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Medically Verified By: Dr. Malini Saba
Manipulation Kise Kehte Hain: आज के समय में यह वाक्य अक्सर सुनने को मिलने लगा है कि 'मुझे मैनिपुलेट किया गया' या ‘मुझे मैनिपुलेट किया जा रहा है।’ यह बात लोग रिश्तों, दोस्ती, परिवार या काम की जगह पर कहते हैं। साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा ने बताया कि ‘मैनिपुलेशन का मतलब किसी व्यक्ति की सोच या फैसलों को इस तरह प्रभावित करना कि उसे लगे कि वह सब कुछ अपनी मर्जी से कर रहा है, जबकि असल में उस पर भावनात्मक या मानसिक दबाव डाला जा रहा होता है।’ इसलिए आपका इस विषय पर विस्तार से जानना बहुत जरूरी है कि ताकि आप समझ पाएं कि सामान्य भावना शेयर करना या मैनिपुलेट करने में क्या अंतर है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोई भी किसी को मैनिपुलेट कर सकता है। हमने किसी के दिमाग को काफी हद तक प्रभावित करने वाले मैनिपुलेशन के बारे में अधिक जानने के लिए साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा से बात की। उन्होंने विस्तार से बताया कि कोई किसी को मैनिपुलेट क्यों करता है या इससे बचने के लिए क्या किया जा सकता है? आइए हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
मैनिपुलेशन का मतलब होता है किसी व्यक्ति की सोच या फैसलों को इस तरह प्रभावित करना कि उसे लगे कि वह सब कुछ अपनी मर्जी से कर रहा है, जबकि असल में उस पर भावनात्मक या मानसिक दबाव डाला जा रहा होता है। डॉक्टर बताती हैं कि यह जरूरी नहीं कि हर मैनिपुलेशन जानबूझकर किया जाए। कई बार लोग अपनी असुरक्षा, डर या आदतों के कारण भी ऐसा व्यवहार कर बैठते हैं, बिना यह समझे कि सामने वाले पर उसका असर क्या पड़ रहा है।
अक्सर यह एहसास बाद में होता है। जब कोई व्यक्ति पीछे मुड़कर देखता है और महसूस करता है कि उसने अपनी इच्छा के खिलाफ फैसले लिए, तब उसे लगता है कि वह मैनिपुलेशन का शिकार हुआ। डॉक्टर कहती हैं कि कई बार लोग अपनी भावनाओं को ठीक से समझ नहीं पाते और स्थिति को समझने के लिए ‘मैनिपुलेशन’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। वहीं कुछ मामलों में सामने वाला व्यक्ति बार-बार भावनात्मक दबाव डालता है, जिससे यह अनुभव और गहरा हो जाता है।
नहीं, हर बहस, असहमति या गलतफहमी मैनिपुलेशन नहीं होती। रिश्तों में भावनाएं जुड़ी होती हैं और लोग कभी-कभी अनजाने में एक-दूसरे को प्रभावित कर देते हैं। मैनिपुलेशन तब माना जाता है जब किसी एक व्यक्ति की भावनाएं बार-बार नजरअंदाज की जाएं और उसे अपनी बात कहने की जगह न मिले।
जो लोग दूसरों को खुश रखने की कोशिश करते हैं, 'ना' कहने में असहज महसूस करते हैं या अकेलेपन से डरते हैं, वे मैनिपुलेशन के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो सकते हैं। आत्मविश्वास की कमी और सीमाएं तय न कर पाना भी इसकी वजह बन सकता है।
मैनिपुलेशन को समझने का मकसद किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि खुद को बेहतर तरीके से समझना है। जब हम अपनी भावनाओं, जरूरतों और सीमाओं को पहचानते हैं, तो रिश्ते ज़्यादा स्वस्थ और संतुलित बनते हैं। जागरूकता और आत्म सम्मान ही किसी भी तरह के मानसिक दबाव से बचने का सबसे बेहतर तरीका है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।