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केरल में सिर्फ कोरोना ही नहीं बल्कि रेबीज से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। रेबीज के कारण इस साल राज्य में अब तक 14 मौत हो चुकी हैं। हाल ही में केरल के पलक्कड़ में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 19 साल की एक कॉलेज स्टूडेंट श्रीलक्ष्मी की कुत्ते के काटने के बाद रेबीज के कारण मौत हो गई। केरल में रेबीज के कारण हो रही मौतों में चौंकाने वाला मामला यह है कि दरअसल, जिन 14 लोगों की मौत हुई हैं, उनमें से 3 लोगों ने एंटी-रेबीज वैक्सीन ली हुई थी। इस घटना के बाद राज्य के लोगों के मन में डर का माहौल बना हुआ है और सभी के मन में यह प्रश्न है कि वैक्सीन के बाद भी रेबीज के प्रति सुरक्षा गारंटी है या नहीं। चलिए जानते हैं। वहीं कुछ लोग वैक्सीन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठा रहे हैं।
तिरुवनंतपुरम के श्री अवित्तम थिरुनल अस्पताल में सहायक प्रोफेसर और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शीजा सुगुणन ने जानवरों के काटने के बाद इस्तेमाल की जाने वाली सुरक्षित प्रक्रियाओं के बारे में बताया।
न्यूइंडियनएक्सप्रेस पर मिली जानकारी के अनुसार जब डॉक्टर शीजा से पूछा गया कि जब कोई जानवर काट ले या दांत या पंजे से खरोंच मार दे, तो ऐसे में क्या करना चाहिए। इस पर डॉक्टर ने बताया कि सबसे पहले घाव या खरोंच को चलते पानी के नीचे (जैसे नल आदि) लगातार 15 मिनट तक साबुन के साथ धोना चाहिए। उसके बाद अगर संभव हो तो घाव को अल्कोहल या आयोडीन के घोल के साथ साफ करना चाहिए, ताकि वह कीटाणुरहित हो जाए।
आगे डॉक्टर ने बताया कि जानवर के काटने के तुरंत बाद उसे धोना और किटाणुरहित करना है। लेकिन जिस दिन आपको जानवर ने काटा है उसी दिन आपको रेबीज की पहली खुराक लगना बहुत जरूरी है। इसमें डॉक्टर ये बता रही हैं कि घर पर घाव की सफाई करने से संक्रमण रोकने की पुष्टि नहीं हो सकती है।
आपको यह भी देखना है कि घाव कितना बड़ा है। अगर जानवर द्वारा काटे गए घाव से खून भी निकला है, तो इसे कैटेगरी 3 में रखा जाता है। ऐसे में घाव के अंदर ही एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (Anti-rabies Immunoglobulin) देना पड़ सकता है। डॉक्टर ने आगे बताया कि जानवर के काटने के 7 दिनों के भीतर ही एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन देना बेहद जरूरी है।
डॉक्टर शीजा के अनुसार जानवर के काटने के एक से तीन महीनों के भीतर ही यह रोग विकसित हो जाता है और यहां तक कि कुछ दुर्लभ मामलों में जानवर के काटने के बाद रोग विकसित होने में 6 साल भी लग सकते हैं। इसलिए अगर जानवर के काटने के बाद किसी व्यक्ति ने वैक्सीन नहीं ली है, तो वह अब भी जल्द से जल्द ले सकता है।