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नेचुरोपैथी (Naturopathy)

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प्राकृतिक चिकित्सा को नेचुरोपैथी और नेचुरोपैथिक मेडिसिन के नाम से भी जाना जाता है। यह भी एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है, जो पारंपरिक प्रथाओं की स्वास्थ्य देखभाल करने की अलग-अलग विधियों से विकसित हुई है। समय के साथ-साथ नेचुरोपैथिक चिकित्सा में भी काफी बदलाव होते आए हैं और आज भी दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

वैसे तो नेचुरोपैथी में कई अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जाता है, हालांकि इसमें मुख्य रूप से समग्र स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। जिसमें आमतौर पर शरीर को सभी प्रकार के रोगों से मुक्त रखकर एक स्वस्थ जीवन प्रदान किया जाता है।

आजकल कई देशों में प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली प्रचलित हो चुकी है, जिनमें नेचुरोपैथी मेडिसिन के अनुभवी चिकित्सकों को नेचुरोपैथिक फीजिशियन और ट्रेडिश्नल नेचुरोपैथ कहा जाता है। ये चिकित्सक अन्य मरीज का प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली के अनुसार ही इलाज करते हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास

शब्द “नेचुरोपैथी” को 1895 में जॉन स्कील नामक एक व्यक्ति द्वारा अंकित किया गया और इसे बाद में अमेरिका के बेनेडिक्ट लस्ट नामक व्यक्ति द्वारा खरीदा गया। बेनेडिक्ट लस्ट को अमेरिका में नेचुरोपैथी मेडिसिन का पिता भी माना जाता है। नेचुरोपैथी लेटिन भाषा के “Natura” (नेचुरा) और यूनानी भाषा के शब्द “Pathos” (पैथो) से निकला है। इसमें नेचुरा शब्द का मतलब प्रकृति और पैथो का मतलब पीड़ा या दर्द होता है। इस प्रकार इन दोनों शब्दों को मिलाकर नेचुरोपैथी शब्द बनाया गया, जिसका मतलब प्राकृतिक उपचार होता है। प्राचीन यूनान में प्राकृतिक चिकित्सकों को “चिकित्सा के जनक” कहा जाता है। नेचुरोपैथी की जड़ें 19वीं सदी के यूरोप में भी देखी गई हैं। 18वीं सदी में भी कई देशों में प्राकृतिक आहार व एक्सरसाइज अपनाकर और तंबाकू आदि से परहेज करके प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दिया था।

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत

सिद्ध और आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों की तरह नेचुरोपैथी के भी अपने सिद्धांत व नियम हैं, जिनके अनुसार यह काम करती है। प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली के अनुसार कुछ मुख्य सिद्धांत हैं, जो किसी भी रोग का इलाज करने या शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। नेचुरोपैथी के कुछ प्रमुख सिद्धांत इस प्रकार हैं -

  1. कोई क्षति नहीं - अन्य सभी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों की तरह नेचुरोपैथी में भी उन दवाओं व थेरेपियों की महत्व दिया जाता है, जो शरीर को नुकसान न दें। प्राकृतिक चिकित्सा में भी विशेष रूप से ऐसी औषधियां होती हैं, जो शरीर के लिए कम से कम विषाक्त हों और ऐसे व्यायाम शामिल हैं जिनमें शरीर पर कम प्रभाव पड़ता हो।
  2. प्रकृति की उपचार शक्ति - नेचुरोपैथी के अनुसार किसी भी रोग या शारीरिक समस्या को ठीक करने के लिए प्रकृति की मदद जरूरी होती है। नेचुरोपैथी में न सिर्फ प्रकृति से प्राप्त पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है, इसके साथ-साथ यह एक विशेष प्राकृतिक वातावरण बनाती है जो मानव स्वास्थ्य ठीक करने में मदद करता है। नेचुरोपैथिक डॉक्टर शरीर की अंदरुनी तासीर को पहचानते हैं, जिससे उन्हें समग्र स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का पता लगाने में मार्गदर्शन मिलता है।
  3. कारण की पहचान व उपचार - नेचुरोपैथिक मेडिसिन में किसी भी रोग व स्वास्थ्य समस्या का इलाज करने के लिए उसके कारण का पता लगाया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा में रोग का इलाज करने और उसके लक्षणों को दूर करने की प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं। हालांकि, कई बार समस्याओं का इलाज करने के लिए लक्षणों और अंदरूनी कारणों को दूर करना जरूरी हो जाता है।
  4. चिकित्सा व शिक्षा - एक नेचुरोपैथिक डॉक्टर न सिर्फ मरीज के रोगों का इलाज करता है, बल्कि उसे स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान प्रदान भी करता है। स्वास्थ्य से संबंधित ज्ञान प्राप्त होने पर व्यक्ति को स्वस्थ रहने के तरीकों को अच्छे से समझने में मदद मिलती है। प्राकृतिक चिकित्सा में दी गई शिक्षा मरीज व चिकित्सक के बीच विश्वास बढ़ता है और ताकि स्वस्थ रहने के नियमों का पालन करने में मदद मिलती है।
  5. रोग नहीं रोगी का उपचार - जिस प्रकार एलोपैथिक चिकित्सा में रोग को दूर करने के लिए दवाएं दी जाती हैं, जबकि नेचुरोपैथी में उपचार प्रक्रिया थोड़ी अलग है। नेचुरोपैथिक डॉक्टर मरीज के शरीर, वातावरण और उसकी जीवनशैली के परस्पर संबंध का पता लगाता है।
  6. निवारण - कई प्राचीन उपचार पद्धतियों की तरह नेचुरोपैथी में भी रोगों के इलाज से पहले उनके निवारण को अधिक महत्व दिया जाता है। नेचुरोपैथी में सभी सिद्धांतों व नियमों की मदद से शरीर के संभावित असंतुलित हिस्सों की जांच की जाती है। नेचुरोपैथी के अनुसार निवारण यानि रोकथाम सबसे मुख्य नियम है, जो रोगों से बचने में हर व्यक्ति की मदद करता है।

नेचुरोपैथी के फायदे

प्राकृतिक उपचार से होने वाले लाभों में मुख्य रूप से निम्न को शामिल किया जा सकता है -

  1. मानसिक लाभ - प्राकृतिक चिकित्सा एक ऐसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो मरीज को न सिर्फ रोगों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करता है इसके साथ ही सकारात्मक भावनाओं को उत्तेजित करता है। सकारात्मक भावनाएं तनाव, चिंता और अवसाद जैसी स्थितियों को कम करने में मदद करती है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करती है।
  2. व्यक्तिगत रूप से उपचार - नेचुरोपैथी व्यक्तिगत रूप से काम करता है, जिसे इस उपचार प्रणाली का एक प्रमुख फीचर माना जा सकता है। इसका मतलब यह है कि एक ही रोग के लिए हर व्यक्ति के अनुसार उसका इलाज भी अलग-अलग तरीके से हो सकता है। इसमें हर व्यक्ति के रोग का इलाज करते समय चिकित्सक उसके रोग, स्वास्थ्य और अन्य शारीरिक जरूरतों को समझने में पूरा समय देते हैं।
  3. रोग व रोगी दोनों का इलाज - मॉडर्न मेडिसिन की तरह इसमें सिर्फ रोग का ही इलाज नहीं किया जाता है। नेचुरोपैथी में रोगों का इलाज करने के साथ-साथ मरीज की स्वास्थ्य स्थिति में भी सुधार किया जाता है। कई प्राचीन इलाज प्रणालियों की तरह नेचुरोपैथी में भी रोग के साथ-साथ रोगी का इलाज करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। रोग व रोगी के सभी पहलुओं पर विचार करके ही नेचुरोपैथी में इलाज तैयार किया जाता है।
  4. एलोपैथिक दवाओं के साथ लाभदायक - कई प्राचीन चिकित्सिया पद्धतियां ऐसी हैं, जिन्हें एलोपैथिक या अन्य किसी चिकित्सा प्रणाली के साथ नहीं लिया जा सकता है। इतना ही नहीं ऐसा करने पर मरीज का स्वास्थ्य उल्टा बिगड़ जाता है और साइड इफेक्ट के रूप में कई बीमारियां भी पैदा हो जाती हैं। ठीक इसके विपरीत नेचुरोपैथी की कई दवाएं एलोपैथिक दवाओं के साथ मिलकर और भी प्रभावी रूप से काम करती हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी रोग से लड़ने के लिए एलोपैथिक दवाएं ली जा रही हैं, तो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए नेचुरोपैथिक दवाएं दी जा सकती हैं।
  5. सस्ता विकल्प - जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, इसमें अधिकतर इलाज प्राकृतिक तरीके से किए जाते हैं जिनमें मुख्य रूप से आहार में जरूरी बदलाव, जीवनशैली में सुधार, परहेज और व्यायाम आदि शामिल हैं। प्राकृतिक होने के कारण ये दवाएं अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से सस्ती होती है। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है, क्योंकि मॉडर्न मेडिसिन को तैयार करने की लागत अधिक होती है और प्राकृतिक दवाओं की लागत कम होती है।

नेचुरोपैथिक इलाज

नेचुरोपैथी में रोगों का इलाज नेचुरोपैथिक डॉक्टर द्वारा ही किया जाता है। इस चिकित्सा प्रणाली में व्यक्ति के स्वास्थ्य व अन्य शारीरिक जरूरतों के अनुसार उपचार प्लान तैयार किया जाता है। जिसका मतलब यह है कि एक ही सिद्धांत पर काम करते हुए और एक ही रोग के लिए अलग-अलग व्यक्तियों में इलाज भी भिन्न हो सकते हैं। अधिकतर रोगों में नेचुरोपैथिक इलाज सिर्फ आहार व पोषक तत्वों पर ही आधारित होता है। नेचुरोपैथिक डॉक्टर व्यक्ति के रोगों और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार डाईट प्लान में बदलाव करते हैं, ताकि शरीर को वे सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल सकें जिनकी उसे जरूरत है। इसमें परहेज का भी काफी महत्व है, जिस दौरान उन सभी खाद्य पदार्थों के सेवन को बंद किया जाता है जो स्थिति को बदतर बनाते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा में इलाज के दौरान दिए जा रहे डाइट प्लान में आमतौर पर फल, सब्जियां, कम वसा वाले मांस और साबुत अनाज आदि को शामिल किया जाता है। इसके अलावा शरीर में पौषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाने के लिए आपको मौसमी और स्थानीय विशेष फल, सब्जियां व अन्य खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी जा सकती है। इतना ही नहीं नेचुरोपैथिक चिकित्सा के कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भोजन को पकाने की बजाय कच्चा खाने से उससे अधिक मात्रा में पोषक तत्व मिल सकते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली के विशेषज्ञ आमतौर पर इलाज में निम्न को शामिल करते हैं -

  • आहार व पोषक संबंधी खाद्य पदार्थ
  • व्यायाम व जीवनशैली में सुधार
  • होम्योपैथी दवाएं
  • हाइड्रोपैथी दवाएं (पानी पर आधारित इलाज प्रक्रियाएं)
  • मैनिपुलेटिव थेरेपी (संतुलन बनाने के लिए शरीर के किसी अन्य हिस्से पर दबाव डालना)
  • हर्बल पर आधारित सप्लीमेंट्स देना
  • शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालना
  • साइकोथेरेपी
कुछ अध्ययनों के अनुसार डायबिटीज टाइप 2 के लक्षणों को कंट्रोल रखने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली काफी प्रभावी रूप से काम करती है। हालांकि, यदि आप कोई अन्य दवाएं साथ खा रहे हैं तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। दुनिया के कुछ हिस्सों में नेचुरोपैथिक चिकित्सा के लिए लाइसेंस की आवश्यकता पड़ने लगी है। उदाहरण के लिए एक लाइसेंस धारक चिकित्सक ही मरीज के लिए दवाएं लिख सकता है और टीकाकरण आदि कर सकता है।

नेचुरोपैथी के जोखिम

प्राकृतिक चिकित्सा को एक सुरक्षित चिकित्सा प्रणाली समझा गया है, क्योंकि इसमें अधिकतर स्वास्थ्यप्रद भोजन और उचित व्यायाम से इलाज किया जाता है। हालांकि, फिर भी एक लाइसेंस धारक नेचुरोपैथिक डॉक्टर द्वारा दिया गया उपचार सुरक्षित नहीं माना जाता है और उसकी सुरक्षा की कोई गारंटी भी नहीं है। प्राकृतिक चिकित्सा पर अबतक कम ही अध्ययन किए गए हैं और उनमेें भी वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी देखी गई है। 2013 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक प्रकाशन जारी किया, जिसमें नेचुरोपैथी को पारंपरिक चिकित्साओं की श्रेणी में रखा। पारंपरिक चिकित्सा की श्रेणी में उन पद्धतियों को रखा जाता है, जिनको हानि रहित प्रमाणित करने के लिए कई टेस्टों की आवश्यकता पड़ती है। नेचुरोपैथी में कई बार अनावश्यक रूप से ग्लूटेन-फ्री आहार देना शुरू कर दिया जाता है, जिस कारण से कई बार शरीर को अन्य नुकसान होने लगते हैं। उदाहरण के रूप में यदि व्यक्ति सही ढंग से आहार परिवर्तन नहीं करता है, तो उसके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है और व्यक्ति बीमार पड़ सकता है।

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