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What Is Gaslighting: "सब कुछ तुम्हारे दिमाग का वहम है।" "तुम हमेशा ज्यादा सोचते हो।" "ऐसा कभी हुआ ही नहीं था, तुम याददाश्त खो बैठी हो क्या?" अगर आपसे भी कभी बार-बार कोई ऐसा कहता है तो समझ जाइए, कि आपको सिर्फ धोखा नहीं दिया जा रहा। बल्कि आपकी हकीकत को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। और इसे कहते हैं गैसलाइटिंग। दरअसल, गैसलाइटिंग किसी को मैनिपुलेट करने को दर्शाता है। गैसलाइटिंग का मेंटल हेल्थ पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसके कारण पीड़ित व्यक्ति वास्तव में यह विश्वास कर सकता है कि वे मानसिक रूप से अस्वस्थ है। इतना ही नहीं, उसे अपनी यादों, भावनाओं या धारणाओं पर ही शक हो सकता है। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट और Solh Wellness एप के फाउंडर कपिल गुप्ता से बातचीत की।
कपिल गुप्ता बताते हैं कि गैसलाइटिंग कोई फैन्सी साइकोलॉजिकल टर्म नहीं है। ये एक ख़ामोश हमला है जो आपकी सोच, आपकी समझ और आपकी पहचान पर किया जाता है। आपको इस तरह से मैनिपुलेट किया जाता है कि आप खुद को ही दोष देने लगते हैं, भले ही गलती आपकी हो ही नहीं। ये प्यार या केयर नहीं है, सिर्फ कंट्रोल और माइंड गेम है।
इसके बारे में और ज्यादा डिटेल में बात करते हुए कपिल गुप्ता आगे बताते हैं कि इस शब्द की शुरुआत 1930 के दशक में एक ब्रिटिश नाटक (स्टेज प्ले) ‘Gas Light’ से हुई थी, जिसे पैट्रिक हैमिल्टन ने लिखा था। जिस पर बाद में कई फिल्में भी बनी और यहीं से ये शब्द बोलचाल में आया। 1944 में आई फिल्म 'गैसलाइट' में दिखाया गया था कि एक पति कैसे घर के गैस लैंप की रोशनी धीमी करके अपनी पत्नी को यह यकीन दिलाने की कोशिश करता है कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। वहीं, आजकल के दौर में गैसलाइटिंग मतलब है किसी को इस तरह से मैनिपुलेट कर देना कि उसे अपनी यादों, भावनाओं या धारणाओं पर शक हो जाए।
कपिल गुप्ता कहते हैं कि आप ये समझने की गलती मत कीजिए कि गैसलाइटिंग सिर्फ कपल्स या शादीशुदा रिश्तों की चीज है। क्योंकि ये बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी को अपनी चपेट में ले सकती है। आइए, उदाहरण से समझते हैं -
बच्चे: जब माता-पिता हर बार कहते हैं, “तुम तो नालायक हो, तुमसे कुछ नहीं होगा,” तो बच्चा धीरे-धीरे खुद से डरने लगता है।
टीनएजर्स: दोस्त या पार्टनर बार-बार कहें कि "तुम ओवररिएक्ट करता है", "तुम्हारी फीलिंग्स फालतू हैं", तो वो इंट्रोवर्ट बन जाते हैं, मगर अंदर से टूटे हुए।
कामकाजी लोग: जब ऑफिस में बॉस कहे कि, "तुम ही गड़बड़ करते हो हर बार", तो वो सेल्फ-डाउट में डूब जाते हैं।
बुजुर्ग: जब उनकी बातों को "बुढ़ापे की बकवास" कह कर नजरअंदाज किया जाता है, तो वे अकेलेपन और निरर्थकता से घिर जाते हैं।
हर उम्र की तनाव प्रतिक्रिया अलग होती है। मगर जड़ एक ही है , मन का दम घुटना।
कपिल गुप्ता ने बताते हैं कि गैसलाइटिंग वो अदृश्य घाव है, जिसे कोई देख नहीं पाता। मगर इसका दर्द दिन-रात पीछा करता है। आपको लगने लगता है कि आपका दिमाग आपका दुश्मन है। आप हर निर्णय पर शक करते हैं। गैसलाइटिंग से पीड़ित व्यक्ति की नींद उड़ जाती है, पेट खराब रहता है, दिल धड़कता है वो भी बिना किसी साफ वजह के। उसका स्ट्रेस लेवल इतना बढ़ जाता है कि दिमाग और शरीर दोनों बंद होने लगते हैं।
ध्यान रखें कि गैसलाइटिंग आपकी मेंटल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि कई बार आपको इसका पता भी नहीं चलता। ऐसे में, इस साइकोलॉजीकल इश्यू के प्रति जागरूकता फैलाकर और इसे अच्छी तरह समझकर, हम खुद को और अपने आसपास बहुत से लोगों को इसका शिकार होने से बचा सकते हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।