मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू से 35 की मौत, कमलनाथ ने जताई चिंता, क्या करें जब हो जाए स्वाइन फ्लू

राज्य में इस साल 35 मरीजों की मौत हो चुकी है। इस रोग को नियंत्रित करने के लिए विभाग की ओर से प्रयास जारी है। सभी चिकित्सालयों में चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, स्वास्थ्य महकमा 24 घंटे मुस्तैद है।

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Written By: Anshumala | Published : February 22, 2019 10:23 AM IST

मध्य प्रदेश में इस साल के शुरुआती दो माह में स्वाइन फ्लू से 35 मरीजों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वाइन फ्लू से हो रही मौतों पर चिंता जताई है। राज्य में स्वाइन फ्लू से हो रही मौतों पर स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने गुरुवार को यहां बताया, "राज्य में इस साल 35 मरीजों की मौत हो चुकी है। इस रोग को नियंत्रित करने के लिए विभाग की ओर से प्रयास जारी है। सभी चिकित्सालयों में चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, स्वास्थ्य महकमा 24 घंटे मुस्तैद है।"

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इंदौर में 13, भोपाल में 10 और ग्वालियर में चार मरीजों की मौत हुई हैं। राज्य में अब तक स्वाइन फ्लू के 300 संदिग्ध मरीज सामने आए, जिनमें से 60 में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। कमलनाथ ने प्रदेश के तमाम स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इसकी रोकथाम को लेकर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने स्वीकार किया कि इंदौर में स्वाइन फ्लू से मौतों का आंकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है। जांच के अभाव में व रिपोर्ट आने में लंबा वक्त लगने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है, जो कि चिंताजनक है।

उन्होंने कहा है कि इंदौर में शीघ्र वायरोलजी लैब का काम शुरू किया जाएगा। इंदौर में निíमत होने वाली वायरोलजी लैब में स्वाइन फ्लू की जांच सुनिश्चित हो, इसको लेकर भी सरकार आवश्यक सारे कदम उठाएगी।

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सावधानी बरतें

स्वाइन फ्लू से पहले और बाद में अगर आप सावधानी रखेंगे तो इस बीमारी से बच सकते हैं। अगर इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो घबराएं नहीं क्योंकि इसका इलाज संभव है।

क्‍या करें, क्या न करें

- यह एक संक्रामक बीमारी है जो इंसान से इंसान को लगती है। जब कोई स्वाइन फ्लू का मरीज छींकता है तो उसके आसपास 3 फीट की दूरी तक खड़े व्यक्तियों के शरीर में इस फ्लू का वायरस प्रवेश कर जाता है। अतः आप मरीज से कम से कम 6 फीट की दूरी बना कर रखें।

- यदि व्यक्ति अपने छींकते समय मुंह और नाक को हाथ से ढक लेता है और फिर वह जहां कहीं भी उस हाथ को लगाता है (दरवाजे, खिड़कियां, मेज, कीबोर्ड इत्यादि) वहां यह वायरस चिपक जाता है और फिर वहां से किसी अन्य व्यक्ति के हाथों पर लगकर शरीर में दाखिल हो जाता है।

- छींकते समय टिश्यू पेपर से मुंह, नाक को ढकें। उस पेपर को फौरन सावधानी से कचरे के डिब्बे में डाल दें।

- अपने हाथों को लगातार साबुन से धोते रहें। घर, ऑफिस के दरवाजों के हैंडल, की-बोर्ड, मेज आदि साफ करते रहें। जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो घर से बाहर और दूसरों के नजदीक ना जाएं।

- यदि आपको बुखार है तो उसके ठीक होने के 24 घंटे बाद तक घर पर रहें।

- लगातार पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन ना हो।

- घर से बाहर निकल रहे हों तो फेसमास्क पहनकर ही निकलने की कोशिश करें।

इन लक्षणों पर ध्यान दें

अपनी तबीयत पर गौर करें। आपको बुखार हो, खांसी हो, गले में जलन हो और सांस लेने में तकलीफ हो रही हो तो तत्काल अपने शहर के अस्पताल में जाकर इसकी जांच करवाएं। देर बिल्कुल भी न करें।

इनपुट : आइएएनएस हिंदी

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