राजधानी की 23% जनता हो चुकी है COVID-19 का शिकार, जानें क्या है वर्तमान स्थिति

सीरो सर्वे में यह बात साफ हुई है कि राजधानी की 23 प्रतिशत जनता अब तक कोरोना का शिकार हो चुकी है। हालांकि यह कोई खुशी की बात नहीं है लेकिन फिर भी इसे काफी हद तक राहत भरा माना जा रहा है। नीति आयोग (Niti Aayog) के सदस्‍य वीके पॉल ने एक वेबसाइट के साथ हुई बातचीत में कहा कि क्योंकि दिल्ली में 6 महीने बाद भी COVID-19 अपने चरम पर है इसलिए शेष 77 प्रतिशत लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि ये ऐसे लोग हैं जिनकी जरा सी लापरवाही इन्हें संक्रमण का शिकार बना सकती है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : July 22, 2020 9:38 AM IST

देशभर में तबाही मचा रहा कोरोनावायरस का प्रभाव देश की राजधानी दिल्ली में कितना है इसका खुलासा हो चुका है। सीरो सर्वे में यह बात साफ हुई है कि राजधानी की 23 प्रतिशत जनता अब तक कोरोना का शिकार हो चुकी है। हालांकि यह कोई खुशी की बात नहीं है लेकिन फिर भी इसे काफी हद तक राहत भरा माना जा रहा है। नीति आयोग (Niti Aayog) के सदस्‍य वीके पॉल ने एक वेबसाइट के साथ हुई बातचीत में कहा कि क्योंकि दिल्ली में 6 महीने बाद भी COVID-19 अपने चरम पर है इसलिए शेष 77 प्रतिशत लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि ये ऐसे लोग हैं जिनकी जरा सी लापरवाही इन्हें संक्रमण का शिकार बना सकती है।

बातचीत में वीके पॉल आगे कहते हैं कि कोरोना नामक संक्रमण से बचने के ​लिए एहतियात बरतने बहुत जरूरी है। दिल्ली के हर व्यक्ति को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा, बाहर निकलने से पहले मास्क पहनने होंगे और साफ सफाई का ध्यान रखना होगा। इन चीजों का पालन कर संक्रमण की चपेट में आने से बचा जा सकता है। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) के निदेशक एसके सिंह ने सर्वे के बारे में बताया कि इसमें बिना पूर्व जांच किए 21,387 लोगों का सैंपल लिया गया था, जिसमें से 23 प्रतिशत लोग कोरोना संंक्रमित पाए गए। सिंह कहते हैं कि उन्होंने दिल्ली की जनता को 2.2 करोड़ माना जिसमें से करीब 46 लाख लोग संक्रमित पाए गए।

coronavirus and face mask

क्‍या है सीरो सर्वे?

सीरो-प्रीवलेंस स्‍टडी में सीरोलॉजी (ब्लड सीरम) जांच का इस्तेमाल कर किसी आबादी या समुदाय में ऐसे लोगों की पहचान की जाती है, जिनमें किसी संक्रामक रोग के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो जाते हैं। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल द्वारा दिल्ली सरकार के सहयोग से 27 जून से 10 जुलाई तक किया गया अध्ययन यह भी दिखाता है कि बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्तियों में लक्षण नहीं थे। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “सीरो-प्रीवलेंस अध्ययन के परिणाम दिखाते हैं कि औसतन, पूरी दिल्ली में आईजीजी एंटीबॉडी की मौजूदगी 23.48 प्रतिशत है। यह अध्ययन यह भी दिखाता है कि कई संक्रमित लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं थे। ”सर्वे के तहत दिल्ली के सभी 11 जिलों के लिए सर्वेक्षण टीमें गठित की गई थी। चयनित व्यक्तियों से उनकी लिखित सहमति लेने के बाद रक्त के नमूने लिए गए और उनके सीरम में आईजीजी एंटीबॉडी तथा संक्रमण की जांच की गई। इसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा स्वीकृत कोविड कवच एलिसा का इस्तेमाल किया गया।