पेरेंट्स को ना कहें 'आप ये भी भूल गए', एक उम्र के डिमेंशिया के लक्षण दिखना है आम, जानें कैसे करें मैनेज
क्या आपके माता-पिता भी छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं? अगर हां, तो यह डिमेंशिया का संकेत हो सकता है। लेकिन साथ ही आपके बार-बार उन्हें टोने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और वह अपना आत्मविश्वास खो सकते हैं। आइए जानें चीजों को कैसे मैनेज करें।
Written by Vidya Sharma|Published : November 22, 2025 10:30 AM IST
Parents Ki Bhulne Ki Bimari Ko Kaise Control Kare: हम अपने माता-पिता को हमेशा मजबूत, हर बात याद रखने वाले और जिंदगी के हर मोड़ पर हमारा साथ निभाने वाले इंसानों की तरह देखते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ दिमाग भी बदलता है। मालिनी सबा जो की एक साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक हैं, बताती हैं कि 60–65 की उम्र के बाद याददाश्त का कम होना एक सामान्य प्रक्रिया है। जैसे बातें भूल जाना, चीजें कहीं रखकर भूल जाना या नाम तुरंत याद न आना।
यह हमेशा बीमारी नहीं होती, बल्कि एजिंग का हिस्सा होता है। सबसे बड़ी चिंता यह नहीं कि हमारे पेरेंट्स भूल रहे हैं, बल्कि यह कि हम अनजाने में उन्हें कह देते हैं कि 'आप ये भी भूल गए?' या 'आपको आजकल कुछ याद नहीं रहता है।' आदि। यह एक साधारण वाक्य लग सकता है, लेकिन जैसा कि मालिनी सबा समझाती हैं, यह उनके आत्मसम्मान और भावनात्मक सुरक्षा को गहरी चोट पहुंचा सकता है।
क्यों होती है उम्र में भूलने की समस्या?
दिमाग का धीमा होना- उम्र के साथ दिमाग की प्रोसेसिंग स्पीड कम हो जाती है। नई बातें याद रखना मुश्किल होने लगता है।
तनाव और अकेलापन- बच्चे अपनी ज़िंदगी में व्यस्त हो जाते हैं। अकेलापन दिमाग को और धीमा कर देता है।
शुगर, बीपी, थायराइड जैसी स्थितियां- इनका सीधा असर याददाश्त पर पड़ता है।
हल्के डेमेंशिया के शुरुआती संकेत- यह हमेशा गंभीर रूप नहीं होता, लेकिन नज़र रखना जरूरी है।
जैसा कि मानवाधिकारों की समर्थक मालिनी सबा कहती हैं, 'हर भूलने को बीमारी न समझें। कभी-कभी यह सिर्फ उम्र का स्वाभाविक बदलाव होता है।'
सामान्य भूलना और डेमेंशिया - दोनों अलग हैं। सामान्य भूलने में व्यक्ति नई बात भूल सकता है, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता बनी रहती है। लेकिन अगर भ्रम, बार-बार रास्ता भूलना, शब्द ढूंढने में कठिनाई, या व्यवहार में बदलाव दिखे - तब डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
बिना हर्ट किए पेरेंट्स को कैसे सपोर्ट करें?
बात करने का तरीका बदलें- जैसे 'आप ये भी भूल गए?' कहने की बजया कहें कि 'कोई बात नहीं, मैं फिर से बता देता/दे देती हूं' या 'चलो, साथ में याद कर लेते हैं।' मालिनी सबा बताती हैं कि सम्मानजनक भाषा रिश्ते को सुरक्षित बनाती है।
चीजें आसान बनाएं-घर में रिमाइंडर बोर्ड लगाएं, दवाइयों के बॉक्स पर दिन लिखें, अलमारी पर लेबल लगाएं जैसे कपड़े, दवाइयां, जरूरी कागजात आदि। यह उनकी स्वतंत्रता और आत्मविश्वास बनाए रखता है।
रूटीन स्थिर रखें
सुबह की चाय
हल्की वॉक
दवा
समय पर भोजन
शाम की गतिविधियां
नियमितता दिमाग को आराम और स्थिरता देती है।
दिमाग को एक्टिव रखें
क्रॉसवर्ड
हल्की पढ़ाई
पसंदीदा गाने
टीवी शो
रोज की छोटी बातचीत
ये दिमाग को सक्रिय रखने में मदद करते हैं।
भावनाएं समझें
जब माता-पिता भूलने लगते हैं, उन्हें खुद भी शर्म या डर लगता है। हमारा गुस्सा उन्हें और असुरक्षित महसूस करवाता है।
एक साधारण 'कोई बात नहीं' उनके दिल में सुरक्षा का एहसास जगाता है, जैसा कि मालिनी सबा भी जोर देती हैं।
मेडिकल चेकअप जरूरी
विटामिन B12
थायराइड
शुगर
इनमें कमी होने पर भी याददाश्त प्रभावित होती है। सही इलाज जरूरी है।
उनकी गरिमा सबसे महत्वपूर्ण है
हमारे माता-पिता ने हमारी हर भूल संभाली है। अब हमारी बारी है कि हम उन्हें सम्मान, धैर्य और प्यार दें। आखिर में बात सिर्फ याददाश्त की नहीं, रिश्ते की है। थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझ और थोड़ा प्यार… यही बढ़ती उम्र की भूलने की समस्याका सबसे बड़ा सहारा है।
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Highlights
माता-पिता अगर चीजें भूल रहे हैं तो उन पर चिल्लाएं नहीं।
आप अपने पेरेंट्स को टोकने की बजाय चीजें याद रखने में मदद करें।
गुस्सा करने की बजाय 'कोई बात नहीं' बोलें, जिससे उन्हें सुरक्षित फील होगा।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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