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बिना सर्ज़री डॉक्टरों ने निकाली फेफड़े में फंसी 3.5 सेमी की पिन, 18 साल की लड़की को मिली नयी ज़िंदगी

ज़ेन अस्पताल ने 18 -वर्षीय लडकी के फेफड़े में 3.5 से.मी. पिन हटाई

बिना सर्ज़री डॉक्टरों ने निकाली फेफड़े में फंसी 3.5 सेमी की पिन, 18 साल की लड़की को मिली नयी ज़िंदगी

Written by Sadhna Tiwari |Updated : December 2, 2018 4:58 PM IST

मुंबई के चेम्बुर इलाके में स्थित ज़ेन मल्टी स्पेशालिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने आधुनिक ब्रोंकोस्कोप का उपयोग कर 18 -वर्षीय लड़की के फेफड़े में फंसी 3.5 सेंटीमीटर लंबी पिन को निकालने का काम किया है| 21 नवंबर को गोवा में इनाया शेख (नाम बदला गया है ) ने स्कार्फ पहनते समय मुंह में रखी पिनको गलती से निगल लिया था| उसे तुरंत गोवा के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और पिन शरीर में कहा पर अटकी है इस बात का एक्स-रे द्वारा पता लगाया गया। डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी द्वारा पिन को निकालने की कोशिश की लेकिन इसे हटाने में वे विफल रहे। बाद मे लड़की को अन्य 3 मेडिकल कॉलेज और 2 अस्पतालों में भी ले जाया गया, पर एंडोस्कोपी के माध्यम से फेफड़ों में फंसे पिन को हटाने में सभी डॉक्टर नाकाम रहे। गोवा के एक डॉक्टर ने लड़की के परिवार को ऑपरेशन का विकल्प दिया लेकिन परिवार ने इससे इनकार दिया। परिवार ने फिर इनाया शेख को इलाज के लिए मुंबई लाने की ठानी और ज़ेन अस्पताल पहुंचे।

ज़ेन मल्टी स्पेशालिटी अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ.अरविंद काटे ने कहा, "रोगी के एक्स-रे रिपोर्ट के मुताबिक उसके फेफड़ों में एक नुकिली पिन दिखाई दे रही थी। इस पिन को जल्द से जल्द निकालना बहुत जरुरी था वरना यह, लडकी के दिल और फेफड़ों की महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती थी। इसके अलावा पिन 6 दिनों से शरीर के अंदर होने कि वजह से संक्रमण का भी खतरा था|” डॉ. काटे ने कहा “यह बहुत ही जटिल स्थिति थी और तय करना भी मुश्किल था कि ओपन सर्जरी की जाए या अन्य इनवेसिव शस्त्रक्रिया, चूंकि एंडोस्कोपी के माध्यम से इसे हटाते समय पिन के टूटने का खतरा था। ब्रोंकोस्कोपी द्वारा किसी भी नुकिली चीज को हटाने में मुश्किल होती है, खासकर जब वह फेफड़ों के परेनकाय्मा में धंसी हो। इस केस में, पिन को फोरसेप की मदद से और फ्लेक्सिब्ल ब्रोंकोस्कोप द्वारा हटाया जाता गया और यह इस काम के लिये एक बेहद कुशल पेशेवर की सहायता लेनी पड़ी। प्रक्रिया के बाद दोबारा छाती का एक्स-रे निकाला गया और उसमें सबकुछ बिल्कुल सही दिख रहा था।"

ज़ेन मल्टी स्पेशालिटी अस्पताल के निदेशक डॉ. रॉय पाटनकर कहते हैं, "डॉक्टरों और उन्नत प्रौद्योगिकी की हमारी कुशल विशेषज्ञ टीम ऐसे महत्वपूर्ण मामलों को सुलझाने में मदद करती है। हमारी कोड ब्लू टीम किसी भी आपात स्थिति को संभालने के लिए तैयार है। लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे मामलों में लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है इसलिए तत्काल वैद्यकीय चिकित्सा कि मदद लेना आवश्यक है।"

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मरीज के भाई अल्ताफ शेख कहते हैं, "इनाया को सर्जरी के बगैर आराम मिला इस बात की हमें ख़ुशी है। हम ज़ेन मल्टी स्पेशालिटी अस्पताल का शुक्रिया अदा करते हैं क्योंकि उन्होंने इस केस की चुनौती को स्वीकारा और मेरी बहन के जीवन को बचाया है।”