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ज्यादातर लोग इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि दिमाग की नसों में होने वाली ब्लॉकेज स्ट्रोक की वजह है। लेकिन कुछ कारक ऐसे भी हैं, जिन्हें साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है। इन्हीं में से एक कारक को जर्नल ऑफ स्ट्रोक में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया है। दरअसल कुछ महामारी विज्ञान से जुड़े अध्ययनों में ये देखा गया है कि डायबिटीज, स्ट्रोक का एक प्रमुख जोखिम भरा कारक है। इस अध्ययन में ये सामने आया है कि ऐसे कई मानसिक तंत्र पाए गए हैं, जिनमें डायबिटीज इस्कीमिक स्ट्रोक से लेकर नसों में ब्लॉकेज, सीराब्रल एसवीडी और कार्डियक एम्बोलिज्म का कारण बनता है।
स्टडी में ये पाया गया है कि डायबिटीज का होना सिर्फ स्ट्रोक के बढ़े हुए खतरे से जुड़ा नहीं है बल्कि ये स्ट्रोक के बाद उन लोगों में गंभीर प्रभाव पैदा करता है, जिन्हें डायबिटीज है। ऐसा खासतौर पर बिना डायबिटीज वाले रोगियों की तुलना में होता है।
ये स्टडी इजरायल के येरुसलम स्थित हदाशह मेडिकल सेंटर के डिपार्टमेंट ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म, हेबरू यूनिवर्सिटी ऑफ येरुसलम, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरोंटो, मेयो क्लीनिक और यूनिवर्सिटी ऑफ एल अक्वीला के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है।
दरअसल हाई ब्लड शुगर की वजह से रक्त वहिकाएं समय-समय अकड़ना शुरू हो जाती हैं क्योंकि उनमें फैटी तत्व और थक्के जमा होने लगते हैं। ये थक्के रक्त वहिकाओं को संकुचित बनाने का काम करते हैं और जरूरी अंगों जैसे दिमाग तक खून की सप्लाई को प्रभावित करते हैं, जिसकी वजह से स्ट्रोक होता है।
डायबिटीज एक बहुत तेजी से बढ़ने वाली बीमारी है और इसका प्रभाव सीधे दिल और ब्रेन स्ट्रोक के खतरेको बढ़ाने का काम करता है। अगर आपको डायबिटीज है तो स्ट्रोक के बाद भी हालात खराब होने की संभावना होती है और तो और दोबारा स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
कुल-मिलाकर डायबिटीज, स्ट्रोक के तीन कारणों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाती है, जो कि इस प्रकार हैः
1-सबसे बड़ी धमनी में थक्के बनना, जिसे मेडिकल की भाषा में Large artery atherosclerosis भी कहते हैं और ये स्ट्रोक की सबसे बड़ी वजह है। ये डिस्लिपिडेमिया, हाइपरग्लेसेमिया और इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से होने वाले बदलाव के कारण होता है।
2-सीराब्रल माइक्रोवस्कुलर डिस्फंक्शन, ये एक ऐसी परेशानी है, जो डायबिटीज रोगियों में आमतौर पर देखी जाती है और लोगों को लैकुनर और हेमोरेजिक स्ट्रोक का शिकार बनाती है।
3-कार्डियोमेटाबॉलिक स्ट्रोक के संभावित कारणों में से एक दिल की अनियमित धड़कन भी है, जो कि डायबिटीज के रोगियों में 35 फीसदी तक होने की संभावना होती है।