
... Read More
Written By: Atul Modi | Updated : May 23, 2024 5:13 PM IST
डायबिटीज एक खतरनाक रोग है। चिंता की बात ये है कि यह बीमारी अब कम उम्र के लोगों को भी होने लगी है। यह बीमारी अपने साथ कई अन्य परेशानियां भी लाती है। ऐसे में डायबिटीज को कंट्रोल करना बहुत ही जरूरी है। आयुर्वेद के साथ ही नेचुरोपैथी भी डायबिटीज को कंट्रोल करने में बहुत कारगर साबित हो सकती है। खास बात ये है कि नेचुरोपैथी का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इसके कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हैं।
नेचुरोपैथी के अनुसार डायबिटीज का मुख्य कारण शरीर की अशुद्धियां हैं। यह उपचार प्राकृतिक तरीकों से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। नेचुरोपैथी में भी बीमारियों और समस्याओं के अनुसार कई प्रकार की थेरेपी होती हैं। हाइड्रोथेरेपी इसका अहम हिस्सा है। इसे जल चिकित्सा भी कहा जाता है। इसकी मदद से दर्द, जकड़न, ऐंठन, सूजन आदि से राहत मिलती है। इस थेरेपी से ऑस्टियो आर्थराइटिस, न्यूरो थेरेपी, सेरेब्रल पाल्सी, पार्किंसंस, मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। नेचुरोपैथी में मड थेरेपी, मड बाथ, मालिश, योग आदि को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
संतुलित आहार नेचुरोपैथी का एक अभिन्न हिस्सा है। इस चिकित्सा पद्धति के अनुसार कम भोजन और व्यायाम करके आप सेहतमंद रह सकते हैं। ऐसे में नेचुरोपैथी कुछ खाद्य पदार्थों को अपने आहर में शामिल की सलाह देती है।
हल्दी एक बहुत ही हेल्दी मसाला और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को कम करते हैं। नियमित रूप से हल्दी की चाय पीने से वजन तेजी से कम होता है और डायबिटीज भी कंट्रोल में रहती है।
दालचीनी को आयुर्वेदिक चिकित्सा में बहुत ही महत्वपूर्ण जगह दी जाती है। नेचुरोपैथी में भी इसे महत्वपूर्ण माना गया है। इसकी मदद से डायबिटीज को दोगुनी तेजी से कंट्रोल किया जा सकता है। इससे मीठा खाने की इच्छा कम होती हैै।
नेचुरोपैथी में अदरक को अहम माना गया है। यह शरीर में इंसुलिन रिलीज को नियंत्रित करता है। साथ ही ग्लूकोज क्लीयरेंस को बढ़ावा देता है। ऐसे में ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहती है। यह मेटाबॉलिज्म को हेल्दी रखता है और वजन कम करने में मददगार होता है। अपने इन्हीं गुणों के कारण यह डायबिटीज को तेजी से कंट्रोल करता है।
मेथी के कड़वे बीज आपके मेटाबॉलिज्म को सुधारते हैं। ऐसे में यह डायबिटीज को भी कंट्रोल करते हैं। इन बीजों के नियमित सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है, क्योंकि यह ग्लूकोज सेंसिटिविटी को बढ़ाते हैं। अपने हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव के कारण भी ये ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने नहीं देते।
बैलेंस डाइट और एक्सरसाइज के साथ ही नेचुरोपैथी में फास्टिंग यानी उपवास को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसमें शरीर को अंदर से साफ रखने पर जोर दिया जाता है। ये उपवास भी कई प्रकार के होते हैं, जिनमें पूर्ण या शुष्क उपवास, पानी पर उपवास, फलों के साथ उपवास आदि शामिल हैं।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.