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Symptoms Of Schizophrenia: सिजोफ्रेनिया दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। अक्सर फिल्मों और पॉपुलर कल्चर में इसे “स्प्लिट पर्सनैलिटी” या खतरनाक व्यवहार के रूप में दिखाया जाता है। लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गहरी और मानवीय है। सिजोफ्रेनिया एके रोगी को विभिन्न प्रकार की आवाजें सुनाई देती हैं। इस बीमारी से ग्रस्त लोग खुद को सभी से अलग कर लेते हैं। जानकारी के अभाव के कारण कई बार इलाज, देखभाल और सपोर्ट मिलने में भी दिक्कत होती है। आज इस लेख में सीनियर साइकिएट्रिस्ट (ऑस्ट्रेलिया) और Solh Wellness के को-फाउंडर डॉ तरुण सहगल से जानते हैं शिजोफ्रेनिया के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से -
सिजोफ्रेनिया एक क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) पुरानी दिमागी बीमारी है, जो इस बात को प्रभावित करती है कि व्यक्ति कैसे सोचता है, महसूस करता है और व्यवहार करता है। ये हकीकत को तोड़-मरोड़ देती है, जिससे व्यक्ति के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है। ये आमतौर पर किशोरावस्था के बाद या जवानी की शुरुआत में दिखाई देती है। यह बीमारी महिलाओं और पुरुषों, दोनों को हो सकती है।
डॉ तरुण सहगल बताते हैं कि इसके लक्षणों को तीन हिस्सों में बांटा जाता हैं:
1. पॉजिटिव लक्षण (ऐसे अनुभव जो सामान्य व्यक्ति में नहीं होते, लेकिन इसमें “जुड़” जाते हैं):
2. नेगेटिव लक्षण (सामान्य व्यवहार की कमी):
सिजोफ्रेनिया के कारणों पर बात करते हुए डॉ। तरुण सहगल ने बताया कि इसका कोई एक कारण नहीं होता। यह कई कारकों के मेल से हो सकता है।
1. अनुवांशिक: परिवार में अगर किसी को सिजोफ्रेनिया है, तो जोखिम बढ़ जाता है। लेकिन हमेशा ऐसा हो ये भी ज़रूरी नहीं है।
2. दिमाग की रासायनिकी और संरचना: डोपामाइन और ग्लूटामेट जैसे न्यूरोट्रांसमीटर में असंतुलन।
3. पर्यावरणीय कारण: अगर माँ को गर्भावस्था के समय बहुत ज्यादा तनाव रहा हो, पोषण ठीक से न मिला हो, डिलीवरी के समय कोई दिक्कत हुई हो या फिर गर्भ में बच्चे पर किसी वायरस का असर पड़ा हो तो यह दिमाग़ पर असर डाल सकता है।
4. जीवन के तनाव: अगर किसी ने ज़िंदगी में बड़ा ट्रॉमा झेला हो, लगातार टेंशन में रहा हो या नशे की आदत डाल ली हो।
इसके इलाज के बारे में डॉ तरुण सहगल बताते हैं कि शिजोफ्रेनिया का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए लगातार और व्यापक देखभाल जरूरी है।
1. दवाइयाँ: सिजोफ्रेनिया के इलाज में आमतौर पर डॉ एंटीसाइकोटिक दवाएं देते है। ये दवाइयाँ आवाज़ें सुनाई देना (मतिभ्रम), झूठे विश्वास (भ्रम) और उलझे या बिखरे हुए विचारों को काबू करने में मदद करती हैं।
2. थेरेपी: CBT ( कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी), साइकोएजुकेशन और फैमिली थेरेपी — ये सब जीवन जीने की क्षमता बढ़ाती हैं और दोबारा बीमारी लौटने की संभावना घटाती हैं।
3. सोशल रिहैबिलिटेशन: ट्रेनिंग, सामाजिक कौशल विकसित करना और सामुदायिक समर्थन(कम्युनिटी सपोर्ट) व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है।
4. समग्र देखभाल: जीवनशैली में सुधार, तनाव प्रबंधन, व्यायाम और सही नींद का पैटर्न बहुत मददगार होता है।
हालांकि, सिजोफ्रेनिया को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन शुरुआती लक्षण पहचानकर इलाज शुरू करने से परिणाम बेहतर हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है -
मजबूत सामाजिक सपोर्ट सिस्टम बनाना
नशे से दूरी रखना (खासकर कैनाबिस से)
तनाव प्रबंधन तकनीकें (माइंडफुलनेस, थेरेपी, शारीरिक गतिविधि)
शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत मनोचिकित्सक से मिलना
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।