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Written By: Anshumala | Published : August 25, 2019 9:16 AM IST
आयुर्वेदिक पेड़-पौधे जो स्वस्थ रखे आपको। © Shutterstock
भारतीय चिकित्सा शास्त्र की प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति पेड़- पौधों पर ही आधारित है। इन दिनों एलोपैथिक चिकित्सा से निराश होकर लोग वापस अपनी जड़ों की ओर लौटने लगे हैं, यही वजह है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति (Ayurvedic Plants Benefits) फिर से लोगों को आकर्षित कर रही है। एलोपैथिक चिकित्सा की तरह न तो इसके साइड इफेक्ट्स भी नहीं होते हैं (जब तक कि सही खुराक और सही तरीके से लें)। आज अमूमन लोग अनेक रोगों के उपचार के लिए विभिन्न जड़ी- बूटियों के तौर पर तुलसी, हल्दी, हींग, जीरा, अदरक, लहसुन का प्रयोग कर रहे हैं , लेकिन इनके अतिरिक्त भी कुछ ऐसे पेड़- पौधे हैं, जिनके औषधीय गुणों के बारे में कम लोगों को ही (Ayurvedic Plants Benefits) जानकारी है।
आयुर्वेद के अनुसार, बरगद कफ-पित्त शामक औषधि माना गया है (Ayurvedic Plants Benefits)। इसका रस कसैला और ठंडा होता है। यह ल्यूकोरिया और माहवारी में अधिक खून आने के इलाज में उपयोगी है। चर्मरोगों और जख्म को भरने के लिए भी इसकी जटा का लेप काम में लिया जाता है। गोनोरिया में इसकी छाल का क्वाथ लेते हैं। फर्टिलाइजेशन के लिए इसकी वट का प्रयोग किया जाता है।
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पीपल को अश्वत्थ नाम से भी जानते हैं। यह कफ-पित्त शामक माना जाता है। वात रक्त आदि रक्त विकारों इसकी छाल का क्वाथ शहद मिलाकर दिया जाता है। इसके फल का चूर्ण सांस संबंधी रोग में लाभप्रद है। इसकी छाल का क्वाथ या स्वरस खांसी के लिए उपयोगी रहता है। पाचन के रोग जैसे उल्टी और दस्त में इसकी छाल काम में ली जाती है।
नीम का रस आयुर्वेदानुसार तीखा और कसैला होने के साथ ही ठंडा होता है। पाचन संबंधी विकारों, बुखार और कफ की बीमारी में भी यह लाभदायक है। यह मूत्र विकारों और मधुमेह में उपयोगी है। अर्श एवं विबन्ध में इसके बीज का प्रयोग किया जाता है। तीखा रस होने के कारण यह रक्त को शुद्ध करता है तथा खून संबंधी बीमारियों के इलाज में फायदेमंद साबित हुआ है।
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आंवला आयुर्वेद में रसायन औषधि माना जाता है। यह त्रिदोष हर है विशेषतः पित्त शामक है। विटामिन-सी का यह सर्वोत्तम स्त्रोत है। यह आंख की बीमारियों बालों का झड़ना और सफेद होना, मस्तिष्क दौर्बल्य में उपयोगी रहता है। यह भूख की कमी, कब्ज, अम्लपित्त, चर्म रोग गोनोरिया, वीर्य सम्बन्धित विकार और गर्भाशय दौर्बल्य में उपयोगी माना जाता है।
तुलसी गर्म और कफ-वात शामक मानी जाती है। इसके इसके पत्तोें का रस कान के दर्द में लाभदायक है। यह खांसी, श्वास रोग और टीबी के लिए बहुत उपयोगी है। फ्लू और जुकाम में विशेष रूप से लाभकर है। शुक्रमेह (वीर्य का अपने आप निकल जाना) में इसके बीजों का प्रयोग किया जाता है।
आयुर्वेदिक पेड़-पौधे जो स्वस्थ रखे आपको। © Shutterstock
सतावरी को मुख्यत: महिलाओं की औषधि माना गया है। यह उनकी प्रजनन प्रणाली को दुरुस्त करने के लिहाज से बेहतरीन औषधि है। प्राचीन काल से ही इंफर्टिलिटी के रोगों में सतावरी का इस्तेमाल खूब किया जाता रहा है। इसके अलावा, यदि कोई महिला अपने नवजात का पेट स्तन पान के जरिए भर पाने में अक्षम है तो भी सतावरी की जड़ों का पाउडर बनाकर एक छोटा चम्मच सुबह और शाम भरम दूध या पानी के साथ लेने से लाभ पहुंचता है। हार्मोन में बदलाव और लिकोरिया के रोग में भी सतावरी फायदेमंद है।
अश्वगंधा को इंडियन जीनसेंग भी कहा जाता है, जो शरीर में सुदढ़ता और मजबूती का परिचायक है। यह नर्वस सिस्टम के लिए बढि़या है। डिप्रेशन का रोग हो या याददाश्त की समस्या, यह बेहतरीन औषधि के तौर पर काम करता है। इसे मेल टॉनिक भी कहा जाता है क्योंकि यह पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या को दुरुस्त करता है। यदि पुरुषों में स्पर्म काउंट कम हो तो इसका सेवन करने से लाभ पहुंचता है।
ब्राह्मी को ब्रेन टॉनिक कहा जाता है, जो याद्दाश्त को बेहतर करता है। इसके अलावा, डिप्रेशन को दूर करने, तनाव को कम करने में भी इसके गुणों का जवाब नहीं। यदि किसी को अनिद्रा है तो इसके सेवन से कारगर लाभ मिलता है।
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अर्जुन का पेड़ दिल की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। दिल के रोगों में इसकी औषधीय क्षमता के बारे में कुछ भी कहना कम ही होगा। उच्च रक्तचाप हो या कोलेस्ट्रॉल की समस्या, अर्जुन का सेवन इसे दुरुस्त करता है।
इस खूबसूरत पेड़ के औषधीय गुणों के बारे में कम लोगों को ही जानकारी होगी। इसका प्रयोग महिलाओं की महावारी की समस्याओं में किया जाता है। माहवारी के दौरान होने वाले दर्द में इसके सेवन से दर्द दूर हो जाता है। पेट के रोगों के साथ ही पाइल्स की समस्या भी इससे ठीक हो जाती है।
कब्ज के रोग में अमलतास की फली का काढ़ा रामबाण की तरह काम करता है। यदि किसी व्यक्ति का पाचन तंत्र ठीक नहीं है, या आंतों में सूजन है तो उसके लिए भी यह अच्छा है। यदि गले में म्यूकस जमा है तो फली को उबालकर इसका काढ़ा बनाकर इससे गरारे करने से आराम मिलता है। त्वचा संबंधी समस्याओं, जैसे खारिश, खुजली हो जाए तो इसके पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाने से समस्या दूर हो जाती है। यह हमारी इम्यूनिटी को भी बूस्ट करता है।
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