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Written By: Jitendra Gupta | Updated : November 18, 2020 3:06 PM IST
यूं तो कोरोना किसी खास उम्र के लोगों को अपना निशाना नहीं बना रहा है इसलिए ऐसे में बच्चों की देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है। कोरोना संक्रमण के बारे में सबसे खास बात यह है कि इस जानलेवा संक्रमण के लक्षण बच्चों में थोड़े अलग तरीके से दिखाई देते हैं और थोड़ी देर में सामने आते हैं। बच्चे न सिर्फ संक्रमण के प्रति अधिक गंभीर होते है, बल्कि उनमें लक्षण भी थोड़ा अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं। यह भी एक कारण हो सकता है कि बच्चे, वयस्क की तुलना में कमजोर एंटीबॉडी प्रतिक्रिया रखते हैं।
जिस तरीके से बाकी लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन उपलब्ध नहीं है ठीक उसी तरह बच्चों के लिए भी कोरोना वैक्सीन की उम्मीद उतनी ही कम है। और जैसा कि स्कूलों को ग्रेडेड तरीके से फिर से खोलने की बात सामने आ रही है, उसके लिए बच्चों को सुरक्षित रखना उतना ही जरूरी हो जाता है बशर्ते आपको संक्रमण के संकेतों को जल्द से जल्द पकड़ना होगा। हम आपको ऐसे संकेतों के बारे में बताने की कोशिश कर रहे हैं, जिनसे आप पता लगा सकते हैं कि बच्चे को कोरोना है या नहीं।
ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन में ये साफ हुआ है कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित बच्चों में विशेष रूप से तीन लक्षण विकसित होते हैं। लेकिन इसमें अजीब बात ये है कि युवाओं की तुलना में बच्चों में गले में खराश या खांसी इतना प्रचलित नहीं है जैसा कि वयस्कों में।
शोधकर्ताओं को यह भी लगता है कि कुछ लक्षण जैसे मौसमी सर्दी, एलर्जी या अन्य वायरल संक्रमणों को अलग करने का एक तरीका हो सकता गै, जो कि बच्चों को प्रभावित कर सकता है।
हल्का-फुल्का बुखार, जो लगातार बना रहे, बच्चों में संक्रमण का एक सामान्य संकेत है। अध्ययन में लगभग 54 फीसदी बच्चों ने खुद को बुखार से पीड़ित बताया। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बुखार भी वयस्कों में संक्रमण के सबसे प्रचलित संकेतों में से एक है। 75-80 फीसदी से अधिक मामलों में वयस्कों को हल्का या तेज बुखार होने की बात कही गई है।
थकावट, थकान और ऊर्जा की कमी ऐसे अन्य संकेत हैं, जो कोरोना वायरस के कारण लोगों में दिखाई देते हैं। अध्ययन के अनुसार, क्रोनिक थकान और ऊर्जा की कमी 55 फीसदी बच्चों को परेशान करती है। यह एक चिंताजनक संकेत हो सकता है क्योंकि वायरस के कारण होने वाली थकावट से उबरने में भी अधिक समय लग सकता है।
सिरदर्द मुख्य रूप से सामान्य कोरोना का लक्षण नहीं है। यह केवल 14 फीसदी वयस्कों को प्रभावित करता है। हालांकि, बच्चों में सिरदर्द एक आम शिकायत और संक्रमण का एक संभावित संकेत हो सकता है। शोध में 50 फीसदी से अधिक बच्चों को हल्के सिरदर्द का सामना करना पड़ा।
वयस्कों की तरह ही सबसे पहले मेडिकल एटेंशन बाद की समस्याओं को रोक सकती है। भले ही बच्चे ज्यादातर मामलों में संक्रमण के मामूली रूपों से पीड़ित होते हैं, डॉक्टर की सहायता परेशानी के लक्षणों का इलाज करने में मदद कर सकती है।
अगर किसी बच्चे में एक या उससे अधिक लक्षण दिखाई देते हैं या फिर बच्चा किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आया हो, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई हो तो तुरंत उसकी कोरोना जांच करानी चाहिए। बच्चे को क्वरांटाइन करें और आइसोलेशन के तरीके को उपाय अपनाएं।