
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : April 13, 2026 5:43 PM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
नोएडा प्रदर्शन
Noida Protest Reason And Why People Are Choosing Violence: नोएडा में शनिवार से एक निजी कंपनी के कर्मचारी प्रदर्शन पर हैं। इस विरोध प्रदर्शन में आज सुबह (13 अप्रैल 2026) बहुत ही ज्यादा तोड़-फोड़ कई गई और कई गाड़ियों पर आग भी लगाई गई। यह घटना नोएडा के फेज-2 और सेक्टर 60 के इलाके की है, जहां फैक्ट्री श्रमिक अपने वेतन बढ़ोतरी के लिए प्रदर्शन पर बैठे हैं। मांग पूरी न होने की वजह से उन्होंने पथराव किया और कई गाड़ियों पर आग भी लगा दी। नोएडा पुलिस की गाड़ियों को भी तोड़ा गया। इस घटना के चलते दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर जाम लगने से लोग फंस गए।
लेकिन आखिरकार लोगों में इतनी हिंसा आ कहां से रही है? लोगों के दिमाग में ऐसा क्या आता है कि वह शांति से प्रदर्शन कर रहे होते हैं, लेकिन अचानक ही प्रदर्शन दंगे का रूप ले लेता है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े, रोड रेज, पड़ोसियों के बीच विवाद और यहां तक कि मामूली कहासुनी का हिंसक रूप ले लेना अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। आइए साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा से जानते हैं कि लोगों के मन में हिंसा पैदा कर होती है।
नोएडा प्रदर्शन का कारण
आजकल जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, अगर उसी दर से कर्मचारियों और मजदूरों का वेतन भी बढ़े तो शायद कोई प्रदर्शन पर न बैठे। दरअसल आर्थिक तंगी, रोजगार की कमी और नौकरी को लेकर असुरक्षा और घर की जिम्मेदारियों के चलते लोगों में तनाव बढ़ता है। जब यह स्ट्रेस बाहर नहीं आ पाता तो अंदर ही अंदर फ्रस्टेशन का रूप ले लेता है। और जैसे ही फ्रस्टेशन से इंसान फूटता है जो उसका आक्रामक व्यवहार बाहर आता है और फिर हिंसा का रूप ले लेता है। फिर मारपीट और गाड़ियों पर आग लगने जैसी खबरें आती हैं।
दो बाते हैं, पहली तो यह कि भीड़ में रहकर व्यक्ति अपनी पहचान खो देता है और मोब का हिस्सा बन जाता है। फिर वह भी भीड़ की तरह व्यवहार करता है और हिंसा करने लगता है। अगर कोई एक व्यक्ति हिंसक होता है, तो भीड़ के अन्य लोग भी सामाजिक दबाव या उकसावे में आकर हिंसक हो जाते हैं।
वहीं वह लोग जो अपने गुस्से और फ्रस्टेशन को दबा कर रखते हैं, जब उन्हें अपना गुस्सा निकालने का मौका मिलता है तो वह भी गुस्साई भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। वह सब करते हैं जो उनके गुस्से को कम करे जैसे मारना, लड़ना, गाड़ियों पर आग लगाना, पत्थरबाजी करना आदि।
Video edited on Kapwing
साफ सीधी बात है, जब कोई व्यक्ति अपने गुस्से और अन्य इमोशन्स पर कंट्रोल नहीं कर पाता है तो वह अचानक रिएक्ट करने लगता है। इसके अलावा हर कोई खुद को सही साबित करना चाहता है और सामने वाले को हराना चाहता है। ऐसी मानसिकता हिंसा को बढ़ावा देती है और व्यक्ति के व्यवहार को आक्रामक बनाती है, जो हिंसा को जन्म देता है।
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