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Acute Encephalitis Syndrome: गर्मी, उमस के साथ बिहार में बढ़े एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के मरीज, 33 बच्चों को पाया गया पीड़ित

ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अब तक मुजफ्फरपुर और आसपास के जिले से एईएस के लक्षण वाले कुल 41 बच्चे भर्ती हुए जिसमें से 33 बच्चों को एईएस पाया गया। (Acute Encephalitis Syndrome)

Acute Encephalitis Syndrome: गर्मियों का मौसम आने के साथ हर साल बिहार में  एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के मामले बढ़ जाते हैं। इस साल भी उमस और गर्मी बढ़ने के साथ ही राज्य के मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों में एक बार फिर से बच्चों में होने वाली इस बीमारी का प्रभाव दिखायी देने लगता है। समाचार एजेंसी आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार,  मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SKMCH) के ताज़ा जारी आंकड़ों के अनुसार,  अब तक मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में कुल 41 बच्चों में  एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के लक्षण दिखायी दिए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इन  41 बच्चे में से 33 बच्चों  को एईएस पाया गया। (Acute Encephalitis Syndrome in Hindi)

शनिवार को मीडिया से बात करते हुए एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभागाध्यक्ष जी. एस. साहनी ने जानकारी दी कि शिुशु वार्ड में 4 बच्चों का इलाज चल रहा है, जिसमें से 3 बच्चों में एईएस की पुष्टि की जा चुकी  है, जबकि एक मरीज संदिग्ध है। इस पीड़ित शिशु की टेस्ट रिपोर्ट अभी तक  आयी नहीं है। बता दें कि, इस साल इस बीमारी से पीड़ित कुल 41 बच्चे इस अस्पताल में  भर्ती हो चुके हैं। वहीं, शुक्रवार तक मुजफ्फरपुर और आसपास के 9 बच्चों की  मौत एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के चलते होने की पुष्टि की जा चुकी है।

हर साल गर्मियों में लौट आती है यह बीमारी

गौरतलब है कि  मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाके में जैसे ही गर्मी और उमस बढ़ती है, वैसे ही इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगती है। हर साल क्षेत्र में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की इस बीमारी से कई बच्चों की मौत भी हो जाती है।  मुजफ्फरपुर जिले में खासकर मीनापुर, कांटी, मुसहरी और पारू प्रखंड के कई गांवों में इस बीमारी ने लोगों को खासा परेशान किया है । इसके इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मुजफ्फरपुर में स्पेशल वार्ड बनाया गया है जहां डक्टरों की देख रेख में इसका इलाज किया जाता है।

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जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर ग्रामीणों क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन आजतक इस बीमारी से निजात दिलाने में सफलता नही मिली है। राहत की बात है कि इस साल इस बीमारी के कम मरीज सामने आए हैं।

(आईएएनएस)

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