
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : April 14, 2026 11:22 AM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
CBSE result And Mental Health
CBSE Board Ka Results Date And Time: देखें जैसे-जैसे सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट अनाउंसमेंट का समय करीब आता जाता है, बच्चों के मन में कई तरह के सवाल पैदा होते हैं। उनके इमोशन्स रोलरकोस्टर की तरह ऊपर-नीचे होते रहते हैं। वह "रिजल्ट क्या और कैसा आएगा" इसी सवाल में फंसे होते हैं। ऐसे में कुछ लोग छात्र-छात्राओं से बार-बार पूछते हैं कि "रिजल्ट आ गया क्या?" या "तुम्हारा रिजल्ट कब आ रहा है?" यह बहुत ही आम सवाल हैं जो सभी बच्चों से पूछे जाते हैं।
लेकिन समस्या यह है कि जब बच्चो खुद अपनी चीजों को लेकर परेशान है, तो क्या उसे बार-बार ऐसा सवाल करना सही है? जाहिर सी बात नहीं। लेकिन फिर भी लोग ऐसा करते हैं। वह समझ नहीं पाते हैं कि एक छोटा सा सवाल बच्चे में मन में फ्रस्टेशन और डाउट पैदा कर रहा है। कैसे डाउट? आइए साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा से जाने हैं कि बच्चे से बार-बार रिजल्ट के बारे में पूछना, उनके दिमाग पर कैसे और कैसा असर डालता है।
कोई भी सवाल अगर एक दो बार पूछा जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन बच्चे से बार बार रिजल्ट अनाउंसमेंट के बारे में पूछना, जिसके बारे में उसे खुद नहीं पता। यह चीजें स्टूडेंट्स को फ्रस्टेट कर सकती हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि वह खुद अपने रिजल्ट का वेट कर रहे होते हैं, उन्हें टेंशन होती है कि "अगर नंबर कम आए तो साइंस नहीं ले पाउंगा", "फेल हो गया तो एक साल बर्बाद जाएगा", या "किसी एक सब्जेक्ट पर ER आ गई तो कहीं मेरा एडमिशन ही न हो!"
ऐसे सवाल बच्चे के दिमाग पर गहरा असर डालते हैं, जिससे उनका मूड और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही प्रभावित होते हैं और उन पर नेगेटिव असर पड़ता है। बेहतर होगा कि आप बच्चों में पॉजिटिव थिंकिंग का संचार करें।
जिस बच्चे ने पेपर दिए हैं, वह खुद भी अपने रिजल्ट को लेकर थोड़े डर और छोड़ी उत्सुक्ता में होगा, लेकिन लोगों के बार-बार रिजल्ट के बारे में वह होपलेस फील करने लगते हैं। जैसे कोई अगर ऐसे सवाल करे कि "रिजल्ट कब आ रहा है, कितने नंबर आने की उम्मीद है, अगर कटऑफ मैच नहीं कर पाए तो क्या करने की सोच रहे हो" आदि आदि। ऐसी बातें बच्चे के मन में नेगेटिविटी को पैदा करती हैं, जिससे एक्साइटमेंट से रिजल्ट का इंतजार करता बच्चा होपलेस हो जाता है।
अक्सर कई माता-पिता और आड़-पड़ोस के लोग बच्चे से इतने सवाल करते हैं कि वह खुद को कमतर समझने लगता है। जैसे बच्चे से ये कहना कि "जब हमारा लड़का/लड़की का दसवीं का रिजल्ट आया था तो उसने टॉप किया था, या उसे तो सबसे अच्छा कॉलेज मिला था" ऐसी बातें बच्चे के मन में डर डाल देती हैं। वह खुद की तुलना सबसे करने लगते हैं। इसलिए आप भी अपने बच्चे की तुलना किसी से न करें।
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