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इन 10 अनुवांशिक/जेनेटिक बीमारियां से रहें सावधान

ये बीमारियां इंसान में गुणसूत्र के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी होने की संभावना लिये होती हैं।

इन 10 अनुवांशिक/जेनेटिक बीमारियां से रहें सावधान
10 जेनेटिक बीमारियां से रहें सावधान। © Shutterstock

Written by akhilesh dwivedi |Updated : October 1, 2018 4:59 PM IST

बीमारियों को लेकर सतर्कता सबसे ज्यादा जरूरी होती है। अगर आप पहले से सतर्क रहते हैं तो कई तरह की परेशानियों से बच जाते हैं। कुछ गंभीर बीमारियां ऐसे होती हैं जो एक बार लग जाएं तो का उम्रभर नहीं जाती हैं। कुछ ऐसी भी बीमारियां भी होती है जो मौत का कराण बन जाती हैं। यहां हम ऐसी बीमारियों के बारे में बात करगें जो परिवार या माता-पिता से लोगों में होती हैं। ऐसा नहीं है हर कोई इन बीमारियों से परेशान ही होता है अगर समय रहते सतर्कता बरती जाय तो इन बीमारियों से बचा जा सकता है। अनुवाशिंक या जेनेटिक बीमारियों के बारे में पहले से जानकारी होना बहुत जरूरी होता है। ये बीमारियां इंसान में गुणसूत्र के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी होने की संभावना लिये होती हैं। आइए 10 ऐसी बीमारियों को जानते हैं जो जेनेटिक या अनुवांशिक होती हैं।

थैलेसीमिया

थैलेसीमिया एक तरह से ब्लड की बीमारी है। इससे इंसान के शरीर में हीमोग्लोबिन के बनने की प्रक्रिया गड़बड़ हो जाती है। सामान्यतया यह बचपन में ही बच्चों को शिकार बनाती है। थैलेसीमिया रोग अगर परिवार के किसी सदस्य को हुआ हो तो जन्म के बाद बच्चों की जांच अवश्य कराते रहें।

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हीमोफीलिया

हीमोफिलिया रोग भी अनुवांशिक कारण से ज्यादा होता है। यह बीमारी भी खतरनाक होती है। इसमें शरीर में कोई चोट लगने पर इंसान का खून नहीं जमता है जिसकी वजह से किसी दुर्घटना का शिकार इंसान मर भी जाता है।

एनिमिया और सिकल सेल

एनिमिया रोग भी ब्लड की बीमारी है। यह भी परिवार या माता-पिता से बच्चों में ज्यादातर आती है। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर कमजोर होने लगता है और कोई दूसरी बीमारी लगने के बाद मौत भी हो जाती है। सिकल सेल की बीमारी भी इसी तरह के लक्षण वाली होती है।

सि‍स्टिक फाइब्रोसिस

सिस्टिक फाय्ब्रोसिसएक अनुवांशिक रोग है, जो शरीर के कई भागों को प्रभावित करता है। इनमें जिगर, पेंक्रिआज, मूत्राशय के अंग, जननांग और पसीने की ग्रंथियां शामिल हैं।

डीवीटी

डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानि डीवीटी। यह ब्लड क्लॉट होता है, जो शरीर की नसों की गहराई में बन जाता है। जब खून गाढ़ा हो जाता है, तब यह स्थिति बनती है। ज्यादातर ये समस्या जांघ पर होती है।

ये भी पढ़ेंः भारत में थैलेसीमिया के फैक्ट्स जिसे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान।

ये भी पढ़ेंः पांच झूठ जो डायबिटीज के मरीज डॉक्टर से बोलते हैं। 

मल्टीपल स्केलेरोसिस

दिमाग की तंत्रिकाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य करने वाले सेल्स के क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से यह बीमारी होती है। इसमें एंटीबॉडी मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और आंखों के नसों पर प्रभाव डालती है।

डायबिटीज

टाइप 1 और टाइप 2 - डायबिटीज मेलेटस (डीएम), जिसे सामान्यतः मधुमेह कहा जाता है, चयापचय संबंधी बीमारियों का एक समूह है जिसमें लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा का स्तर होता है। टाइप 1 और टाइप 2 इसी के प्रकार हैं।

डाउन सिंड्रोम

डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक रोग है, जो बहुत कम लोगों को होता है। इस रोग में ना सिर्फ बच्चे का शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी धीमा होता है।

रक्तवर्णकता

यानि हेमोचरोमाटोसिस, एक बीमारी है जिसमें बहुत ज्यादा लोहे आपके शरीर में जमा होता है।

पार्किंसंस रोग

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पार्किंसन रोग केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का एक रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं।

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