Noida Protest: साइकोलॉजिस्ट से जानें लोगों के दिमाग में ऐसा क्या आता है कि वह इतने हिंसक हो जाते हैं?

Noida Mai Pradarshan Or Hinsa Kyu Ho Rhi Hai: नोएडा सेक्टर 60 से शुरू हुआ प्रदर्शन हिंसा का रूप ले चुका है और नोएडा सेक्टर 62 तक भी पहुंच गया है। लेकिन लोगों के मन में इतनी हिंसा आती कहां से है? आइए साइकोलॉजिस्ट से जानते हैं।

WrittenBy

Written By: Vidya Sharma | Updated : April 13, 2026 5:43 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr. Malini Saba

Noida Protest Reason And Why People Are Choosing Violence: नोएडा में शनिवार से एक निजी कंपनी के कर्मचारी प्रदर्शन पर हैं। इस विरोध प्रदर्शन में आज सुबह (13 अप्रैल 2026) बहुत ही ज्यादा तोड़-फोड़ कई गई और कई गाड़ियों पर आग भी लगाई गई। यह घटना नोएडा के फेज-2 और सेक्टर 60 के इलाके की है, जहां फैक्ट्री श्रमिक अपने वेतन बढ़ोतरी के लिए प्रदर्शन पर बैठे हैं। मांग पूरी न होने की वजह से उन्होंने पथराव किया और कई गाड़ियों पर आग भी लगा दी। नोएडा पुलिस की गाड़ियों को भी तोड़ा गया। इस घटना के चलते दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर जाम लगने से लोग फंस गए।

लेकिन आखिरकार लोगों में इतनी हिंसा आ कहां से रही है? लोगों के दिमाग में ऐसा क्या आता है कि वह शांति से प्रदर्शन कर रहे होते हैं, लेकिन अचानक ही प्रदर्शन दंगे का रूप ले लेता है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े, रोड रेज, पड़ोसियों के बीच विवाद और यहां तक कि मामूली कहासुनी का हिंसक रूप ले लेना अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। आइए साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा से जानते हैं कि लोगों के मन में हिंसा पैदा कर होती है।

लोगों में भरी होती है फ्रेस्टेशन और स्ट्रेस

नोएडा प्रदर्शन का कारण नोएडा प्रदर्शन का कारण

आजकल जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, अगर उसी दर से कर्मचारियों और मजदूरों का वेतन भी बढ़े तो शायद कोई प्रदर्शन पर न बैठे। दरअसल आर्थिक तंगी, रोजगार की कमी और नौकरी को लेकर असुरक्षा और घर की जिम्मेदारियों के चलते लोगों में तनाव बढ़ता है। जब यह स्ट्रेस बाहर नहीं आ पाता तो अंदर ही अंदर फ्रस्टेशन का रूप ले लेता है। और जैसे ही फ्रस्टेशन से इंसान फूटता है जो उसका आक्रामक व्यवहार बाहर आता है और फिर हिंसा का रूप ले लेता है। फिर मारपीट और गाड़ियों पर आग लगने जैसी खबरें आती हैं।

मोब मेंटलिटी और उकसावा

दो बाते हैं, पहली तो यह कि भीड़ में रहकर व्यक्ति अपनी पहचान खो देता है और मोब का हिस्सा बन जाता है। फिर वह भी भीड़ की तरह व्यवहार करता है और हिंसा करने लगता है। अगर कोई एक व्यक्ति हिंसक होता है, तो भीड़ के अन्य लोग भी सामाजिक दबाव या उकसावे में आकर हिंसक हो जाते हैं।

वहीं वह लोग जो अपने गुस्से और फ्रस्टेशन को दबा कर रखते हैं, जब उन्हें अपना गुस्सा निकालने का मौका मिलता है तो वह भी गुस्साई भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। वह सब करते हैं जो उनके गुस्से को कम करे जैसे मारना, लड़ना, गाड़ियों पर आग लगाना, पत्थरबाजी करना आदि।

Video edited on Kapwing

ईगो, इमोशनल कंट्रोल की कमी और रिएक्शन माइंडसेट

साफ सीधी बात है, जब कोई व्यक्ति अपने गुस्से और अन्य इमोशन्स पर कंट्रोल नहीं कर पाता है तो वह अचानक रिएक्ट करने लगता है। इसके अलावा हर कोई खुद को सही साबित करना चाहता है और सामने वाले को हराना चाहता है। ऐसी मानसिकता हिंसा को बढ़ावा देती है और व्यक्ति के व्यवहार को आक्रामक बनाती है, जो हिंसा को जन्म देता है।

Highlights

  • नोएडा में निजी कंपनी के कर्मचारियों ने प्रदर्शन के चलते हिंसा की और गाड़ियों पर आग भी लगाई।
  • जब व्यक्ति स्ट्रेस और फ्रस्टेशन से भरा होता है तो वह हिंसा की ओर बढ़ता है।
  • अपने व्यवहार में सुधार लाने के लिए मन की बातों को बाहर निकलें और मेडिटेशन करें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.