लक्षण और उपचार

गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग जैसे एचआईवी पॉजिटिव है, तो छोटे बच्चे पोलियोमाइलाइटिस के लिए अतिसंवेदनशील होते है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 29, 2019 2:26 PM IST

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक ही परिवार के चार लोग समय पर पोलियो (Know about Polio) की वैक्सीन लेने के बावजूद पोलियो से प्रभावित हो गए हैं। यह परिवार हैदरगढ़ कस्बे में भटगावन गांव में रहता है, जिसमें सबिन (18), नसीम (21), खलील (20) और रियाज (17) अलग-अलग चरण में दिव्यांग हैं। उनके पिता का 10 साल पहले कैंसर से निधन हो चुका है।

दी गई थी पोलियो वैक्‍सीन 

इनकी मां हसीगुल ने कहा, "मेरे सभी बच्चे 10 वर्ष के होने के बाद पोलियो (Know about Polio) से पीड़ित हो गए। मैं उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई और उसके बाद कुछ निजी डॉक्टरों के पास ले गई, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। हमारे सभी बच्चों ने समय पर पोलियो वैक्सीन ली थीं।" चारों ने प्राथमिक शिक्षा ली है और सिर्फ सबसे बड़े लड़के ने मैट्रिक की परीक्षा दी है। हसीगुल दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालती हैं और एक छोटा जनरल स्टोर चलाती हैं जिसे उनके बच्चे देखते हैं।

कुछ और भी हो सकती है संभावना 

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों को जब इस मामले की जानकारी दी गई, तो उन्होंने कहा कि इनमें अपंगता शायद अनुवांशिक लक्षणों के कारण हुई है। हसीगुल के मायके पक्ष में पोलियो (Know about Polio) का कोई मामला नहीं है। उन्होंने कहा, "लक्षण पोलियो के हैं, लेकिन इसके कारणों का पता लगाने के लिए उन्नत स्वास्थ्य जांच कराने की आवश्यकता है।" हसीगुल के जिला मुख्यालय पर कई आवेदन करने के बावजूद परिवार को सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है।

दिव्‍यांग हो गए हैं बच्‍चे 

बच्चों को दिव्यांगता  (Know about Polio) प्रमाण पत्र तक नहीं दिए गए हैं और परिवार के पास सिर्फ राशन कार्ड है। जिला दिव्यांग अधिकारी रजनीश किरन ने कहा कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र सिर्फ उचित स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के बाद ही जारी किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "बच्चों को इसके बाद दिव्यांगता पेंशन मिल सकती है।"

पोलियो के लक्षण

कुछ लोगों को नॉन पैरालिटिक पोलियो (Know about Polio) होता है जिसके लक्षण आमतौर पर हलके फ्लू जैसे होते हैं। नॉन-पैरालिटिक पोलियो के लक्षण एक से 10 दिन तक के लिए ही नजर आते हैं। इनमें बुखार, गले में खराश, सरदर्द, उल्टी, थकान,  मेनिनजाइटिस,  पीठ में दर्द या ऐंठन,  गर्दन में दर्द या ऐंठन, बाहों या पैरों में दर्द या ऐंठन, मांसपेशियों में कमजोरी। अचानक लकवा मारना, कूल्हे, टखने और पैर में दर्द।

इन कारणों से फैल सकता है पोलियो  

  • पोलियो (Know about Polio) वायरस दूषित पानी और भोजन या वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के साथ सीधे संपर्क के माध्यम से फैलता है। पोलियो इतना संक्रामक है कि संक्रमित व्यक्ति के साथ रहने वाले व्यक्ति को भी हो जाता है।
  • गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग जैसे एचआईवी पॉजिटिव है, तो छोटे बच्चे पोलियोमाइलाइटिस के लिए अतिसंवेदनशील होते है।
  • यदि आप को पोलियो (Know about Polio) का टिका नही लगाया गया है, और आप इस रोग से ग्रस्त क्षेत्र का दौरा कर रहे है, पोलियो रोगी की देखभाल कर रहे है या पोलियो प्रयोगशाला में काम कर रहे है, तो यह आप को भी हो सकता है।
  • अत्यधिक संक्रमण वायरस के रूप में पोलियो संक्रमित मल के सम्पर्क के माध्यम से संचार करता है| संक्रमित मल के पास आने वाले खिलौनों की तरह ऑब्जेक्ट भी वायरस प्रसारित कर सकते है|
  • कभी कभी यह छींक या खासी के माध्यम से भी संचार कर सकता है। यह वायरस गले और आंतो में रहता है। इसलि यह कम है, लेकिन दुर्लभ नहीं।

उपचार

अभी तक पोलियो का उपचार नहीं खोजा जा सका है। जबकि रोकथाम के लिए पल्‍स पोलियो अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसमें पांच साल तक के बच्‍चों को पोलियो की दवा दी जाती है। परंतु लकवा होने के बाद इसका उपचार मुश्किल होता चला जाता है। बीमारी की प्रांरभिक एवं प्रबल अवस्था में बच्चा अपने अंग को हिला-डुला नहीं सकता, क्योंकि दर्द व लकवाग्रस्त दिखता है। एक बार जब दर्द ख़त्म हो जाता है और क्षतिग्रस्त मांसपेशी कुछ ठीक हालत में आती है तो उसके क्रियाकलाप में सुधार आता है। यह प्रक्रिया सात मास तक चल सकती है।

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इनपुट: (आईएएनएस हिंदी)

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