
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : November 28, 2025 12:01 PM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
Kisi Ke Jane Ke Baad Life Bekar Kyu Lagti Hai: हम सभी ने कभी न कभी यह महसूस किया है कि जब कोई खास व्यक्ति हमारे जीवन से चला जाता है, चाहे वह दोस्त हो, जीवनसाथी हो या कोई परिवार का सदस्य, तो जैसे हमारी दुनिया ही बदल गई हो। कई बार ऐसा लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है। यह भावना बिल्कुल सामान्य है और इसे समझना बेहद जरूरी है।
डॉ. मालिनी सबा, जो एक अनुभवी साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक हैं, बताती हैं कि यह अनुभव हमारे भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक जुड़ाव का परिणाम होता है। जब हम किसी व्यक्ति के साथ गहरा संबंध बनाते हैं, तो हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी, हमारी आदतें और भावनाएं उस व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमने लगती हैं। उनका चले जाना हमारी भावनात्मक दुनिया में एक खालीपन छोड़ देता है। आइए थोड़ा विस्तार से जानते हैं हम ऐसा क्यों सोचते हैं।
हमारे रिश्ते केवल यादों तक सीमित नहीं होते। वे हमारी दिनचर्या, सोचने के तरीके और निर्णय लेने की क्षमता तक प्रभावित करते हैं। डॉ. सबा कहती हैं कि जब कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति चला जाता है, तो हमारी आदतें अचानक बदल जाती हैं और यह असहजता अक्सर यह भावना पैदा करती है कि सब खत्म हो गया। उदाहरण के लिए अगर कोई जीवनसाथी रोज सुबह चाय लाता था और अचानक वह नहीं है, तो न केवल चाय की आदत बदलती है बल्कि मानसिक और भावनात्मक कमी भी महसूस होती है।
जब कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति जाता है, तो हम केवल उसकी उपस्थिति खोते नहीं, बल्कि एक सुरक्षा और सहारा भी खो देते हैं। यह खालीपन हमारे दिमाग में यह संदेश भेजता है कि जैसे जीवन की नींव ही हिल गई हो। डॉ. सबा समझाती हैं कि यह प्रतिक्रिया सामान्य और स्वाभाविक है। यह हमें अपने दुख से जुड़ने और उसे स्वीकार करने का मौका देती है।
कई बार हम किसी व्यक्ति में अपनी पहचान या खुशी को जोड़ लेते हैं। उनका चले जाना असल में हमें खुद के अंदर झांकने और अपनी भावनाओं को समझने का समय देता है। डॉ. सबा कहती हैं कि यह अनुभव हमें सिखाता है कि सच्चा सहारा हमारे भीतर भी मौजूद होता है, और दूसरों की अनुपस्थिति में भी हम जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।
भावनाओं को संभालने में समय लगता है। किसी के जाने के तुरंत बाद सब खत्म जैसा लगना स्वाभाविक है। लेकिन धीरे-धीरे हमारी आदतें और दिनचर्या नई स्थिति के अनुकूल होने लगती हैं। डॉक्टर कहती हैं कि छोटी-छोटी गतिविधियां, रोजमर्रा की दिनचर्या, और संपर्क में रहने वाले लोग इस खालीपन को भरने में मदद करते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने दुख, खोने की भावना और खालीपन को स्वीकार किया जाए। इसे दबाने की बजाय समझना ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। जब कोई हमारे जीवन से जाता है, तो सब खत्म नहीं होता। यह केवल हमें अपनी भावनाओं से जुड़ने और खुद को फिर से खोजने का अवसर देता है। समय, धैर्य, और अपने आप से प्यार करने की प्रक्रिया के साथ, हम यह समझ पाते हैं कि जीवन में निरंतरता और खुशियां बनी रहती हैं। किसी के जाने का मतलब अंत नहीं, बल्कि एक नया अध्याय शुरू होने का संकेत होता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।