गर्भपात से बचने की 5 आयुर्वेद एक्सपर्ट टिप्स

एक खुशहाल, सफल और स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए का आ सकते हैं ये आयुर्वेदिक सुझाव।

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Published : May 8, 2017 2:52 PM IST

किसी भी गर्भवती महिला के लिए अपने आनेवाले बच्चे का विचार उसे उत्साहित करता है, जिसे लगता है कि वह अपने बच्चे का चेहरा देखकर प्रेगनेंसी के समय होनेवाली सारी परेशानियां भूल जाएगी। लेकिन दुर्भाग्य से बहुत सी महिलाओं के लिए यह एक अधूरा सपना साबित होता क्योंकि, उनका गर्भपात या मिसकैरिज हो जाता है। अपने गर्भ के बच्चे को खोने की यह पीड़ादायक घटना किसी भी गर्भवति मां के लिए तकलीफभरी होती है जो कई बार जानलेवा भी बन सकती है। इसी तरह कुछ महिलाओं को बहुत दिनों तक गर्भधारण न हो पाने जैसी स्थिति से भी गुज़रना पड़ता है। हालांकि गर्भपात का यह मतलब बिल्कुल नहीं कि आप बच्चे के लिए कोशिश न करें। डॉ. संगीता जाधव, जो एक आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर हैं उन्होंने बताया कि आखिर महिलाएं कहां ग़लती कर बैठती हैं या गर्भपात के खतरे को कम करने के लिए वे क्या कर सकती हैं।

डिटॉक्टिफिकेशन के साथ गर्भाधान के लिए तैयार- डॉक्टर संगीता जाधव के अनुसार, “आजकल के शादीशुदा जोड़ों के साथ प्रॉब्लम यह है कि वे लेबॉरेटरीज़ में हुए टेस्ट और उसके रिज़ल्ट्स पर ज़्यादा भरोसा करते हैं। उनका प्रेगनेंसी के प्रति कोई समग्र विचार नहीं है,” डॉक्टर संगीता के अनुसार ऐसे कपल्स को किसी अच्छे आयुर्वेदिक फ़िज़िशियन से अपने शरीर की प्रकृति और दोष के बारे में जांच करानी चाहिए।” बच्चे के गर्भ में आने से पहले, पति और पत्नि को पूर्ण ‘संशोधन’ या डिटॉक्टिफिकेशन कराना चाहिए।” बच्चे के लिए कोशिश करने से पहले टिश्यूज़ में जमा विषैले तत्वों को पंचकर्म की मदद से साफ कराना चाहिए। यह गर्भधारण और प्रेगनेंसी की एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। गर्भवती महिलाओं के लिए विटामिन डी क्‍यों ज़रूरी है?

सात्विक बनें- संतुलित, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन के अलावा, गर्भवती महिलाओं को एक सफल प्रगनेंसी के लिए सात्विक आहार अपनाना चाहिए। हालांकि आप इसकी शुरुआत करें उससे पहले आपको बता दें कि सात्विक का अर्थ केवल वेजिटेरियन या संकुचित डायट नहीं है। सात्विक भोजन हेल्दी, पसंद आनेवाला, सौम्य और पेट के लिए पचाने में आसान होना चाहिए, ना कि राजसिक भोजन जैसा मसालेदार-तेलवाला या तामसिक भोजन जैसा पुराना। इसके साथ ही समय पर भोजन करना भी आवश्यक है। डॉ.जाधव ने सचेत करते हुए बताया कि महिलाओं को ‘दो लोगों के लिए खाने’ के बारे में नहीं सोचना चाहिए। वे कहती हैं कि,“कम मात्रा में खाएं, लेकिन समय पर खाएं।”

आराम से रहें- काम से जुड़ी हुई चिंता घर लाने से आपकी प्रेगनेंसी से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाएंगी और आपके हार्मोन्स असंतुलित हो सकते हैं। डॉ.जाधव ने बताया, “महिलाएं अपने शरीर के सर्कैडियन रिदम(circadian rhythm) को देर तक काम करके या नाइटशिफ्ट करके बिगाड़ लेती हैं। खासकर जिनके पति उनका सहयोग नहीं करते, उनके लिए तनाव दो तरफा होता है। सोचिए एक प्रेगनेंट महिला घर के कामों के साथ ऑफिस का काम पूरा करने की चिंता एक साथ करे तो क्या हो?” इसीलिए अपना मूड अच्छा बनाए रखना आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ होनी चाहिए, खासकर पित्त प्रकृति वाली महिलाओं को जिन्हें जल्दी गुस्सा आता है। अच्छी नींद लें और प्राणायम-ध्यान की मदद से अपना मूड अच्छा बनाएं।

संकेतों पर ध्यान दें- गर्भवती महिलाओं को अपने रोज दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। “मां बननेवाली महिला सुबह सोकर उठने के बाद कितना तरोताज़ा महसूस करती है इस आधार पर उसकी सेहत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है” डॉ. जाधव ने बताया। इसके साथ ही, उसे अपने बोवेल मूवमेंट पर भी ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर के अनुसार, इन दोनों चीज़ों में से किसी की भी अनियमितता को उचित पंचकर्म की नियमितता के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

कसरत करना ना छोड़े- डॉक्टर कुछ हल्की एक्सरसाइज़ करते रहने की सलाह देती हैं। जिन्होंने कहा कि,“ रोज़ 45-मिनट एक्सरसाइज़ करें और 5-10 मिनट योगाभ्यास करें।” वॉकिंग जैसी हल्की कॉर्डियो एक्सरसाइज के साथ योग करने से बहुत अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। साथ ही पवनमुक्तासन, वज्रासन और पर्वतासन जैसे सरल योगासनों का अभ्यास करने से गर्भवति महिलाओं का शरीर एक सामान्य प्रसव या तकलीफरहित डिलिवरी के लिए तैयार हो सकेगा। आपको फिट रखने के अलावा, योग दिमाग को शांत रखने और प्रसव से जुड़ी सभी चिंताओं और डर का सामना करने के लिए भी मां को तैयार करता है जो गर्भावस्था के दौरान वह महसूस कर सकती है।

Read This in English.

अनुवादक-Sadhana Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock.