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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : October 11, 2018 7:35 PM IST
अर्थराइटिस के मरीजों में विटामिन डी की कमी पायी जाती है। © Shutterstock
अर्थराइटिस का दर्द बहुत सताता है और इंसान को बेबस कर देता है। वर्तमान जीवन शैली में हड्डियों की बीमारी अर्थराइटिस की संभावना बढ़ गयी है। शहरी जीवन में लोग ज्यादातर समय शीशे से बंद एयरकंडीशनिंग वाले घर या दफ्तर में रहते हैं। यह शरीर को आरामदायक तो लग सकता है लेकिन यह हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक है। यह हड्डियों को खोखला बना रहा है। शहरी जीवन में ज्यादातर लोगो धूप से वंचित रहते हैं जिसकी वजह सो शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है। एक्सपर्ट्स की माने तो ज्यादातर अर्थराइटिस के मरीजों में विटामिन डी की कमी पायी जाती है। इसका मुख्य कारण है पर्याप्त मात्रा में शरीर में धूप का न लगना।
दरअसल शहरी जीवन शैली में लोग ज्यादातर धूप से दूर रहने लगे हैं। ऑफिस या घर में धूप लगने की कोई व्यवस्था न होना तथा खेल के मैदान और पार्क में कम जाना भी इसका मुख्य कारण है। ज्यादातर लोग जिम तो करते हैं लेकिन वह भी एसी रूम में ही होता है। शरीर को जरूरी विटामिन डी सिर्फ सूर्य की रोशनी से ही मिलता है।
अर्थराइटिस की बीमारी इसलिए भी लोगों को हो रही है क्योंकि लोग सचेत नहीं रहते हैं। जब किसी के जोड़ या घुटने में दर्द होता है तो उसे कैल्शियम की कमी मानते हैं, जबकि विटामिन डी की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है। अगर समय पर विटामिन डी की जांच करा ली जाय तो अर्थराइटिस की बीमारी से बचा जा सकता है।
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बचपन में खानपान की गलत आदतों व कैल्शियम की कमी के कारण आर्थराइटिस के अलावा ऑस्टियोपोरोसिस की भी संभावना बहुत अधिक होती है। ऑस्टियोपोरोसिस में कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियों का घनत्व एवं अस्थि मज्जा बहुत कम हो जाता है। साथ ही हड्डियों की बनावट भी खराब हो जाती है, जिससे हड्डियां अत्यंत भुरभुरी और अति संवेदनशील हो जाती हैं। इस कारण हड्डियों पर हल्का दबाव पड़ने या हल्की चोट लगने पर भी वे टूट जाती हैं।
भारत में पाया जाने वाला सबसे आम अर्थराइटिस ऑस्टियो अर्थराइटिस है। देशभर में 22 से 39 प्रतिशत लोग इससे पीड़ित हैं। इसके कारण जोड़ों के लिए कुशन का काम करने वाले कार्टिलेज घिस जाते हैं। इसकी वजह से जोड़ों में सूजन और दर्द हो जाता है। ऑस्टियो अर्थराइटिस उम्र बढ़ने, मोटापा, हॉर्मोन्स के अनियंत्रित हो जाने और बैठे रहने वाली जीवनशैली के परिणामस्वरूप होता है। आमतौर पर घुटने, कूल्हे, पैर और रीढ़ इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
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रूमेटॉयड अर्थराइटिस (RA), अर्थराइटिस का एक अन्य प्रकार है। आरए एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर पर, खासतौर से जोड़ों पर हमला करना शुरू कर देती है। नजरंदाज करने पर जोड़ों में सूजन और गंभीर क्षति हो सकती है। आरए के मरीजों की त्वचा पर गांठें बन जाती हैं जिन्हें रूमेटॉयड नॉड्यूल्स कहते हैं। यह अक्सर जोड़ों जैसे पोरों, कुहनी या ऐड़ी में होता है।