हीट स्ट्रेस का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?

Heat Stress And Mental Health: दिन ब दिन गर्मी बढ़ती जा रही है, जो हमारी मेंटल हेल्थ को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है। आइए जानते हैं ऐसा क्यों हो रहा है।

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Written By: Vidya Sharma | Published : April 29, 2026 3:45 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

Heat Stress Mental Health Ko Kaise Effect Karta Hai: आपने देखा होगा और खुद भी महसूस किया होगा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, लोगों के दिमाग का पारा भी बढ़ता जाता है। यह तेज तपती धूप हमारी सेहत को बुरी तरह से प्रभावित करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्मियां हमारी मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करती है?साइकोलॉजिस्ट और मानव अधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि 'गर्मी सिर्फ शरीर को ही नहीं, मन को भी गहराई से प्रभावित करती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे हमारे मूड, सोचने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन पर दबाव बढ़ता जाता है। इस स्थिति को हीट स्ट्रेस कहा जाता है, और इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर अक्सर अनदेखा रह जाता है।'

लेकिन यह समस्या कैसे समझें और ठीक करें? यही जानने के लिए हमने डॉक्टर से पूछा कि आखिर हीट स्ट्रेस का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर होता है? जिसका जवाब उन्होंने बहुत ही विस्तार से दिया। आइए आपको बाते हैं डॉक्टर की दी गई जरूर सलाह, जिसे सभी को फॉलो करना चाहिए।

चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स

तेज तपती गर्मी में शरीर लगातार खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है, जिससे थकान बढ़ती है। शरीर की इस जद्दोजहद का सीधा असर हमारे व्यवहार पर पड़ता है जैसे-  

  • छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है
  • पेशेंस लेवल कम होने लगता है
  • दूसरों के प्रति सहनशीलता में कमी

साथ ही डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि ‘गर्मी में बढ़ता चिड़चिड़ापन सिर्फ परिस्थिति का असर नहीं है, यह हमारे मानसिक संतुलन पर पड़ने वाला वास्तविक दबाव है, जिसे समझना और संभालना बहुत ही ज्यादा जरूरी है।’

चिंता और बेचैनी बढ़ना

गर्मी की वजह से होने वाला स्ट्रेस शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति को अक्सर घबराहट, दिल की धड़कन तेज लगना या बिना कारण बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। खासकर जिन लोगों को पहले से एंग्जायटी की समस्या है, उनके लक्षण और बढ़ सकते हैं।

डिप्रेशन के लक्षणों का बढ़ना

गर्मियों में अक्सर लंबे दौर में बाहर निकलना कम हो जाता है, दिनचर्या बदलती है और नींद भी काफी हद तक प्रभावित होती है। ये सभी चीजें उदासी, ऊर्जा की कमी और किसी काम में रुचि कम होना जैसे डिप्रेशन के लक्षण को बढ़ा सकती हैं। डॉक्टर मालिनी का मानना है कि ‘पर्यावरणीय बदलाव सीधे हमारे भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, इसलिए मानसिक देखभाल को मौसम के अनुसार समझना जरूरी है।’

नींद की गुणवत्ता पर असर

अधिक तापमान हमारे मानसिक स्वास्थ्य और नींद को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इस स्थिति में बार-बार नींद टूटना, गहरी नींद न आना और सुबह थकान महसूस होना शामिल है। नींद की कमी सीधे तौर पर हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, जिससे ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता भी घटती है।

कॉग्निटिव फंक्शन में गिरावट

ज्यादा गर्मी की वजह से हमारे हीट स्ट्रेस के दौरान दिमाग की कार्यक्षमता भी कम हो सकती है। ऐसे में आपको ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, निर्णय लेने में देरी और चीजों को याद रखने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। यह छात्रों और कामकाजी लोगों दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।

गंभीर मानसिक स्थितियों पर खतरा

वह लोग जिन्हें पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, उनमें हीट स्ट्रेस के दौरान स्थिति बिगड़ सकती है। कुछ मामलों में दवाइयों का असर भी गर्मी में बदल सकता है। जैसे डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और स्किजोफ्रेनिया।

कैसे करें बचाव?

हाइड्रेशन बनाए रखें- पानी, नारियल पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लें।

ठंडा वातावरण बनाएं- कूलर, पंखा या एसी का उपयोग करें और सीधे धूप से बचें।

दिनचर्या संतुलित रखें- सुबह या शाम के समय ही बाहर निकलें।

माइंडफुल ब्रेक लें- ध्यान, गहरी सांस और हल्की एक्सरसाइज मानसिक शांति देती हैं।

नींद को प्राथमिकता दें- ठंडे और शांत वातावरण में सोने की कोशिश करें।

डॉक्टर मालिनी सबा के शब्दों में ‘जब हम अपने वातावरण को संतुलित करते हैं, तभी हम अपने भीतर भी संतुलन बना पाते हैं।’ इसलिए आप गर्मी के इस मौसम में अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें और शरीर को ठंडा रखने वाली चीजों का सेवन करें।

डिस्क्लेमर- हीट स्ट्रेस सिर्फ एक शारीरिक समस्या नहीं है, यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। साथ ही हर किसी का मानसिक स्थित अलग-अलग प्रकार से काम करता है। अगर आपको ऐसा लगता है कि घर में रहकर तो आप शांत हैं, लेकिन बाहर जाते ही स्ट्रेस और चिड़चिड़ापन आ जाता है तो किसी अच्छे एक्सपर्ट से सलाह लें।

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