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साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर क्या होता है? जानिए इसके कारण, लक्षण और इलाज

Psychosomatic Disorder: जब मानसिक या भावनात्मक तनाव शारीरिक लक्षणों में बदल जाता है, तो उसे साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर कहते हैं। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर क्या होता है? जानिए इसके कारण, लक्षण और इलाज
VerifiedVERIFIED By: Dr Tarun Sehgal

Written by priya mishra |Published : September 12, 2025 4:24 PM IST

Psychosomatic Disorder Symptoms: हम अक्सर मानते हैं कि मन और शरीर दो अलग-अलग चीजें हैं। सिरदर्द है तो दवाई ले लो, तनाव है तो मेडिटेशन कर लो। लेकिन हकीकत यह है कि मन और शरीर गहराई से जुड़े हुए हैं। और यहीं से शुरू होते हैं साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर्स यानी ऐसी स्थितियां जहां मानसिक तनाव असली, शारीरिक बीमारियों के रूप में सामने आता है। तो आखिर ये साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर्स होते क्या हैं? इनके पीछे कौन से कारण काम करते हैं और इनके लक्षण किस तरह सामने आते हैं? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने बात की  Solh Wellness के साइकिएट्रिस्ट और को-फाउंडर डॉ तरुण सहगल से। तो आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर क्या है?

डॉ तरुण बताते हैं कि साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर के नाम में ही उसका अर्थ छिपा हुआ है  “Psyche” यानी मन और “Soma” यानी शरीर। साफ और सरल शब्दों में कहें तो जब मानसिक या भावनात्मक तनाव शारीरिक लक्षणों में बदल जाता है, तो उसे साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर कहते हैं। यह सिर्फ दिमाग की बात नहीं होती । क्योंकि कई बार आपके दर्द, थकान, पेट से जुड़ी समस्याएं, सिरदर्द और सीने में भारीपन के पीछे की असली वजह भी अनसुलझा तनाव, चिंता या डिप्रेशन होता है।

साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर के लक्षण

  1. बार-बार सिरदर्द या माइग्रेन
  2. पेट से जुड़ी समस्याएं – गैस, अपच, चिड़चिड़ा पेट
  3. मांसपेशियों या पीठ में दर्द, लगातार थकान बिना किसी साफ वजह के
  4. तनाव के समय बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर या दिल की धड़कन
  5. नींद की समस्या – नींद न आना या खराब क्वालिटी की नींद
  6. त्वचा की समस्याएं – जैसे एक्जिमा या सोरायसिस का तनाव में बढ़ना
  7. बार-बार बीमार होना, क्योंकि तनाव से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है

साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर के कारण

  • लगातार तनाव
  • अनसुलझा भावनात्मक आघात (ट्रॉमा)
  • परफेक्शनिज़्म और ओवरथिकिंग
  • सामाजिक और सांस्कृतिक दबाव – हमेशा सफल होना है, कभी फेल नहीं होना वाली मानसिकता
  • दबाई हुई भावनाएँ - अगर  हम अपने इमोशंस को अंदर ही अंदर दबाते रहते है तो आखिर में वो शारीरिक समस्याओं के रूप में बाहर निकलते है

 साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर का इलाज

डॉ तरुण सहगल बताते हैं कि साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर्स का इलाज केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि मन और शरीर दोनों की देखभाल से होता है। इसमें कई तरह के उपाय शामिल होते हैं:

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मेडिकल मैनेजमेंट – शारीरिक लक्षणों का इलाज करना।

मनोवैज्ञानिक सहारा – थेरेपी, तनाव कम करने के तरीके और जीवनशैली में सुधार।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) – नकारात्मक सोच और व्यवहार के पैटर्न बदलना।

तनाव कम करने की तकनीकें – मेडिटेशन, जर्नलिंग, और सांसों पर ध्यान।

जीवनशैली सुधार – अच्छी नींद लेना, संतुलित खाना और नियमित व्यायाम।

दवाइयां (जहां जरूरी हो साथ ही केवल डॉ की सलाह पर ) – चिंता, डिप्रेशन या विशेष लक्षणों के लिए।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।