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Phobia: किसी एक चीज के लिए मन में डर बैठ जाए तो क्या करें? जानें पुराने फोबिया से जीतने का तरीका

Phobia Kaise Dur Kare: क्या आपको भी फोबिया है? किसी जानवर या अन्य किसी चीज का? अगर हां तो साइकोलॉजिस्ट से जानें अपने डर से कैसे जीतें।

Phobia: किसी एक चीज के लिए मन में डर बैठ जाए तो क्या करें? जानें पुराने फोबिया से जीतने का तरीका
VerifiedVERIFIED By: Dr. Malini Saba

Written by Vidya Sharma |Published : February 11, 2026 5:48 PM IST

Phobia Ko Mann Se Kaise Nikale: हम सभी को किसी न किसी चीज से डर लगता है। किसी को ऊंचाई से, किसी को अंधेरे से, तो किसी को भीड़ या बंद कमरे से। लेकिन जब यह डर सामान्य घबराहट से आगे बढ़कर रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तब उसे फोबिया कहा जाता है। फोबिया हमें डर की वह सीमा होती है जहां व्यक्ति का खुद पर काबू नहीं रहता है और वह उस पर्टीकुलर चीज से दूर भागने या खुद को बचाने की कोशिश करता है।

इस विषय पर साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि ‘फोबिया केवल डर नहीं होता, बल्कि दिमाग की एक तीव्र प्रतिक्रिया होती है। व्यक्ति जानता है कि उसका डर शायद तर्कसंगत नहीं है, फिर भी शरीर और मन उस स्थिति में पहुंचते ही घबराने लगते हैं।’ आइए आपको बताते हैं कि आखिर कैसे आम सा डर फोबिया बन जाता है और अगर ऐसी स्थिति आए तो अपने इस डर से कैसे जीतें।

फोबिया क्या होता है?

डॉक्टर बताती हैं कि फोबिया किसी खास वस्तु, जगह, स्थिति या जीव से जुड़ा गहरा और लगातार रहने वाला डर है। उदाहरण के लिए ऊंचाई से डर (Acrophobia), बंद जगह से डर (Claustrophobia), भीड़ से डर, कीड़ों या जानवरों से डर, उड़ान से डर आदि। फोबिया में सिर्फ डर नहीं होता, बल्कि शरीर में तेज धड़कन, पसीना, चक्कर, सांस फूलना या रोने जैसा मन होना भी शामिल हो सकता है।

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फोबिया क्यों बनता है?

  1. पुराना बुरा अनुभव- अगर बचपन में कोई डरावनी घटना हुई हो, तो दिमाग उसे याद रखता है और भविष्य में उसी जैसी स्थिति में खतरे का संकेत देने लगता है।
  2. सीखा हुआ डर- कभी-कभी हम अपने माता-पिता या आसपास के लोगों को किसी चीज़ से डरते देखते हैं और वही डर सीख लेते हैं।
  3. कल्पना का असर- बार-बार किसी चीज़ के बारे में नकारात्मक सोचने से भी डर मजबूत हो सकता है।

डॉक्टर मालिनी सबा के अनुसार, दिमाग का काम हमें सुरक्षित रखना है। लेकिन कई बार वह छोटी बात को भी बड़ा खतरा मान लेता है।

पुराने फोबिया से कैसे जीतें?

  1. डर को स्वीकार करें- सबसे पहले यह मान लें कि आपको डर लगता है। उसे दबाने या छिपाने से वह और मजबूत होता है।
  2. धीरे-धीरे सामना करें- एकदम से डर का सामना करने की बजाय छोटे कदम उठाएं। अगर ऊंचाई से डर है, तो पहले खिड़की से बाहर देखें, फिर धीरे-धीरे ऊंची जगहों पर कम समय के लिए जाएं।
  1. गहरी सांस लेने का अभ्यास- जब डर महसूस हो, तो धीरे-धीरे गहरी सांस लें। इससे शरीर को संकेत मिलता है कि आप सुरक्षित हैं।
  2. अपने विचारों को चुनौती दें- खुद से पूछें कि 'क्या यह खतरा सच में उतना बड़ा है जितना मेरा मन बना रहा है?' अक्सर डर कल्पना से बड़ा होता है, हकीकत से नहीं।
  3. पेशेवर मदद लें- अगर फोबिया आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो काउंसलिंग या थेरेपी लेना मददगार हो सकता है। विशेष रूप से कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT)फोबिया में असरदार मानी जाती है।

क्या फोबिया पूरी तरह खत्म हो सकता है?

डॉ. मालिनी सबा बताती हैं कि सही मार्गदर्शन और अभ्यास से फोबिया को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कई लोग समय के साथ अपने डर पर काबू पा लेते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं।

खुद को दोष न दें

यह याद रखना जरूरी है कि फोबिया कमजोरी नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक स्थिति है, जिसे समझदारी और धैर्य से संभाला जा सकता है। डर पर जीत एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन छोटे-छोटे कदम आपको धीरे-धीरे मजबूत बनाते हैं। जब आप अपने डर को समझने लगते हैं, तो वही डर आपकी ताकत बन सकता है।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।