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Written By: Atul Modi | Updated : September 29, 2021 7:36 PM IST
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रेबीज एक संक्रामक वायरल रोग है। आमतौर पर रेबीज वायरस से संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर, नेवला और सियार के अलावा अन्य जानवरों के काटने से भी रेबीज रोग फैलता है। मगर 95-96% रेबीज के मामले रेबीज से संक्रमित कुत्ते के काटने से होता है। रेबीज के लक्षण दिखाई देने के साथ ही यह घातक हो जाते हैं। मगर रेबीज वायरस का पूरी तरह से रोकथाम किया जा सकता है। वायरस की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार भी काफी गंभीर है। यही वजह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2030 तक कुत्तों से होने वाले रेबीज के उन्मूलन के लिए एक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार की गई है। जिसके तहत 'नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग मीडिएटेड रेबीज एलिमिनेशन 2030' लॉन्च किया है जिसमें केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन व डेयरी मंत्रालय भी योगदान करेगा।
विश्व रेबीज दिवस के मौके पर मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में देश को रेबीज मुक्त बनाने का संकल्प लिया इसके लिए 'नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग मीडिएटेड रेबीज एलिमिनेशन" कार्यक्रम का अनावरण किया गया, जिसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रेबीज से निपटने के लिए रणनीति तैयार की गई है। कार्यक्रम के अंतर्गत जागरूकता अभियान, अस्पतालों में टीकाकरण की उपलब्धता के साथ-साथ आवारा कुत्तों का भी टीकाकरण किया जाएगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन भी भारत का सहयोग करेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार ने कहां की रैबिट 100% जानलेवा है लेकिन वैपकिंग से 100% बचाओ भी संभव है दुनिया में रेबीज से होने वाली मौतों में से 33% मौतें भारत में होती है। उन्होंने बताया कि 2030 तक कुत्तों से होने वाले रेबीज के उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार की गई है जिसके तहत सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने का लक्ष्य तय किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में जानवरों के द्वारा काटे जाने पर सुरक्षित और प्रभावी इलाज की सुविधाएं मौजूद है।
रेबीज एक घातक वायरल जूनोटिक रोग है, जो समय पर टीकाकरण से पूरी तरह से रोका जा सकता है। भारत में रेबीज संक्रमण का बहुत अधिक बोझ होने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक हर साल करीब 20,000 लोगों की मौत रेबीज वायरस के कारण होती है। इनमें रेबीज वायरस से संक्रमित कुत्तों के काटने से होने वाली मौतें 95% से ज्यादा है।
बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के अधिकारियों ने के अनुसार, इस साल 104 वार्डों में लगभग 79 हजार कुत्तों को रेबीज की वैक्सीन लगाई गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व पशु स्वास्थ्य संस्थान के रेबीज मुक्त लक्ष्य को 2030 तक पूरा करने के इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है, अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के इस कदम से देश को रेबीज मुक्त बनाने में बल मिलेगा। बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका ने हर साल एक लाख कुत्तों का टीकाकरण करने का लक्ष्य बनाया है जिनमें से 50 प्रतिशत कुत्तों की संख्या स्ट्रीट डॉग यानी गलियों में पाए जाने वाले कुत्तों की है।
रेबीज वायरस से निपटने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी पुणे में एक समर्पित रेबीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेट्री का शुभारंभ किया गया है जोहर सुविधाओं से लैस होगा। यह पहल रेबीज के लिए राष्ट्रव्यापी प्रयोगशाला परीक्षण क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगी।
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