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Aura Kya Hota Hai: आजकल अक्सर सुनने को मिलता है कि किसी इंसान की 'ऑरा अच्छा है' या 'यहां की एनर्जी ठीक नहीं लग रही।' आपने सोशल मीडिया एल्गोरिदम के हिसाब से अब तक कई कई ऐसी रीस देख ली होंगी जिनमें ऑरा की बात की गई होगी या पता करने तरीका बताया होगा। लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते हैं कि आखिर ऑरा असल में क्या होता है? और इसका हमारे स्वास्थ्य और मन से क्या संबंध है। ऑरा को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं, लेकिन इसे समझना उतना मुश्किल नहीं है।
साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि ऑरा को आसान भाषा में समझें तो यह हमारे शरीर के चारों ओर मौजूद ऊर्जा का एक घेरा है। यह दिखाई नहीं देता, लेकिन इसे महसूस किया जा सकता है। हमारी सोच, भावनाएं, सेहत और रोजमर्रा की आदतें इस ऊर्जा को प्रभावित करती हैं। इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानने के लिए हमने डॉक्टर मालिनी सबा से बात की, उन्होंने बताया कि यह हमारे मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक संतुलन से जुड़ी हुई ऊर्जा को दर्शाता है।' आइए हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

ऑरा हमारे शरीर के चारों ओर मौजूद ऊर्जा का एक घेरा है। यह दिखाई नहीं देता, लेकिन इसे महसूस किया जा सकता है। हमारी सोच, भावनाएं, सेहत और रोजमर्रा की आदतें इस ऊर्जा को प्रभावित करती हैं। जब कोई व्यक्ति खुश, शांत और अंदर से संतुलित होता है, तो उसकी ऑरा मजबूत माना जाता है। वहीं लगातार तनाव, डर, उदासी, गुस्सा या मानसिक थकान से यह ऊर्जा कमजोर हो सकती है।
हमने डॉक्टर सबा से जब यह पूछा की 'ऑरा को कैसे महसूस या चेक किया जा सकता है?' तो उन्होंने बताया कि ऑरा को मापने की कोई मेडिकल मशीन नहीं होती, लेकिन कुछ संकेतों से इसकी स्थिति को समझा जा सकता है।
डॉक्टर सबा ने बताया कि अगर आप अक्सर बिना वजह थके रहते हैं, मन भारी लगता है या छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़े हो जाते हैं, तो यह ऊर्जा असंतुलन का संकेत हो सकता है। इसलिए आप अपने मन को शांत करें और शारीरिक हालत पर ध्यान दें।
ऐसा कभी नहीं होता कि हमें सब के साथ अच्छा लगे या हर किसी की कंपनी में बुरा लगे। साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि कुछ लोगों से मिलकर अच्छा लगता है, जबकि कुछ के साथ समय बिताने के बाद थकान या बेचैनी महसूस होती है। यह आपकी ऑरा और सामने वाले की ऊर्जा के प्रभाव को दर्शाता है।' यानी कि अगर आपको किसी के साथ अच्छा लगता है तो इसका मतलब है कि उनका ऑरा काफी अच्छा है।
डॉक्टर ने बताया कि जब आप कुछ देर शांत बैठते हैं, गहरी सांस लेते हैं या ध्यान करते हैं, तो अपनी अंदरूनी स्थिति को बेहतर समझ पाते हैं। इससे यह साफ होता है कि आप मानसिक रूप से कितने संतुलित हैं।
कुछ लोग रेकी, प्राणिक हीलिंग या एनर्जी एक्सपर्ट की मदद से ऑरा की स्थिति समझने की कोशिश करते हैं। यह अनुभव पर आधारित तरीका माना जाता है।
डॉक्टर कहती हैं कि जब ऑरा कमजोर होता है, तो व्यक्ति जल्दी थक जाता है और भावनात्मक रूप से ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। ऐसे लोग दूसरों की नकारात्मक बातें जल्दी अपने भीतर ले लेते हैं और तनाव का असर उन पर जल्दी पड़ता है। कमजोर ऑरा यह संकेत देता है कि व्यक्ति ने लंबे समय तक मानसिक दबाव झेला है या खुद को आराम देने का समय नहीं दिया। इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति कमजोर है, बल्कि यह कि उसे अब खुद की देखभाल की जरूरत है।
ऑरा कोई रहस्यमय या डराने वाली चीज नहीं है। यह हमारे मन, शरीर और भावनाओं का प्रतिबिंब है। जब हम खुद का ध्यान रखते हैं, संतुलित दिनचर्या अपनाते हैं और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं, तो हमारी ऑरा भी अपने आप बेहतर हो जाती है। ऑरा को समझना दरअसल खुद को बेहतर समझने की दिशा में एक कदम है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।