फाइनांशियल ईयर में कंपनी से प्रताड़ित हो रहे एम्प्लाइज, ऐसे रख सकते हैं अपनी मेंटल हेल्थ का ख्याल

अगर आपकी मेंटल हेल्थ के खराब होने के पीछे कॉर्पोरेट लाइफ है तो ज्यादा टेंशन न लें। साइकोलॉजिस्ट मालिनी सबा के बताए इन तरीकों को अपनाएं और अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करें।

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Written By: Vidya Sharma | Published : February 5, 2026 9:46 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

Office Ka Work Pressure Kaise Handle Kare: कॉर्पोरेट एम्पलाई अपने वर्क प्रेशर से इतने परेशान हैं सुसाइड के केस दिन ब दिन बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वह अपने वर्कर का वर्क लोड बढ़ा रहे हैं। हम नौकरी इसलिए करते हैं, ताकि अपनी व अपने परिवार की आम जरूरतों को पूरा कर सकें। यही कारण है कि काम की रिस्पेक्ट न करने वाली कम्पनी को छोड़ना मुश्किल फैलसा होता है। खासकर अगर हम फाइनेंशियल ईयर का आखिरी दौर कई कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

टारगेट्स पूरे करने की ज़िम्मेदारी, परफॉर्मेंस रिव्यू, अप्रेजल की उम्मीद और समय की कमी- ये सब मिलकर मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं। ज्यादातर लोग इसे काम का हिस्सा मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन लगातार बना रहने वाला तनाव धीरे-धीरे मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकता है। साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा मानती हैं कि काम से जुड़ा दबाव आज की प्रोफेशनल लाइफ का हिस्सा है, लेकिन इसके बीच अपनी मानसिक सेहत का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है। स्वस्थ मन ही संतुलित फैसले और बेहतर प्रदर्शन कर पाता है।

फाइनेंशियल ईयर में मानसिक दबाव क्यों महसूस होता है?

डॉक्टर कॉर्पोरेट लाइफ को समझते हुए कहती हैं कि 'इस समय कंपनियां अपने सालभर के लक्ष्य पूरे करने पर फोकस करती हैं। ऐसे में कर्मचारियों को सीमित समय में ज्यादा काम, बार-बार रिव्यू और खुद को साबित करने का दबाव महसूस हो सकता है। यह दबाव हर व्यक्ति अलग-अलग तरीके से अनुभव करता है।'

कब सतर्क होने की जरूरत है?

  • अगर आप लगातार
  • थकान महसूस करते हैं
  • नींद पूरी नहीं हो पा रही
  • छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन बढ़ गया है
  • काम का बोझ मन पर भारी लगने लगा है

तो यह संकेत हो सकता है कि दिमाग को थोड़ा आराम और ध्यान चाहिए।

ऐसे रखें अपनी मेंटल हेल्थ का संतुलन

1. काम और निजी जीवन में संतुलन बनाएं

ऑफिस के बाद खुद के लिए समय निकालना ज़रूरी है। हर समय काम से जुड़े रहना जरूरी नहीं। छोटा-सा ब्रेक भी दिमाग को रीसेट कर देता है।

2. भावनाओं को पहचानें और स्वीकार करें

अगर आप तनाव महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। खुद से ईमानदार रहना और अपनी भावनाओं को समझना मानसिक मजबूती की निशानी है। यह सलाह साइकोलॉजिस्ट द्वारा दी गई है इसलिए इसपर खास ध्यान दें और अपनी मेंटल हेल्थ का भी।

3. दिनचर्या को हल्का रखें

डॉक्टर सबा कहती हैं कि 'पूरी नींद, समय पर खाना और थोड़ी-सी फिज़िकल एक्टिविटी दिमाग को स्थिर रखने में मदद करती है। ये छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा असर डालती हैं।' फिर होता है कि हम अंदर ही अंदर स्ट्रेस को जमा लेते हैं और अपनी तबियत खराब कर देते हैं।

4. खुद से कठोर अपेक्षाएं न रखें

हर दिन परफेक्ट परफॉर्म करना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी परिस्थितियां हमारे कंट्रोल से बाहर होती हैं। खुद को बार-बार जज करने से मानसिक दबाव बढ़ता है।

5. जरूरत पड़े तो मार्गदर्शन लें

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना खुद का ख्याल रखने का एक सकारात्मक कदम है। यह समझदारी है, कम जोरी नहीं।

मानसिक सेहत और प्रोफेशनल ग्रोथ साथ-साथ चलती हैं

डॉ. मालिनी साबा मानती हैं कि मानसिक रूप से संतुलित व्यक्ति न सिर्फ बेहतर काम करता है, बल्कि लंबे समय तक अपने करियर को भी स्वस्थ तरीके से आगे बढ़ा पाता है। खुद की देखभाल करना किसी भी प्रोफेशनल की जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए।

आखिर में समझने वाली बात

फाइनेंशियल ईयर का दबाव अस्थायी होता है, लेकिन मानसिक सेहत लंबे समय का विषय है। काम ज़रूरी है, पर खुद को पूरी तरह थका देना जरूरी नहीं। जब आप अपने मन का ख्याल रखते हैं, तभी आप अपने काम में भी अपना सर्वश्रेष्ठ दे पाते हैं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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