अवसाद के करीब तो नहीं ले जा रहा #10YearsChallenge 

उन अवसरों से मुठभेड़ कीजिए, जहां तनाव पैदा होता है। खुद को फोकस रखिए और हालात को समझकर उन्हें संभालने की कोशिश कीजिए।

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Written By: Yogita Yadav | Published : January 21, 2019 5:11 PM IST

ये दौर सोशल मीडिया का है। यहां मिनटों में बात का बतंगड़ बनता है और कोई जीरो से हीरो भी बन जाता है। लाइक, कमेंट और शेयर की दुनिया जहां खुशी देती है, वहीं कई बार सेहत के लिए खतरा भी पैदा कर देती है। इसी सोशल मीडिया पर आए दिन नए-नए चैलेंजेस आते रहते हैं। जिसमें लोग बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लेते हैं। ऐसा ही एक चैलेंज है #10YearChallenge। इसमें लोग अपनी मौजूदा और दस वर्ष पुरानी दोनों तस्‍वीरें शेयर कर रहे हैं। पर क्‍या आप जानते हैं कि यह चैलेंज कुछ लोगों को मानसिक अवससाद की ओर ले जा रहा है।

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क्‍या है #10YearChallenge

पहले मोमो चैलेंज और कीकी चैलेंज सोशल मीडिया पर छाया रहा। लेकिन इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए इसे बंद कराना पड़ा। ठीक इसी तरह आजकल #10YearChallenge ट्रेंड में है। इसके आम लोगों से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड के सेलेब्रिटी भी हिस्सा ले रहे हैं। इस चैलेंज में एक व्यक्ति को अपनी वर्तमान फोटो के साथ 10 साल पुरानी फोटो का कोलॉज बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना है। आपको बता दें कि यह चैलेंज सिर्फ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके कई दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं।

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#10YearChallenge के नुकसान

#10YearChallenge में किसी व्यक्ति को अपनी वर्तमान फोटो के साथ 10 साल पुरानी फोटो का कोलॉज बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना है। इससे कहीं न कहीं लोगों में यह होड़ मची है कि आखिर 10 साल पहले भी उनसे सुंदर कोई नहीं था।

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लेकिन जब #10YearChallenge के तहत लोग अपनी फोटो को अपलोड कर रहे हैं और लोग उन पर नकारात्मक कमेंट कर रहे हैं तो वह उन्हें इतनी गंभीरता से ले रहे हैं कि इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इससे लोग एंग्जाइटी डिसऑर्डर, डिप्रेशन, सिर में दर्द, अनिद्रा, याददाशत कमजोर होना और फियर ऑफ मिसिंग आउट जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। यह चैलेंज घंटों तक लोगों को अपने में उलझाए रख रहा है। तरह तरह के फीचर होने के चलते बच्चे भी अपने जरूरी काम को छोड़कर इसी चैलेंज को पूरा करने में लगे हैं।

पहचानें अवसाद के लक्षण

  • सामाजिक लोगों से कटाव और अकेले रहना।
  • कामकाज में असामान्यता, विशेष रूप से स्कूल या काम की जगह पर, खेल आदि में अरूचि, स्कूल में असफल रहना आदि।
  • एकाग्रता में समस्या, याददाश्त कमजोर होना, या समझने में मुश्किल होना।
  • गंध, स्पर्श व जगहों के प्रति अधिक संवेदनशीलता व उत्तेजना।
  • किसी भी गतिविधि में भाग लेने के लिए इच्छा की कमी, या उदासीनता।
  • अपने आप से ही काट-कटा महसूस करना।
  • डर या दूसरों के प्रति शक्कीपन या हमेशा नर्वस महसूस करना।
  • अस्वाभाविक और अजीब व्यवहार।
  • नाटकीय नींद और भूख में परिवर्तन या व्यक्तिगत स्वच्छता में कमी।
  • भावनाओं या मिजाज में तेजी से या नाटकीय परिवर्तन होना।

बदलाव का डट कर कीजिए सामना

ऐसा देखा गया है कि जब कोई तनाव में होता है, तो इससे भागने के लिए वह दूसरी ऐसी चीजों में शामिल हो जाता है, जो उन्हें कुछ समय के लिए प्लेजर या खुशी देती हैं। यदि आप तनाव को पूरी तरह से दूर करना चाहते हैं, तो इसके लिए आप शारीरिक और मानसिक स्थितियों में सुधार लाइए। उन अवसरों से मुठभेड़ कीजिए, जहां तनाव पैदा होता है। खुद को फोकस रखिए और हालात को समझकर उन्‍हें संभालने की कोशिश कीजिए। तनाव में होने की वजह से आजकल युवा ड्रग्स, शराब और धूम्रपान जैसी चीजों की ओर जल्दी भाग रहे हैं। यह चीज उनके स्वास्थ्य को पूरी तरह से बिगाड़ देगा। इससे तनाव तो जाएगा नहीं बल्कि समस्या और भी बढ़ जाएगी।

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