दूसरों को मोटिवेट करने वाले लोग खुद क्यों रहते हैं दुखी? इसके पीछे हैं ये 5 कारण

Motivational Speaker Ke LIye Tips: आपने ऐसे कई लोग देखे होंगे जो दूसरो को मोटिवेट या करें तो ज्ञान बहुत देते हैं, लेकिन जब अपनी बारी आती है तो वह अपनी कही सारी बातें ही भूल जाते हैं। आइए साइकोलॉजिस्ट से जानते हैं ऐसा क्यों होता है।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : January 28, 2026 6:03 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

हम सभी की लाइफ में एक न एक व्यक्ति ऐसा जरूर होता जो दूसरों को मोटिवेट करता है या अधिक ज्ञान देने की कोशिश करता है, लेकिन जब बार अपनी लाइफ की आती है तो ऐसे लोग अपनी ही बातों पर अमल नहीं कर पाते हैं। दूसरों को हौसला देते हैं, मुश्किल समय में साथ खड़े रहते हैं और कहते हैं- 'सब ठीक हो जाएगा।' ऐसे लोग खुद कितने भी परेशान हों, फिर भी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार यही लोग अंदर से बहुत थके हुए और दुखी होते हैं।

हर किसी का दिमाग अलग तरह से काम करता है, इसलिए हमने इस विषय पर विस्तार से जानने के लिए साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा से 5 सवाल पूछे। उन्होंने जवाब देते हुए बताया कि जो लोग दूसरों को मोटिवेट करते हैं, वे अक्सर अपनी भावनाओं को पीछे रख देते हैं। बाहर से मजबूत दिखने वाले ये लोग अंदर से चुपचाप बहुत कुछ झेल रहे होते हैं, जिसके 5 कारण होते हैं। आइए आपको हम डॉक्टर के बताए उन 5 वजहों के बारे में बताते हैं।

सवाल- क्या ऐसा अपनी भावनाओं को दबाने से होता है?

जवाब- जो लोग हमेशा दूसरों को संभालते हैं, वे धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को महत्व देना भूल जाते हैं। उन्हें लगता है कि उन्हें हमेशा मजबूत रहना है और रोने या टूटने का हक उन्हें नहीं है। इस आदत के कारण दुख, गुस्सा और थकान मन के अंदर जमा होती रहती है। जब भावनाओं को बाहर निकलने का मौका नहीं मिलता, तो व्यक्ति अंदर से खाली और उदास महसूस करने लगता है।

सवाल- क्या ऐसा हर किसी के लिए उपलब्ध रहने के दबाव के कारण होता है?

जवाब- हां, मोटिवेशन देने वाले लोग अक्सर सबके लिए उपलब्ध रहते हैं। कोई भी परेशानी हो, लोग सबसे पहले उन्हीं के पास जाते हैं। धीरे-धीरे यह एक जिम्मेदारी बन जाती है। जब कोई व्यक्ति बिना रुके दूसरों को सहारा देता है और खुद के लिए समय नहीं निकाल पाता, तो मानसिक थकावट होना स्वाभाविक है।

सवाल- क्या सबको मोटिवेट करने वाले लोग खुद से ज्यादा उम्मीदें रखते हैं?

जवाब- ऐसे लोग खुद से बहुत सख्त होते हैं। उन्हें लगता है कि उन्हें कभी कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। अगर वे खुद दुखी महसूस करते हैं, तो उन्हें अपराध बोध होने लगता है। यह सोच उन्हें खुद को समझने और आराम देने से रोकती है। नतीजा यह होता है कि वे बाहर से मजबूत दिखते हैं, लेकिन अंदर से टूटते रहते हैं।

सवाल- क्या वह दूसरों की समस्याओं का बोझ अपने ऊपर ले लेते हैं?

जवाब- हां ऐसा हो हो सकता है। मोटिवेट करने वाले लोग दूसरों की बातों को दिल से सुनते हैं। वे केवल सलाह नहीं देते, बल्कि सामने वाले के दर्द को भी महसूस करते हैं। लगातार दूसरों का दुख सुनना और उसे अपने मन में बैठा लेना व्यक्ति को भावनात्मक रूप से थका देता है। धीरे-धीरे यह बोझ उदासी और खालीपन में बदल सकता है।

सवाल- क्या दूसरों को मोटिवेट करने वाले लोग मदद मांगने में झिझकते हैं?

जवाब- देखें जो लोग हमेशा दूसरों की मदद करते हैं, वे खुद मदद मांगने में हिचकिचाते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उनसे उम्मीद करते हैं कि वे हमेशा मजबूत रहेंगे। यह सोच बहुत आम है, लेकिन यही सोच व्यक्ति को अकेला कर देती है। जब जरूरत होती है, तब भी वे अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पाते।

सवाल- इस स्थिति से बाहर कैसे आएं?

जवाब- जवाब के तौर पर डॉक्टर मालिनी सबा ने 5 पॉइंट बताए हैं, जिनकी मदद से आप चीजों को अपने जीवन में भी उतार सकते हैं जैसे- 

  • अपनी भावनाओं को स्वीकार करें
  • कभी-कभी ‘न’ कहना सीखें
  • खुद के लिए समय निकालें
  • अपनी परेशानी किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें
  • जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल मदद लें

दूसरों को मोटिवेट करना एक खूबसूरत गुण है, लेकिन खुद को भूल जाना सही नहीं है। जो लोग दूसरों की रोशनी बनते हैं, उन्हें भी अपने लिए रोशनी की जरूरत होती है। खुद का ख्याल रखना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। जब आप खुद को संभालते हैं, तभी आप दूसरों को सही मायने में सहारा दे पाते हैं।

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