Respiratory Illness In Bengal: बंगाल में एक अजीब वायरस के कारण 130 बच्‍चे बीमार, सांस लेने में हो रही है बच्‍चों को दिक्‍कत

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्‍चों में सांस संबंधी बीमारी के केस बढ़ने से उन्‍हें बच्‍चों में श्वसन संबंधी मामले बढ़ने का खतरा दिख रहा है.

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : September 16, 2021 11:06 AM IST

नॉर्थ बंगाल में सांस की बीमारी के चलते पिछले कुछ दिनों से करीब 130 बच्‍चे बीमार हो गए हैं। डॉक्‍टर्स को संदेह है कि यह रेस्पिरेटरी सिन्सिटियल वायरस (आरएसवी) (Respiratory Syncytial Virus)के कारण हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्‍चों में सांस संबंधी बीमारी के केस बढ़ने से उन्‍हें बच्‍चों में श्वसन संबंधी मामले बढ़ने का खतरा दिख रहा है। वहीं, राज्‍य सरकार द्वारा एक्‍सपर्ट की एक कमेटी सेट की गई है जो कलकत्‍ता में इलाज और टेस्टिंग प्रोटेकॉल पर विचार विमर्श कर रहे हैं। इसी तरह के मामले कलकत्‍ता में भी मिले हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि बुधवार को 6 साल का बच्‍चा जलपाईगुड़ी सदर अस्‍पताल में तेज बुखार के कारण भर्ती था, लेकिन फिर उसकी मौत हो गई। ऐसे में बच्‍चे के सैंपल को कोलकाता के स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन (एसटीएम) के लिए भेज दिया गया है। प्रभावित बच्चों में से ज्यादातर 1 से 6 साल के बीच के हैं, जिन्हें तेज बुखार, खांसी और जुकाम जैसे लक्षण दिखने पर अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। बच्‍चों में दस्‍त होने के लक्षण भी दिख रहे हैं। शुरुआत में ये बच्‍चे डेंगू, मलेरिया और कोरोना से भी संक्रमित थे, लेकिन बाद में रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। बच्‍चों के बीमार होने के पीछे रेस्पिरेटरी सिन्सिटियल वायरस (Respiratory Syncytial Virus) पर संदेह किया जा रहा है, एक्‍सपर्ट कमेटि के अनुसार इस बात की भी संभावना है कि ये बच्चे मेटान्यूमोवायरस या पैरैनफ्लुएंजा वायरस (Metapneumovirus or Parainfluenza Virus) के संपर्क में आए हों।

इंडियन एक्‍सप्रेस के अनुसार, एक सीनियर डॉक्‍टर का कहना है कि सांस संबंधी बीमारियांशुरू होने का समय अक्‍टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में होता है। लेकिन इस बार ये 2 महीने पहले शुरू हो गया है। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को ये स्थिति थोड़ी असमान्‍य लग रही है और वो इस पर एक संदेह जता रहे हैं। बता दें कि अभी तक सबसे ज्यादा मामले जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों और दिनाजपुर के कुछ हिस्सों से सामने आए हैं।

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